Dus Pratinidhi Kahaniyan : Chitra Mudgal (Paperback)

Chitra Mudgal

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  • Year: 2013

  • Binding: Paperback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 978-81-7016-690-0

दस प्रतिनिधि कहानियाँ  : चित्रा मुद्गल
'दस प्रतिनिधि कहानियाँ' सीरीज़ किताबघर प्रकाशन की एक महत्त्वाकांक्षी कथा-योजना है, जिसमें हिन्दी कथा-जगत् के सभी शीर्षस्थ कथाकारों को प्रस्तुत किया जा रहा है ।
इस सीरीज़ में सम्मिलित कहानीकारों से यह अपेक्षा की गई है कि वे अपने संपूर्ण कथा-दौर से उन दस कहानियों का चयन करें, जो पाठको, समीक्षकों तथा संपादकों के लिए मील का पत्थर रही हों तथा ये ऐसी कहानियाँ भी हों, जिनकी वजह से उन्हें स्वयं को भी कहानीकार होने का अहसास बना रहा हो। भूमिका-स्वरूप कथाकार का एक वक्तव्य भी इस सीरीज़ के लिए आमंत्रित किया गया है, जिसमें प्रस्तुत कहानियों को प्रतिनिधित्व सौंपने की बात पर चर्चा करना अपेक्षित रहा है ।
किताबघर प्रकाशन गौरवान्वित है कि इस सीरीज़ के लिए सभी कथाकारों का उसे सहज सहयोग मिला है। इस सीरीज़ के महत्त्वपूर्ण कथाकार चित्रा मुद्गल ने प्रस्तुत संकलन में अपनी जिन दस कहानियों को प्रस्तुत किया है, वे हैं : 'गेंद', 'लेन', 'जिनावर', 'जगदंबा बाबू गांव आ रहे हैं', 'भूख', 'प्रेतयोनि', 'बलि', 'दशरथ का वनवास', 'केंचुल' तथा 'बाघ'  ।
हमें विश्वास है कि इस सीरीज़ के माध्यम से पाठक सुविख्यात लेखक चित्रा मुद्गल की प्रतिनिधि कहानियों को एक ही जिल्द में पाकर सुखद पाठकीय संतोष का अनुभव करेंगें ।

Chitra Mudgal

चित्रा मुद्गल 
व्यास सम्मान से सम्मानित 10 दिसंबर, 1944 को चेन्नई में जन्मी और मुंबई में शिक्षित चित्रा मुद्गल आधुनिक कथा-साहित्य की बहुचर्चित, सम्मानित और प्रतिनिधि रचनाकार हैं । प्रखर चेतना की संवाहिका चित्रा जी के पास अनुभवों का विपुल भंडार है । उन्होंने समाज के विभिन्न समुदायों, विशेषकर दलित-शोषितों के बीच पैठकर काम किया है । आंदोलनमुखी संगठनों से इनका गहरा नाता है । इनकी मान्यता है कि सामाजिक परिवर्तनों की दिशा से आंदोलनों की निर्णायक भूमिका है ।
दूरदर्शन के लिए टेलीफिल्म 'वारिस' का निर्माण तो चित्रा जी ने किया ही है, प्रसिद्ध कहानियों पर आधारित 'एक कहानी', 'मँझधार', 'रिश्ते' सरीखे धारावाहिकों में इनकी अनेक कहानियाँ सम्मिलित हुई है। चित्रा  जी की अनेक कहानियों पर टेतीफिल्मों का निर्माण भी हुआ है ।
समकालीन यथार्थ को यह जिस अद्धभुत भाषिक संवेदना के साथ अपनी कथा-रचनाओं में परत-दर-परत अनेक अर्थछवियों में अन्वेषित करती है, यह चकित कर देने वाला है। अब तक चित्रा मुद्गल के चौदह कहानी-संग्रह, तीन उपन्यास, तीन बाल-उपन्यास, चार बालकथा-संग्रह, पाँच संपादित पुस्तकें और दो वैचारिक संकलन प्रकाशित हो चुके हैं ।
इन्हें बहुचर्चित उपन्यास 'आवाँ' पर सहस्त्राब्दि का पहला अंतर्राष्टीय 'इंदु शर्मा कथा सम्मान' लंदन (इंग्लैड) में पाने का गौरव प्राप्त हुआ । चित्रा जी को बिड़ला फाउंडेशन का 'व्यास सम्मान', हिंदी अकादमी, दिल्ली का 'साहित्यकार सम्मान', विकास काया फाउंडेशन द्वारा सामाजिक कार्यों के लिए 'विदुला सम्मान' और उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान द्वारा 'साहित्य भूषण सम्मान' से समलंकृत किया गया है।

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