Gulloo Aur Ek Satrangi : 3 (Paperback)

Shrinivas Vats

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  • Year: 2013

  • Binding: Paperback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 978-93-83233-24-3

तीसरा खंड लिखते समय मुझे आनंद की विशेष अनुभूति हुई। कारण, चुलबुला विष्णु कर्णपुर जो लौट आया। इस खंड को पढ़ते हुए आपको भी ऐसा लगेगा कि विष्णु की उपस्थिति हमें आव्हादित करती है। मैंने विभिन्न विधाओं में अब तक लगभग तीन दर्जन पुस्तकें लिखी हैं, लेकिन इस किशोर उपन्यास से मुझे विशेष लगाव है। भला क्यों?
आपके मम्मी-पापा की तरह मेरे पिताजी भी मुझे डाॅक्टर बनाना चाहते थे। मैंने विज्ञान पढ़ा भी। पर जीवित मेढक, खरगोश के ‘डाइसेक्शन’ मन खिन्न हो उठा। मैंने अपनी दिशा बदल ली। मेरी अलमारी में जीवविज्ञान की जगह कालिदास, शेक्सपियर, टैगोर, प्रेचंद की पुस्तकें आ गई। साहित्य पढ़ना और लिखना अच्छा लगने लगा। सोचता हूं, भले ही मैं डाॅक्टर न बन सका, लेकिन विज्ञान और कल्पना के बीच संतुलन बनाते हुए बालकों के लिए लिखना चिकित्सकीय अनुभव जैसा ही है। संभव है चिकित्सक बनकर बच्चों से उतना घुल-मिल न पाता, जितना उन्हें अब समझ पा रहा हूं।
सतरंगी की चतुराई ने तो मेरा मन ही मोह लिया। डाॅक्टर बनने की राह आसान हो गई। पूछो, कैसे? पढ़िए चैथे खंड में।
-श्रीनिवास वत्स

Shrinivas Vats

श्रीनिवास वत्स
जन्म : 23 दिसंबर, 1959, रोहतक (हरियाणा)
शिक्षा : एम०ए०, बी०एड०, पी०जी०जे०डी०, शास्त्री 
लेखन एवं प्रकाशन : हिंदी की लगभग सभी महत्वपूर्ण पत्र-पत्रिकाओं में  कहानियाँ एवं व्यंग्य  लेख प्रकाशित । 'साप्ताहिक हिंदुस्तान' में 'लघु व्यंग्य स्तंभ' काफी चर्चित रहा। पिछले बीस वर्षों से आकाशवाणी एवं दूरदर्शन के  लिए लेखन । बाल-साहिल में विशेष कार्य ।
प्रकाशित पुस्तकें :-
'प्रश्न एक पुरस्कार का', 'व्यंग्य तंत्र', 'चोर भये कोतवाल' (व्यंग्य); 'गूँगा देश', 'यमराज के वरदान', 'नए महाराज' (नाटक); 'पाशमुक्ति', 'माँ का स्वप्न' (कहानी/उपन्यास); 'आकार लेते विचार' (निबंध); कहानियों की आठ पुस्तकें (बाल-साहित्य)
पुरस्कार :-
राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एन०सी०ई०आर०टी०) द्वारा राष्ट्रीय पुरस्कार । बिहार सरकार के राजभाषा विभाग द्वारा 'डॉ० अमरनाथ झा' पुरस्कार । हरियाणा साहित्य अकादमी द्धारा कहानी के लिए तीन पुरस्कार । चिल्ड्रेंस बुक ट्रस्ट एवं शकुन्तला सिरोठिया बाल-साहित्य पुरस्कार से सम्मानित ।

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