Parakh (Paperback)

Malti Joshi

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  • Year: 2019

  • Binding: Paperback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 978-93-80146-44-7

परख
"तुमने अपने बचपन में मुझे एक सपना दिखाया था कि तुम पढ़-लिखकर बड़े आदमी बनोगे, तुम्हारा एक बड़ा-सा बँगला होगा, बँगले में मेरा भी एक कमरा होगा, कमरे से लगी बालकनी में एक झूला पड़ा होगा, उस झूले पर बैठकर मैं तुम्हारे बच्चों को कहानियाँ सुनाऊँगी, उनके लिए स्वेटर बुनूँगी।
"अब तुम बड़े आदमी बन गए हो। तुम्हारे पास बड़ा-सा बँगला भी है, घर में बाल-गोपाल भी हैं, पर मेरा सपना तो अधूरा ही रह गया न ! अभी तुमने मेरे लिए इतने ठिकाने गिनाए, पर एक बार भी नहीं पूछा कि जिया, मेरे घर रह सकोगी ? देखो, मुझसे जैसा बना, मैंने तुम्हारा बचपन सँवारा था। अब तुम मेरा बुढ़ापा सुधार रहे हो। हिसाब बराबर हो गया।"
"कैसी बात कर रही हो जिया !" वीरेश आवेश में एकदम उठकर खड़ा हो गया, "कसम ले लो जो आज तक मैंने कभी तुम्हें आया समझा हो।" उसका स्वर एकदम तरल हो आया, "अपनी जन्मदायिनी माँ को तो मैंने बस तस्वीर में ही देखा है। उनकी कोई याद मेरे मन में नहीं है। पर सच कहता हूँ, बाहर रहते हुए जब भी घर की याद आई है, माँ के रूप में तुम्हारी छवि मन में उभरी है। मुझे दुःख है तो इसी बात का कि इस रिश्ते को कोई वैधानिक दर्जा नहीं मिल सका, नहीं तो मैं वृद्धाश्रमों की खाक क्यों छानता ! तुम्हें साधिकार, ससम्मान सीधे अपने घर ले जाता।"
"यह तुम्हारा वहम है बेटे ! इसे अपने मन से निकाल दो। वैधानिकता रिश्तों को गारंटी नहीं देती, नहीं तो तुम्हारे उस पाँचसितारा वृद्धाश्रम में इतने लोग आकर क्यों बसते !"           
-[इसी संग्रह की कहानी ‘अनिकेत’ से]

Malti Joshi

मालती जोशी

जन्म :  4 जून, 1934
शिक्षा : एम०ए० हिंदी, आगरा विश्वविद्यालय।

लगभग 35 पुस्तकें प्रकाशित, जिनमें दो मराठी कथा-संग्रह, दो उपन्यास, पाँच बाल-कथाएँ, एक गीत-संग्रह और शेष कथा-संग्रह सम्मिलित
हिंदी की लगभग सभी लब्धप्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में कहानियां एवं लघु उपन्यास प्रकाशित। करीब दो दर्जन कहानियों के रेडियो नाट्य रूपांतर दूरदर्शन पर कई कहानियों के नाट्य रूपांतर। जया बच्चन द्वारा सात कहानियों पर 'सात फेरे' सीरियल गुलजार द्वारा निर्देशित सीरियल 'किरदार' में दो कहानियों का समावेश। 'भावना' सीरियल में तीन कहानियों का प्रस्तुतिकरण।
अहिन्दीभाषी कथा-लेखिका के रूप में शिवसेवक तिवारी पदक, रचना पुरस्कार, कलकता 1983, मराठी कथा-संग्रह ‘पाषाया' के लिए महाराष्ट्र शासन का पुरस्कार सन् 1984, अक्षर आदित्य सम्मान, कला मंदिर सम्मान, मधुवन गुरुवंदना सम्मान, महिला वर्ष में स्टेट बैंक ऑफ इंदौर सम्मान, म०प्र० के राज्यपाल द्वारा अहिंदीभाषी लेखिका के रूप में सम्मान (1985), म०प्र० हिंदी साहित्य सम्मेलन के 'भवभूति' अलंकरण से वर्ष 1998 में विभूषित । 

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