Manav Adhikar Aur Ham (Paperback)

Urmila Jain

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  • Year: 2014

  • Binding: Paperback

  • Publisher: Parmeshwari Prakashan

  • ISBN No: 978-93-80048-42-0

मानव अधिकार और हम
हिंदी में प्रति वर्ष एक हज़ार से अधिक पुस्तकें छपती  हैं, पर अभी तक कोई ऐसी पुस्तक मेरे देखने में नहीं  आई है जिससे जन-सामान्य को सहज-सरल भाषा में मानव अधिकार संबंधी जानकारी प्राप्त हो सके। हिंदी की इस कमी का ध्यान में रखते हुए इस पुस्तक में मानव अधिकार की धारणा सहित अन्य विषयों के संबंध में भी चर्चा की गई है । 
मानव अधिकार का उल्लंघन कब, कैसे और क्यों  होता है और हो सकना है—इसके कुछ उदाहरण देते हुए यह भी बतलाया गया है कि अधिकांश देश किस प्रकार सैद्धांतिक रूप से तो मानव अधिकार की सार्वभौमिक घोषणा का समर्थन करते हैं और इसी के आधार पर उन्होंने अपने-अपने देश में तरह-तरह के कानून भी बनाए हैं, पर जहाँ नक उन पर अमल  करने की बात है-इस संबंध में अधिकांश, देशों का रिकॉर्ड बहून ही निराशाजनक है ।
प्रस्तूत पुस्तक में बाल अधिकार उल्लंघन और बालकों के यौन शोषण का उल्लेख करते हुए बतलाया गया है कि किस प्रकार अपराधियों का दोष सिद्ध होने के बावजूद उनके विरुद्ध कोई ऐसी कार्यवाई नहीं की जाती, उन्हें ऐसा दंड नहीं दिया जाता कि इस प्रकार के अपराधों पर रोक लगे ।
-उर्मिला जैन

Urmila Jain

डॉ० उर्मिला जैन
शिक्षा : एम०ए०, डी०फिल० (इलाहाबाद विश्वविद्यालय), प्रथम श्रेणी एवं स्वर्ण पदक प्राप्त ।
प्रकाशन : आधुनिक हिंदी काव्य में क्रांति की विचार-धाराएं', 'साहित्य के नये सदेर्भ : अछूते विषयों पर कुछ विचार' (महेन्द्र राजा जैन के साथ), 'देश-देश में, गांव-गांव  में (यात्रा-वृत्तांत)। हिंदी की प्राय: सभी प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित ।
अन्य : 'नई आजादी', 'जैन बालादर्श' का संपादन । 1965 से 1980 तक विदेश-प्रवास एवं बाद में लगातार विदेश-यात्राएं । लंदन स्थित राष्ट्रीय पुस्तकालय में कार्य । 'ब्रिटिश म्यूजियम तथा 'इंडिया ऑफिस लायब्रेरी' में अनुसंधान ।
बी०बी०सी० से प्रसारण ।
ब्रिटेन तथा आयरलैंड की एकाधिक समाजसेवी अंतर्राष्ट्रीय  संस्थाओं में सक्रिय भागीदारी । 'भारत ज्ञान-विज्ञान समिति' में उत्तर प्रदेश इकाई की अध्यक्षा, 'सर्वेण्ट ऑफ इंडिया सोसायटी' की पूर्व अध्यक्षा ।
इलाहाबाद में निराश्रित महिलाओं के लिए 'शार्ट स्टे होम' और पीडित महिलाओं की सहायता के लिए 'लीगल सेल' की स्थापना तथा अपेक्षित सहायता । महिला संख्या 'मानुषी मंगल' की संस्थापक सदस्या । विगत अनेक वर्षों से महिला उत्थान संबंधो अन्य विविध कार्य ।
गुड़िया संग्रह तथा छायांकन अन्य अभिरुचियाँ ।
संप्रति : संस्कृतिकर्म तथा स्वतंत्र लेखन ।

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