Nobel Puraskaar Vijetaaon Ki 51 Kahaniyan (Paperback)

Surendra Tiwari

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  • Year: 2018

  • Binding: Paperback

  • Publisher: Arya Prakashan Mandal

  • ISBN No: 978-81-89982-89-8

नोबेल पुरस्कार विजेताओं की 51 कहानियाँ
साहित्य के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार की महत्ता सर्व-स्वीकृत है, क्योंकि यह किसी एक व्यक्ति का नहीं, एक राष्ट्र का सम्मान होता है। साहित्य के क्षेत्र में सन् 1901 से 2005 तक 98 पुरस्कार दिए जा चुके हैं और पुरस्कृत साहित्यकारों में कवि भी हैं, कथाकार भी, दार्शनिक भी हैं और इतिहासकार भी। लेकिन मेरी यह निश्चित धारणा है कि इन रचनाकारों में जो कथाकार रहे हैं, उन्होंने पूरे विश्व पर अपना एक अलग प्रभाव छोड़ा है और उनकी कथाकृतियाँ सर्वाधिक चर्चित, प्रशंसित होती रही हैं। इस पुस्तक में यह प्रयास है कि इन कथाकारों की कुछ श्रेष्ठ कहानियाँ एक साथ उपलब्ध हो सकें।
इन कहानियों को पढ़ने के बाद सहज ही यह अनुमान लगाया जा सकता है कि विश्व के इन श्रेष्ठ और समर्थ रचनाकारों के पास कैसी वैचारिक दृष्टि या रचना-शैली थी या है। और यह भी अनोखी बात इन कहानियों के माध्यम से हमारे सामने आती है कि अलग-अलग देशों के अलग-अलग रचनाकारों की वैचारिक दृष्टि भले ही अलग हो, किंतु मानवीय संवेदनाओं के, मूल्यों के, जीवन के प्रति गहरी आस्था और विकास के वे एक जैसे पक्षधर हैं और शायद यही इनकी श्रेष्ठता का कारण है, मापदंड है।
इस पुस्तक की अनिवार्यता और महत्ता को मैं इसी दृष्टि से स्वीकारता हूँ और शायद आप भी स्वीकारेंगे। (भूमिका से)

Surendra Tiwari

सुरेन्द्र तिवारी
कहानी, नाटक एवं उपन्यास विधाओं में करीब तीस वर्षों से लगातार लेखन। अनेक कहानियों के अनुवाद अंग्रेजी तथा कई भारतीय भाषाओं में हो चुके हैं। आकाशवाणी और दूरदर्शन से रचनाएँ प्रसारित।
मौलिक लेखन के अतिरिक्त बाँग्ला से अनेक कहानियों एवं उपन्यासों के अनुवाद प्रकाशित। रंगमंच से विशेष लगाव। हिंदी एवं पंजाबी में कई नाटकों का निर्देशन किया।
हिंदी अकादमी, दिल्ली का ‘कृति पुरस्कार’ तथा ‘साहित्यकार सम्मान’, ‘सहस्राब्दी हिंदी सेवा सम्मान’, ‘सृजन सम्मान’ (रायपुर) तथा नाट्य-निर्देशन के लिए ‘कलाश्री’ सम्मान।
कुछ प्रमुख पुस्तकें: ‘दूसरा फुटपाथ, ‘इसी शहर में’, ‘आशंकित अँधेरा’, ‘अनवरत तथा अन्य कहानियाँ’ (कहानी-संग्रह); ‘फिर भी कुछ’, ‘अंततः’, ‘अग्निपर्व’ (उपन्यास); ‘दीवारें’, ‘एक और राजा’, ‘शेष नहीं’, ‘चबूतरा तथा अन्य नाटक’ (नाटक); ‘कथा रंग’, ‘चंद चेहरे चंद बातें’ (साक्षात्कार); ‘शब्द से शब्द निकलते हैं’ (आलोचना); ‘मील का पहला पत्थर’, ‘काला नवंबर’, ‘कथा-धारा’, ‘श्रेष्ठ हिंदी लघु नाटक’, ‘बीसवीं सदी की सौ कहानियाँ’, ‘बीसवीं सदी की महिला कथाकारों की कहानियाँ’ आदि संपादित पुस्तकें।

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