Manjul Bhagat : Samagra Katha Sahitya-1

Kamal Kishore Goyenka

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  • Year: 2013

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 9788170166405

मंजुल भगत : समग्र कथा-साहित्य (1)
संपूर्ण उपन्यास
हिंदी की प्रख्यात लेखिका मंजुल भगत को मैंने कुछ गोष्ठियों में बोलते सुना और संवाद भी किया तो पाया कि वे भारतीय स्त्री का प्रतिरूप है । उनमें भारतीय स्त्री के गहरे संस्कार थे । उनसे मिलना भारत की एक आधुनिक स्त्री से मिलना था । यह स्त्री भारत की संस्कृति और यहाँ  की मिट्टी की उपज थी, जिसमें गहरा अस्तित्व-बोध एवं  स्त्री-स्वातंत्र्य की चेतना थी । उन जैसी संस्कारवान, संकल्पशील, संघर्षरत और संवेदनाओ से परिपूर्ण लेखिका के संपूर्ण कथा-साहित्य के संकलन तथा संपादन का कार्य  करना मेरे लिए गौरव की बात है ।
मजुल भगत की प्रमुख विधा कहानी है और इसी से वे साहित्य में प्रवेश करती हैं, परंतु उपन्यास के क्षेत्र मैं भी उन्होंने अपनी लेखन-प्रतिभा का परिचय दिया और 'अनारो' जैसे उपन्यास की रचना करके देश-विदेश में ख्याति प्राप्त की ।
लेखिका के सभी उपन्यास-'टूटा हुआ इंद्रधनुष', 'लेडीज़ क्लब', 'अनारो', 'बेगाने घर में', 'खातुल', 'तिरछी बौछार’ तथा 'गंजी' के साथ-साथ उनके प्रकाशित कूल कहानी-संग्रहों में संकलित कहानियों को इस संकलन-द्वय से एक साथ प्रस्तुत किया गया है ।
इस समग्र रचना-संसार को पढ़कर कहा जा सकता है  कि साहित्य के प्रति मंजुल भगत की गहरी आस्था थी । लेखिका का दृढ़ विश्वास था कि आने वाले समय में, तमाम अपसंस्कृति एवं अमानवीयकरण के बावजूद उनके उपन्यास और कहानियाँ अवश्य ही पढे जाएंगे । बीसवीं शताब्दी में भारतीय स्त्री को जानने और समझने के लिए मंजुल भगत का कथा-साहित्य एक प्रामाणिक दस्तावेज है

Kamal Kishore Goyenka

कमलकिशोर गोयनका 
प्रेमचंद के जीवन विचार तथा साहित्य के अनुसंधान एवं आलोचना के लिए आधी शताब्दी अर्पित करने वाले देश-विदेश में 'प्रेमचंद-विशेषज्ञ' के रूप में विख्यात; प्रेमचंद पर 25 पुस्तकें तथा अन्य हिंदी साहित्यकारों पर 23 पुस्तकों का प्रकाशन; कुछ प्रमुख पुस्तकें-'प्रेमचंद के उपन्यासों का शिल्प-विधान' 'प्रेमचद : विश्वकोश' (खंड-2), 'प्रेमचंद का अप्राप्य साहित्य' (खंड-2 ) , 'प्रेमचंद : चित्रात्मक जीवनी', 'प्रेमचंद  : कहानी रचनावली' (खंड-6), 'प्रेमचंद : अनछुए प्रसंग', 'प्रेमचंद : वाद, प्रतिवाद और संवाद', 'गांधी : पत्रकारित के प्रतिमान', 'हिंदी का प्रवासी साहित्य' इत्यादि

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