Mahadevi Verma Ki Vishvadrishti

Tomoko Kikuchi

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  • Year: 2013

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Parmeshwari Prakashan

  • ISBN No: 9788188121953

महादेवी वर्मा की विश्वदृष्टि
सामान्यतः महादेवी वर्मा की ख्याति रहस्यवादी कवयित्री के रूप में काफी समय तक स्थिर रही। उन पर लगाए जाने वाले पलायनवाद के आरोप का युक्तिसंगत खंडन करके महादेवी के साहित्य में प्रकट मानवीय दृष्टिकोण को सामने लाने के लिए इस पुस्तक में उनकी विश्वदृष्टि पर गहरा अध्ययन हुआ है।
महादेवी के साहित्य को अधिक गहनता के साथ समझने के लिए उनके जीवन का सूक्ष्म विवेचन अनिवार्य है, अतः उनके व्यक्तिगत अनुभव के साथ उनके जीवन पर बौद्ध धर्म, संस्कृत काव्य, स्वाधीनता आंदोलन, गांधी, तत्कालीन समाज, संस्कृति, छायावाद आदि के प्रभाव के बारे में भी विचार किया गया है। इस पुस्तक में महादेवी की सभी साहित्यिक विधाओं का विश्लेषण हुआ है, जैसे कविता, गद्य, पत्रिका के साथ महादेवी द्वारा चयनित और अनूदित संस्कृत काव्य का भी विस्तार से विवेचन हुआ है। महादेवी की अब तक असंकलित ‘अबला’ और ‘विधवा’ जैसी महत्त्वपूर्ण कविताओं को हिंदी जगत् के सामने लाने का प्रयास भी हुआ है।
महादेवी वर्मा का एक आश्चर्यजनक व्यक्तित्व है, जिन्होंने एक ही समय में अनेक भूमिकाओं का सफलतापूर्वक निर्वाह किया है, जैसे साहित्यकार, संपादिका, कॉलेज की प्रधानाचार्या, समाज-सेविका इत्यादि। महादेवी के जीवन के उन विभिन्न पहलुओं से एक ही उद्देश्य और एक ही प्रेरणा पाई जाती है। उनका कहना है—"सब स्त्रियों में जागृति उत्पन्न करने, उन्हें अभाव का अनुभव कराने का भार विदूषियों पर है और बहुत समय तक रहेगा।" असल में इस पुस्तक में अभिव्यक्त सभी व्याख्याएँ यह प्रमाणित करने का प्रयास है कि महादेवी अपने साहित्य के माध्यम से एक तो स्त्रियों के मन में अन्यायपूर्ण स्थिति के प्रति प्रश्नचिह्न लगाने की प्रेरणा देती हैं और दूसरा, स्त्रियों को अपनी स्वतंत्रता के लिए आवाज उठाने की शक्ति तथा साहस प्रदान करती हैं।

Tomoko Kikuchi

तोमोको किकुचि
जापान के एशिया-अफ्रीका भाषा विद्यापीठ, तोक्यो में दो साल हिंदी भाषा सीखने के बाद भारत सरकार की ओर से छात्रावृत्ति पाकर तोमोको किकुचि ने 1992 ई. में केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा में एक साल पढ़ाई की। तत्पश्चात् 1996 ई. में महारानी कॉलेज, राजस्थान विश्वविद्यालय में हिंदी साहित्य के विषय को लेकर बी.ए. की परीक्षा उत्तीर्ण की। तदनंतर जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से हिंदी में एम.ए., एम.फिल. और पी-एच.डी. तक की शिक्षा पूरी की। एम.फिल. और पी-एच.डी. दोनों में उनके शोध का विषय महादेवी वर्मा से संबद्ध था।
जापान से प्रकाशित पत्रिका 'Hindi Literature' में उन्होंने महादेवी की कुछ कृतियों के जापानी अनुवाद और उनके जीवन संबंधी निबंध प्रस्तुत किए हैं। उनकी रुचि सदा स्त्रीवादी विचार-धारा के साथ रही। उन्होंने महादेवी के साहित्य को भी उसी दृष्टि से देखने की कोशिश की है और अन्य साहित्य का भी उसी दृष्टि के आधार पर मूल्यांकन करना उनके अध्ययन कार्य का एक उद्देश्य है।

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