Dus Pratinidhi Kahaniyan : Usha Kiran Khan (Paperback)

Usha Kiran Khan

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  • Year: 2015

  • Binding: Paperback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 978-93-85054-13-6

दस प्रतिनिधि कहानियाँ : उषाकिरण खान
'दस प्रतिनिधि कहानियाँ' सीरीज़ किताबघर प्रकाशन की एक महत्त्वाकांक्षी कथा-योजना है, जिसमें हिन्दी कथा-जगत् के सभी शीर्षस्थ कथाकारों को प्रस्तुत किया जा रहा है ।
इस सीरीज़ में सम्मिलित कहानीकारों से यह अपेक्षा की गई है कि वे अपने संपूर्ण कथा-दौर से उन दस कहानियों का चयन करें, जो पाठको, समीक्षकों तथा संपादकों के लिए मील का पत्थर रही हों तथा ये ऐसी कहानियाँ भी हों, जिनकी वजह से उन्हें स्वयं को भी कहानीकार होने का अहसास बना रहा हो। भूमिका-स्वरूप कथाकार का एक वक्तव्य भी इस सीरीज़ के लिए आमंत्रित किया गया है, जिसमें प्रस्तुत कहानियों को प्रतिनिधित्व सौंपने की बात पर चर्चा करना अपेक्षित रहा है ।
किताबघर प्रकाशन गौरवान्वित है कि इस सीरीज़ के लिए सभी कथाकारों का उसे सहज सहयोग मिला है। इस सीरीज़ के महत्त्वपूर्ण कथाकार उषाकिरण खान ने प्रस्तुत संकलन में अपनी जिन दस कहानियों को प्रस्तुत किया है, वे हैं : 'मौसम का दर्द', 'दूब-धान', 'नीलकंठ', 'कौस्तुभ-स्तंभ', 'कुमुदिनी', 'जलकुंभी', 'तुअ बिनु अनुखन विकल मुरारि', 'नटयोगी', 'घर से घर तक' तथा 'हमके ओढ़ा  द चदरिया हो, चलने की बेरिया'।
हमेँ विश्वास है कि इस सीरीज़ के माध्यम से पाठक सुविख्यात लेखक उषाकिरण खान की प्रतिनिधि कहानियों को एक ही जिल्द में पाकर सुखद पाठकीय संतोष का अनुभव करेंगें ।

Usha Kiran Khan

उषाकिरण खान जन्म : लहेरिया सराय, दरभंगा, बिहार शिक्षा : एम. ए., पी-एच. डी हिंदी रचनाएं : विवश विक्रमादित्य, दूब-धान, कासवन, गीली पांक, जनम अवधि, घर से घर तक, जलधार, संकलित कहानियां (कहानी संग्रह) फागुन के बाद, सीमांत कथा, रतनारे नयन, पानी पर लकीर, सिरजनहार, अगन हिण्डोला (उपन्यास); कहा गए मेरे उगना, हीरा डोम (नाटक); डैडी बदल गए हैं, नानी की कहानी, सात भाई और चंपा, चिडिया चुग गई खेत (बाल नाटक); एक बम हजार गम (नुक्कड़ नाटक); उड़ाकू जनमेजय (बाल उपन्यास); लेख एवं रिपोर्ताज संग्रह लगभग सौ के करीब प्रकाशित, अनेक बाल कथाएं प्रकाशित एवं प्रसारित । चित्रकथा वीर कुंअर सिंह। मैथिली रचनाएं : कॉचहि बांस (कहानी-संग्रह); अनुत्तरित प्रश्न, हसीना मंजिल, भामती, दूर्वाक्षत, पोखरि रजोखरि (उपन्यास); जाइ संपहिने (काव्य); आलेख एवं रिपोर्ताज लगभग दो दर्जन; फागुन, एकसरि ठाढ़, मुसकौल बला (नाटक); नवतुरिया (लेखक नागार्जुन यात्री), मर्यादाक भंग (लेखक हरिमोहन झा) (नाट्य दरूपांतर); घंटी से बान्हल राजू, बिरड़ो आबिगेल (बाल नाटक); दूरदर्शन के क्लासिक श्रृंखला से 'हसीना मंजिल' का प्रसारण। पुरस्कार : बिहार राष्ट्रभाषा परिषद का हिंदी सेवी सम्मान, बिहार राजभाषा विभाग का महादेवी वर्मा सम्मान, दिनकर राष्टीय पुरस्कार, साहित्य अकादेमी पुरस्कार, कुसुमांजली पुरस्कार, विद्यानिवास मिश्र पुरस्कार । संप्रति : लेखन में सलंग्न।

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