Dus Pratinidhi Kahaniyan : Maheep Singh (Paperback)

Mahip Singh

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  • Year: 2013

  • Binding: Paperback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 978-81-7016-565-1

दस प्रतिनिधि कहानियाँ : महीप सिंह
'दस प्रतिनिधि कहानियाँ' सीरीज़ 'किताबघर' की एक महत्त्वाकांक्षी कथा-योजना है, जिसमें हिन्दी कथा-जगत् के सभी शीर्षस्थ कथाकारों को प्रस्तुत किया जा रहा है ।
इस सीरीज़ में सम्मिलित कहानीकारों से यह अपेक्षा की गई है कि वे अपने संपूर्ण कथा-दौर से उन दस कहानियों का चयन करें जो पाठको, समीक्षकों तथा संपादकों के लिए मील का पत्थर रही हों तथा ये ऐसी कहानियाँ भी हों जिनकी वजह से उन्हें स्वयं को भी कहानीकार होने का अहसास बना रहा हो। भूमिका-स्वरूप कथाकार का एक वक्तव्य भी इस सीरीज़ के लिए आमंत्रित किया गया है, जिसमें प्रस्तुत कहानियों को प्रतिनिधित्व सौंपने की बात पर चर्चा करना अपेक्षित रहा है ।
'किताबघर' गौरवान्वित है कि इस सीरीज़ के लिए अग्रज कथाकारों का उसे सहज सहयोग मिला है। इस सीरीज़ के अत्यन्त महत्त्वपूर्ण कथाकार महीप सिंह ने प्रस्तुत संकलन में अपनी जिन दस कहानियों को प्रस्तुत किया है, वे हैं : 'उलझन', 'पानी और पुल', 'कील', ‘सीधी रेखाओं का वृत्त', 'शोर', 'सन्नाटा', 'सहमे हुए', 'धूप के अंगुलियों के निशान', 'दिल्ली कहाँ है?' तथा 'शोक'। 
हमेँ विश्वास है कि इस सीरीज़ के माध्यम से पाठक सुविख्यात कथाकार महीप सिंह की प्रतिनिधि कहानियों को एक ही जिल्द में पाकर सुखद पाठकीय संतोष का अनुभव करेंगें ।

Mahip Singh

महीप सिंह जन्म : 15 अगस्त, 1950 जन्म-स्थान : जिला उन्नाव (उत्तर प्रदेश) शिक्षा : एम०ए० (हिंदी), डी०ए०वी० कॉलेज, कानपुर (1951), पी-एच०डी०, आगरा विश्वविद्यालय, आगरा (1963) व्यवसाय प्राध्यापक-खालसा कॉलेज, मुंबई (1955-63), श्री गुरु तेग बहादुर खालसा कॉलेज, दिल्ली (1963-93), विदेश अध्ययन की कन्साई यूनिवर्सिटी, हीराकाता जापान में एक वर्ष तक अतिथि प्राध्यापक (1975-76) रचनाएँ कहानी-संग्रह : 'सुबह के फूल', 'उजाले के उल्लू', 'घिराव', 'कुछ और कितना', 'कितने संबंध', 'धूप की अंगुलियों के निशान', 'सहमे हुए', 'इक्यावन कहानियाँ', 'चर्चित कहानियाँ' तथा तीन खंडों में 'समग्र कहानियाँ' । उपन्यास : 'यह भी नहीं' (हिंदी के अतिरिक्त अंग्रेजी, पंजाबी, मलयालम में भी प्रकाशित) संपादन : 25 पुस्तकों का संपादन पुरस्कार : उ०प्र० हिंदी संस्थान पुरस्कार, भाषा विभाग (पंजाब), शिरोमणि साहित्यकार पुरस्कार, केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय पुरस्कार, हिंदी अकादमी (दिल्ली) पुरस्कार, छठे हिंदी सम्मेलन (सितंबर, 1999 लंदन) में साहित्यिक सेवाओं के लिए विशिष्ट सामान स्मृति-शेष : 24 नवम्बर, 2015

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