Maitreyi Pushpa : Rachna Sanchayan

Sushil Sidharth

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  • Year: 2016

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 9789385054921

मैत्रेयी पुष्पा ने कथा साहित्य में एक नए अध्याय की शुरुआत की। बुंदेलखंड के परिवेश और स्वतंत्रचेता परिवार से मिली ऊर्जा ने उनको जीवन की समझ दी। परिस्थितियों ने उन्हेंस्वावलंबी बनायामुसीबतों ने हिम्मत दी। जब वे लिखने की दुनिया में आईं तो उनके पास जो अनुभव थे वे किसी समकालीन लेखक के पास नहीं थे। मध्यवर्गीय मनुहारोंमेंझूला झूलते कथा साहित्य की पींगें रुक गईं जब इदन्नममआया। इस उपन्यास का प्रकाशन एक युगांतर जैसा है। इसके बाद चाकअल्मा कबूतरीकही ईसुरी फागआदिउपन्यासों और कई लंबी कहानियों से उन्होंने रचना का ठाठ उलट दिया। हिंदी नई चाल में ढलीके जोड़ पर कहा जा सकता है कि कथा साहित्य नई चाल में ढला।

मैत्रेयी पुष्पा को पढ़ते हुए मुंशी प्रेमचंद का वह अविस्मरणीय भाषण याद आता रहता है जिसमें उन्होंने सौंदर्य का मेयार बदलने का आवाहन किया था। मैत्रेयी ने सौंदर्य कीव्याख्या नहीं कीउसका मेयार बदल दिया। ऐसे कथानक और पात्र कथा साहित्य में आए कि कुलीनतंत्र में भगदड़ मच गई। अनुभवों की रेशमी चादरों में लिपटे लोग भरोसा नहींकर पाए कि यह जीवन इसी देश का हैये पात्र इसी समाज के हैं।

मैत्रेयी पुष्पा : रचना संचयनसाहित्य के अपार पाठकों के लिए है। उनके लिएजिनके लिए मैत्रेयी ने रचना और जीवन में निरंतर संघर्ष किया है। यह रचनात्मक संघर्ष अभीसमाप्त नहीं हुआ है।

Sushil Sidharth

सुशील सिद्धार्थ 
 जन्म : 2 जुलाई, 1958, ग्राम भीरा , जिला सीतापुर ( उ.प्र. )
शिक्षा : हिंदी साहित्य में पी-एच डी.
प्रकाशित पुस्तकें : 'प्रीति न करियो कोय', 'मो सम कौन', 'नारद की चिंता (व्यंग्य संग्रह) ० 'बागन- बागन कहै चिरैया', ' एका' (अवधी कविता संग्रह)
संपादित पुस्तकें : 'श्रीलाल शुक्ल संचयिता', 'मेरे साक्षात्कार : शिवमूर्ति', 'मेरे साक्षात्कार : मन्नू भंडारी', 'दस प्रतिनिधि कहानियां : उषाकिरण खान', 'दस प्र तिनिधि कहानियां : ऋता शुक्ल', 'प्रतिनिधि कहानियां : चित्रा मुद्ल', 'हिंदी कहानी का युवा परिदृश्य' ( 3 खंड)
व्यंग्य और आलोचना में सक्रिय
कई समाचार-पत्रों व पत्रिकाओं में स्तंभ लेखन । पर्याप्त मीडिया लेखन
'उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान' से दो बार व्यंग्य और दो बार अवधी कविता हेतु नामित पुरस्कार । आलोचना के लिए 'स्पंदन सम्मान'
'व्यंग्य लेखक समिति' (वलेस) के राष्ट्रीय अध्यक्ष

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