Jangal Ke Jeev-Jantu (Paperback)

Ramesh Bedi

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  • Year: 2013

  • Binding: Paperback

  • Publisher: Arya Prakashan Mandal

  • ISBN No: 978-81-88118-99-1

अधिकांश जीवो की जानकारी देते हुए लेखक ने वन्य-जीवन के अपने अनुभवों का ही सहारा लिया है। पुस्तक को पढ़ते समय जंगल के रहस्य परत दर परत खुलते चले जाते हैं। जंगल के रहस्य-रोमांच का ऐसा जीवंत वर्णन इस पुस्तक में किया गया है कि जंगल की दुनिया का चित्र आंखों के सामने साकार हो जाता है। 
जंगली जीवांे के बारे में लोक-मानस में प्रचलित कई अंधविश्वासों और धारणाओं का उन्होंने अपने व्यक्तिगत अनुभवों के आधार पर खंडन कर सही तस्वीकर पाठकों के सामने रखी है। जंगल में स्वतंत्र रूप से विचरते जन्तुओं के जीवन पर आधारित यह पुस्तक पाठक को आद्योपांत अपनी विषय-वस्तु में रमाए रखती है। यह हमं वनों, वन्य-जीवों और पर्यावरण को संरक्षण प्रदान करने की प्रेरणा देती है।

Ramesh Bedi

रामेश बेदी
बहुमुखी प्रतिभासम्पन्न लेखक और प्रकृति के कुशल फोटोग्राफर
जन्म : 20 जून, 1915, कालाबाग (अब पाकिस्तान)
शिक्षा : गुरुकुल कांगडी विश्वविद्यालय, हरिद्वार से अनिवासी के रूप में ।
ज़डी-बूटियों की खोज में श्री बेदी ने हिमालय तथा भूटान के हरे-भरे पहाडों और हिमालय-पार लद्दाख के उजाड़ पर्वतीय मरुस्थल में दुष्कर यात्राएं की । अभेद्य जंगलों  और दुरूह पर्वतों व घाटियों के विस्तृत दौरों में श्री बेदी ने जडी-बूटियों के दस हजार से अधिक नमूनों का संग्रह किया, जो राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय महत्व के हर्बेरियमों में सुरक्षित है । वनस्पति के विभिन्न क्षेत्रों में अनुसन्धान करने वाले वैज्ञानिकों के लिए ये बहुत उपयोगी हैं ।
प्रकाशन : वन्य जीव-जन्तु, जडी-बूटियां, फल, वृक्ष तथा यात्रा-वृत्तांत विषयक लगभग सौ पुस्तकें प्रकाशित । सैकडों लेख अंग्रेजी, रूसी, जर्मनी, जापानी, इतालवी, नेपाली, कन्नड़, पंजाबी, बंगाली, गुजराती, मराठी तथा उडिया आदि में अनूदित ।
यात्रा : अनुसन्धान-कार्यों के सिलसिले से ब्रिटेन, ब्राजील, कनाडा, भूटान और श्रीलंका की यात्रा ।
सम्मान : हिन्दी अकादमी, दिल्ली तथा दिल्ली संस्कृत अकादमी द्वारा प्रशस्ति-पत्र एवं साहित्यिक कृति सम्मान, केन्द्रीय पर्यावरण मंत्रालय द्वारा मेदिनी पुरस्कार, इंदिरा गांधी पर्यावरण पुरस्कार (मरणोपरांत) और अनेक विशिष्ट पुरस्कार ।

रपृति-शेष : 9 अप्रैल, 2003

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