Dus Pratinidhi Kahaniyan : Saadat Hasan Manto (Paperback)

Saadat Hasan Manto

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  • Year: 2013

  • Binding: Paperback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 978-93-82114-54-3

दस प्रतिनिधि कहानियाँ : सआदत हसन मंटो
'दस प्रतिनिधि कहानियाँ' सीरीज़ किताबघर प्रकाशन की एक महत्त्वाकांक्षी कथा-योजना है, जिसमें हिन्दी कथा-जगत् के सभी शीर्षस्थ कथाकारों को प्रस्तुत किया जा रहा है ।
इस सीरीज़ में सम्मिलित कहानीकारों से यह अपेक्षा की गई है कि वे अपने संपूर्ण कथा-दौर से उन दस कहानियों का चयन करें, जो पाठको, समीक्षकों तथा संपादकों के लिए मील का पत्थर रही हों तथा ये ऐसी कहानियाँ भी हों, जिनकी वजह से उन्हें स्वयं को भी कहानीकार होने का अहसास बना रहा हो। भूमिका-स्वरूप कथाकार का एक वक्तव्य भी इस सीरीज़ के लिए आमंत्रित किया गया है, जिसमें प्रस्तुत कहानियों को प्रतिनिधित्व सौंपने की बात पर चर्चा करना अपेक्षित रहा है ।
किताबघर प्रकाशन गौरवान्वित है कि इस सीरीज़ के लिए सभी कथाकारों का उसे सहज सहयोग मिला है। इस सीरीज़ के महत्त्वपूर्ण कथाकार सआदत हसन मंटो ने प्रस्तुत संकलन में अपनी जिन दस कहानियों को प्रस्तुत किया है, वे हैं : 'स्वराज्य के लिए', 'हतक' हैं 'मेरा नाम राधा हैं', 'बाबू गोपीनाथ', 'मम्मी', 'मम्मद भाई', 'जानकी', "मोजेल', 'सियाह हाशिए' तथा 'टोबा टेकसिंह'।
हमेँ विश्वास है कि इस सीरीज़ के माध्यम से पाठक सुविख्यात लेखक सआदत हसन मंटो की प्रतिनिधि कहानियों को एक ही जिल्द में पाकर सुखद पाठकीय संतोष का अनुभव करेंगें ।

Saadat Hasan Manto

सआदत हसन मंटो
जन्म: 11 मई, 1912 
जन्म स्थान: समराला, जिला लुधियाना
संतान: निगहत, नुजहत और नुसरत
शिक्षा: अमृतसर और अलीगढ़ में (मैट्रिक पास किया अमृतसर में)
आवास: अमृतसर, अलीगढ़, लाहौर, दिल्ली और बंबई
पहली कहानी: ‘आशा’
आखिरी कहानी: ‘कबूतर और कबूतरी’
जिन कहानियों पर मुकदमे चले: ‘काली सलवार’, ‘धुआं’, ‘बू’, ‘खोल दो’, ‘ठंडा गोश्त’, ‘ऊपर, नीचे और दरम्यान’
अफसानों का पहला संकलन: ‘मंटो के अफसाने’ है, जो 1938 में छपा 
रचनाएं: ‘मंटो के अफसाने’, ‘चुग़द’, ‘यज़ीद’, ‘नमरूद की खुदाई’, ‘खाली बोतलें’, ‘खाली डिब्बे’, ‘सड़क के किनारे’, ‘बादशाहत का खातिमा’, ‘बुरके’, ‘मंटो के मज़ामीन’, ‘जनाज़े’, ‘करवट’, ‘नूरजहां सरवर जान’, ‘वीरा’ (अनुवाद), ‘मंटो के ड्रामे’, ‘धुआं’, ‘लज़्ज़ते-संग’, ‘ठंडा गोश्त’, ‘स्याह हाशिए’, ‘ऊपर, नीचे और दरम्यान’, ‘फुंदने’, ‘शिकारी औरतें’, ‘आओ’ (रेडियो एकांकी), ‘तीन औरतें’, ‘इस्मत चुगताई’, ‘गोर्की के अफसाने’ (अनुवाद), ‘आतिशपारे, ‘सरकंडों के पीछे’, ‘बगैर इजाज़त’, ‘रत्ती, माशा और तोला’, ‘अनारकली’, ‘एक मर्द’, ‘परदे के पीछे’, ‘शादी’, ‘लाउडस्पीकर’, ‘ताहिरा से ताहिरा’, ‘गंजे फरिश्ते’, ‘करवट’ (नाटक)

स्मृति-शेष : 18 जनवरी, 1955

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