Dus Pratinidhi Kahaniyan : Nanak Singh (Paperback)

Nanak Singh

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  • Year: 2013

  • Binding: Paperback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 978-93-83233-21-2

दस प्रतिनिधि कहानियाँ : नानक सिंह
'दस प्रतिनिधि कहानियाँ' सीरीज़ किताबघर प्रकाशन की एक महत्त्वाकांक्षी कथा-योजना है, जिसमें हिन्दी कथा-जगत् के सभी शीर्षस्थ कथाकारों को प्रस्तुत किया जा रहा है ।
इस सीरीज़ में सम्मिलित कहानीकारों से यह अपेक्षा की गई है कि वे अपने संपूर्ण कथा-दौर से उन दस कहानियों का चयन करें, जो पाठको, समीक्षकों तथा संपादकों के लिए मील का पत्थर रही हों तथा ये ऐसी कहानियाँ भी हों, जिनकी वजह से उन्हें स्वयं को भी कहानीकार होने का अहसास बना रहा हो। भूमिका-स्वरूप कथाकार का एक वक्तव्य भी इस सीरीज़ के लिए आमंत्रित किया गया है, जिसमें प्रस्तुत कहानियों को प्रतिनिधित्व सौंपने की बात पर चर्चा करना अपेक्षित रहा है ।
किताबघर प्रकाशन गौरवान्वित है कि इस सीरीज़ के लिए सभी कथाकारों का उसे सहज सहयोग मिला है। इस सीरीज़ के महत्त्वपूर्ण कथाकार नानक सिंह ने प्रस्तुत संकलन में अपनी जिन दस कहानियों को प्रस्तुत किया है, वे हैं : 'कुचले हुए पुष्प', 'लक्ष्मी-पूजा', 'अंतर्ज्ञान', ‘अछूते आम', 'चक्षुहीन संत', 'जर्जर खपरैल की एक स्लेट', 'स्नोफॉल', 'इनसान-हैवान', 'लंबा सफ़र' तथा 'जब हम में 'इनसान' प्रकट होता है' । 
हमें विश्वास है कि इस सीरीज़ के माध्यम से पाठक सुविख्यात लेखक नानक सिंह की प्रतिनिधि कहानियों को एक ही जिल्द में पाकर सुखद पाठकीय संतोष का अनुभव करेंगें ।

Nanak Singh

नानक सिंह
जन्म : 4 जुलाई, 1897

लगभग साठ-सत्तर पुस्तकें लिखीं, जिनमें पचास के लगभग उपन्यास थे । उनकी पुस्तकों की सूची (पजांबी में) इस प्रकार है : 'गगन दमामा बाजिया', 'सरापियां रूहां', 'कोई हरिया बूट रहियो री', 'एक मियान दो तलवारां' (पुरस्कृत), 'छलावा', 'पुजारी', 'बंजर', 'संगम', 'आस्तक-नास्तक', 'नासूर', 'आदमखोर', 'मंझधार', 'धुंदेले परछावें', 'गरीब दी दुनिया', 'प्यार दी दुनिया', 'मेरी दुनिया', 'चित्रकार', 'सुमन-कांता', 'कटी हुई पतंग', 'आग दी खेड', 'टूटी वीणा', 'गंगाजली विच शराब', 'खून दे सोहिले', 'पवित्र पापी', ‘चिट्टा लहू', 'फौलादी फुल्ल', 'लव-मैरिज', 'जीवन-संग्राम', 'दूर किनारा', 'अध-खिडिया फुल्ल', 'पत्थर-कांबा', 'कागतां दी बेडी', 'प्राश्चित', 'काल-चक्कर', 'मत्रेई मां', 'पाप की खट्टी', 'सूलां दी सेज', 'पतझड़ के पंछी', 'सधरां दे हार', 'हंडुओं दे हार', 'सपनियां दी कब्र', 'वर नहीं, सराप', 'अणसीते जख्म', 'पत्थर दे खंभ', 'मिट्ठू मोहरा', 'प्रेम-संगीत', 'फ्रांस का डाकू', 'रजनी', 'सुनहरी जिल्द', 'ठंडियां छांवां', ‘मिधे हुए फुल्ल', 'तसवीर के दोवें पासे',  'बी.ए. पास', 'मेरी कहानियाँ', 'मेरे नाटक', 'ताश दी आदत', 'लंबा पैंडा', 'रब्ब अपने असली रूप विच', 'विशवासघात', 'नानक सिंह की श्रेष्ट कहानियाँ', 'दस प्रतिनिधि कहानियां'
'एक मियान दो  तलवारां' पर साहित्य अकादेमी अवार्ड।

स्मृति-शेष : 28 दिसंबर, 1971

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