Dus Pratinidhi Kahaniyan : Rajendra Rao (Paperback)

Rajendra Rao

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  • Year: 2015

  • Binding: Paperback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 978-93-85054-11-2

दस प्रतिनिधि कहानियाँ : राजेन्द्र राव
'दस प्रतिनिधि कहानियाँ' सीरीज़ किताबघर प्रकाशन की एक महत्त्वाकांक्षी कथा-योजना है, जिसमें हिन्दी कथा-जगत् के सभी शीर्षस्थ कथाकारों को प्रस्तुत किया जा रहा है ।
इस सीरीज़ में सम्मिलित कहानीकारों से यह अपेक्षा की गई है कि वे अपने संपूर्ण कथा-दौर से उन दस कहानियों का चयन करें, जो पाठको, समीक्षकों तथा संपादकों के लिए मील का पत्थर रही हों तथा ये ऐसी कहानियाँ भी हों, जिनकी वजह से उन्हें स्वयं को भी कहानीकार होने का अहसास बना रहा हो। भूमिका-स्वरूप कथाकार का एक वक्तव्य भी इस सीरीज़ के लिए आमंत्रित किया गया है, जिसमें प्रस्तुत कहानियों को प्रतिनिधित्व सौंपने की बात पर चर्चा करना अपेक्षित रहा है ।
किताबघर प्रकाशन गौरवान्वित है कि इस सीरीज़ के लिए सभी कथाकारों का उसे सहज सहयोग मिला है। इस सीरीज़ के महत्त्वपूर्ण कथाकार राजेन्द्र राव ने प्रस्तुत संकलन में अपनी जिन दस कहानियों को प्रस्तुत किया है, वे हैं : 'उत्तराधिकार', 'लोकी का तेल', 'अमर नहीं यह प्यार', 'वैदिक हिंसा', 'बाकी इतिहास', 'घुसपेट','छिन्नमस्ता' 'असत्य के प्रयोग', 'शिफ्ट' तथा 'नौसिखिया'।
हमेँ विश्वास है कि इस सीरीज़ के माध्यम से पाठक सुविख्यात लेखक राजेन्द्र राव की प्रतिनिधि कहानियों को एक ही जिल्द में पाकर सुखद पाठकीय संतोष का अनुभव करेंगें ।

Rajendra Rao

राजेन्द्र राव 9 जुलाई, 1944 कोटा, राजस्थान में जन्मे राजेन्द्र राव शिक्षा और पेशे से भले ही मैकेनिकल इंजीनियर रहे हों, मगर उनका मन सदैव साहित्य और पत्रकारिता मेँ ही रमा रहा । साठ के दशक में लघु उद्योगों से कॅरियर की शुरुआत करने के बाद कुछ कंपनियों में तकनीकी व प्रबंधन के क्षेत्र में लंबा समय बिताया । इसके बाद अकस्मात् साहित्यिक पत्रकारिता में आ गए । पहली कहानी 'शिफ्ट' 1971 में 'कहानी' में प्रकाशित हुई । इनके कहानी-संग्रह 'नौसिखिया', 'कीर्तन तथा अन्य कहानियाँ', 'कोयला भई न राख', 'असत्य के प्रयोग', 'दूध के दांत' और प्रेम कथा श्रृंखला 'सूली ऊपर सेज पिया की' खूब चर्चित रहे । 'कितने शीरीं हैं तेरे लब कि' उनका नवीनतम बहुप्रशंसित कहानी-संग्रह है । उपन्यास 'ना घर तेरा ना घर मेरा' और 'खाला का घर नाहिं' को पठनीयता के लिए प्रशंसा मिली । इनके रेखाचित्र और रिपोर्ताज देश-विदेश में सराहे गए हैं । संप्रति : 'दैनिक जागरण' में साहित्य संपादक ।

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