Gulloo Aur Ek Satrangi : 1 (Paperback)

Shrinivas Vats

Availability: In stock

Seller: KGPBOOKS

Qty:
115 + Free Shipping


  • Year: 2013

  • Binding: Paperback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 978-93-80146-67-6

गुल्लू कर्णपुर गांव के किसान विजयपाल का बेटा है। उसका असली नाम गुलशन है, पर सब उसे प्यार से ‘गुल्लू’ ही कहते हैं। उसकी उम्र है लगभग बारह साल। उसकी एक छोटी बहन है राधा। उसकी उम्र आठ साल है। परंतु वह स्कूल नहीं जाती। कारण, उनके गांव में कोई स्कूल नहीं है। उनकी मां को मरे आठ साल हो गए। राधा को जन्म देने के बाद मां चल बसी थी।
गुल्लू की मां की मृत्यु के बाद उनके पिता ने पास के गांव की सविता नामक एक महिला से पुनः विवाह कर लिया। सौतेली मां घर में आई तो गुल्लू खुश था। उसे भरोसा था कि उसे और उसकी छोटी बहन को मां का प्यार मिल जाएगा। पर सौतेली मां बहुत कठोर स्वभाव की थी। शुरू में कुछ दिन तो ठीक रहा, पर बाद में उसने बच्चों को पीटना शुरू कर दिया। बात-बात में भला-बुरा कहती। यद्यपि किसान के सामने वह लाड़-प्यार का नाटक करती, पर उसके खेत में जाते ही वह बच्चों को डांटना शुरू कर देती।

-इसी पुस्तक से

Shrinivas Vats

श्रीनिवास वत्स
जन्म : 23 दिसंबर, 1959, रोहतक (हरियाणा)
शिक्षा : एम०ए०, बी०एड०, पी०जी०जे०डी०, शास्त्री 
लेखन एवं प्रकाशन : हिंदी की लगभग सभी महत्वपूर्ण पत्र-पत्रिकाओं में  कहानियाँ एवं व्यंग्य  लेख प्रकाशित । 'साप्ताहिक हिंदुस्तान' में 'लघु व्यंग्य स्तंभ' काफी चर्चित रहा। पिछले बीस वर्षों से आकाशवाणी एवं दूरदर्शन के  लिए लेखन । बाल-साहिल में विशेष कार्य ।
प्रकाशित पुस्तकें :-
'प्रश्न एक पुरस्कार का', 'व्यंग्य तंत्र', 'चोर भये कोतवाल' (व्यंग्य); 'गूँगा देश', 'यमराज के वरदान', 'नए महाराज' (नाटक); 'पाशमुक्ति', 'माँ का स्वप्न' (कहानी/उपन्यास); 'आकार लेते विचार' (निबंध); कहानियों की आठ पुस्तकें (बाल-साहित्य)
पुरस्कार :-
राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एन०सी०ई०आर०टी०) द्वारा राष्ट्रीय पुरस्कार । बिहार सरकार के राजभाषा विभाग द्वारा 'डॉ० अमरनाथ झा' पुरस्कार । हरियाणा साहित्य अकादमी द्धारा कहानी के लिए तीन पुरस्कार । चिल्ड्रेंस बुक ट्रस्ट एवं शकुन्तला सिरोठिया बाल-साहित्य पुरस्कार से सम्मानित ।

Scroll