Dus Pratinidhi Kahaniyan : Manohar Shyam Joshi (Paperback)

Manohar Shyam Joshi

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  • Year: 2015

  • Binding: Paperback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 978-93-83233-64-9

दस प्रतिनिधि कहानियाँ : मनोहर श्याम जोशी
"दस प्रतिनिधि कहानियाँ" सीरीज़ किताबघर प्रकाशन की एक महत्त्वाकांक्षी कथा-योजना है, जिसमें हिन्दी कथा-जगत् के सभी शीर्षस्थ कथाकारों को प्रस्तुत किया जा रहा है ।
आधुनिक हिंदी कथा-साहित्य के सर्वाधिक चर्चित लेखक मनोहर श्याम जोशी की प्रतिनिधि कहानियों का यह संकलन उनके जीवनकाल में न आ सका, इस बात का हमें गहरा अफसोस है । अपनी प्रतिनिधि कहानियों की भूमिका  में  यह स्वयं क्या स्थापित-विस्थापित करते, यह अनुमान तक कर पाना असंभव है । मगर उन्होंने अपने कथा-साहित्य में सचमुच क्या कर दिखाया है-इसकी रंग-बिरंगी झलक दिखाई देगी पुस्तक में लिखी मर्मज्ञ आलोचक-आचार्य डॉ० कृष्णदत्त पालीवाल की भूमिका से ।
किताबघर प्रकाशन गौरवान्वित है कि इस सीरीज़ के लिए सभी कथाकारों का उसे सहज सहयोग मिला है। इस सीरीज़ के महत्त्वपूर्ण कथाकार  मनोहर श्याम जोशी ने प्रस्तुत संकलन में अपनी जिन दस कहानियों को प्रस्तुत किया है, वे हैं : 'सिल्वर वेडिंग', 'एक दुर्लभ व्यक्तित्व', 'शक्करपारे', 'जिंदगी के चौराहे पर', 'उसका बिस्तर', 'मैडिरा मैरून', 'धरती, बीज और फल', 'गुडिया', 'धुआँ' तथा 'कैसे हो माटसाब आप?'
हमेँ विश्वास है कि इस सीरीज़ के माध्यम से पाठक सुविख्यात लेखक  मनोहर श्याम जोशी की प्रतिनिधि कहानियों को एक ही जिल्द में पाकर सुखद पाठकीय संतोष का अनुभव करेंगें ।

Manohar Shyam Joshi

मनोहर श्याम जोशी 9 अगस्त, सन् 1953 को अजमेर से जन्मे, लखनऊ विश्वविद्यालय के विज्ञान स्नातक मनोहर श्याम जोशी 'कल के वैज्ञानिक' की उपाधि पाने के बावजूद रोजी-रोटी की खातिर छात्र जीवन से ही लेखक और पत्रकार बन गए । अमृतलाल नागर और अज्ञेय इन दो आचार्यों का आशीर्वाद उन्हें प्राप्त हुआ । स्कूल मास्टरी, क्लर्की और बेरोजगारी के अनुभव बटोरने के बाद अपने 21वें वर्ष से वह पूरी तरह मसिजीवी बन गए । प्रेस, रेडियो. टी. वी., वृत्तचित्र, फिल्म, विज्ञापन-संप्रषण का ऐसा कोई माध्यम नहीं, जिसके लिए उन्होंने सफलतापूर्वक लेखन-कार्य न किया हो । खेल-कूद से लेकर दर्शनशास्त्र तक ऐसा कोई विषय नहीं, जिस पर उन्होंने कलम न उठाई हो । आलसीपन और आत्मसंशय उन्हें रचनाएँ पूरी कर डालने और छपवाने से हमेशा रोकते रहे । पहली कहानी तब छपी जब यह अठारह वर्ष के थे, लेकिन पहली बडी साहित्यिक कृति तब प्रकाशित करवाई जब सैंतालीस वर्ष के होने आए । केंद्र सूचना सेवा और टाइम्स ऑफ़ इंडिया समूह से होते हुए जोशी जी सन् 1967 में हिंदुस्तान टाइम्स में साप्ताहिक हिंदुस्तान के संपादक बने और वहीं एक अंग्रेजी साप्ताहिक का भी संपादन किया । टेलीविजन धारावाहिक 'हम लोग' लिखने के लिए सन 1984 में संपादक की कुर्सी छोड दी और तब से अंत तक स्वतंत्र लेखन करते रहे ।
स्मृति शेष : 30 मार्च 2006

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