Aalochna Ka Rahasyavaad

Parmanand Shrivastva

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  • Year: 2014

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Arya Prakashan Mandal

  • ISBN No: 9788189982973

‘आलोचना का रहस्यवाद’ जाने-माने कवि आलोचक परमानंद श्रीवास्तव के इध्र के चुने हुए अट्ठाईस निबंधें का संग्रह है, जिनमें समय, साहित्य, रूप-वस्तु के तीखे सवाल उठाए गए हैं। अट्ठाइसवाँ निबंध रेणु की प्रसिद्ध कहानी ‘लाल पान की बेगम’ का घनिष्ठ पाठ है। परमानंद श्रीवास्तव के लिए नए लेखक प्रेमचंद के बाद रेणु और अमरकांत से प्रेरणा लेते हैं। वे रूप और वस्तु में एक द्वंद्वात्मक रिश्ता मानते हैं।
परमानंद श्रीवास्तव का प्रिय शब्द है--अँधेरा समय। एक कृति का नाम ही है ‘अँधेरे समय में शब्द’। नया लेखक इसी अँधेरे समय में रास्ता खोजता है। आज लिखने का अर्थ है--तीखे सवालों से मुठभेड़। आलोचना का भी अपना लोकतंत्रा है। मार्क्सवाद है तो उत्तरमार्क्सवाद भी है, प्रतिमार्क्सवाद भी है। ‘कफन’ का पाठ हर बार नए अर्थ देता है। कोई प्रतिमान (कैनन) काफी नहीं है। प्रतिमान धूल में शब्द की तरह है।
आज अकादमिक आलोचना गूढ़ रहस्यात्मक है। रचना की गुत्थी तो सुलझ भी जाती है, आलोचना पल्ले नहीं पड़ती। प्रतिमान तो मुक्तिबोध् के यहाँ हैं, जैसे-- ज्ञानात्मक संवेदना, संवेदनात्मक ज्ञान। पर हर रचना, अपना प्रतिमान अपने साथ लाती है। बड़े आलोचक सवाल पूछते हैं, जैसे--कविता कौन पढ़ता है (आक्तोवियो पॉज़) या एक पृष्ठ को कैसे पढ़ें (आई.ए. रिचर्ड्स) उम्मीद है यह कृति भी आपको बेचैन व्यग्र छोड़ जाएगी।

Parmanand Shrivastva

परमानंद श्रीवास्तव
10 फरवरी, 1935; बाँसगाँव (गोरखपुर) में जन्म। लंबे समय तक सेंट एंड्रयूज कॉलेज में अध्यापन। 1995 में प्रेमचंद पीठ के प्रोफेसर के रूप में अवकाश प्राप्त 
प्रकाशित कृतियाँ :-
कविता: उजली हँसी के छोर पर, अगली शताब्दी के बारे में, चौथा शब्द, एक अनायक का वृत्तांत, इस बार सपने में तथा अन्य कविताएँ (चयन: अनामिका), प्रतिनिधि कविताएँ (चयन: अरुण कमल)। कहानी: रुका हुआ समय। डायरी: एक विस्थापित की डायरी। साक्षात्कार: मेरे साक्षात्कार। आलोचना: कवि कर्म और काव्य भाषा, शब्द और मनुष्य, कविता का अर्थात, दूसरा सौंदर्यशास्त्र क्यों, कविता का उत्तर-जीवन, उपन्यास का पुनर्जन्म, उपन्यास का यथार्थ और रचनात्मक भाषा, अँधेरे समय में शब्द, प्रतिरोध की संस्कृति और साहित्य, उत्तर समय में साहित्य, उत्तर औपनिवेशिक समय में साहित्य, कहानी की रचना-प्रक्रिया, उपन्यास के विरुद्ध उपन्यास, जैनेन्द्र के उपन्यास, आलोचना का स्वराज, अतल में अंतरीप
सम्मान: साहित्य भूषण सम्मान, द्विजदेव सम्मान, गद्य विध सम्मान (हिंदी अकादमी, दिल्ली); व्यास सम्मान (के.के.बिड़ला फाउंडेशन, नई दिल्ली); भारत भारती सम्मान (उ.प्र. हिंदी संस्थान, लखनऊ)
संपर्क: बी-70, आवास विकास कॉलोनी, सूरजकुंड, गोरखपुर-273015

स्मृति शेष: 5 नवंबर,  2013

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