Dus Pratinidhi Kahaniyan : Asghar Wajahat (Paperback)

Asghar Wajahat

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  • Year: 2017

  • Binding: Paperback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 978-93-81467-81-7

दस प्रतिनिधि कहानियां
असग़र वजाहत

‘दस प्रतिनिधि कहानियां’ सीरीज़ किताबघर प्रकाशन की एक महत्त्वाकांक्षी कथा-योजना है, जिसमें हिंदी कथा-जगत् के सभी शीर्षस्थ कथाकारों को प्रस्तुत किया जा रहा है।

इस सीरीज़ में सम्मिलित कहानीकारों की चयनित कहानियों से यह अपेक्षा की गई है कि वे पाठकों, समीक्षकों तथा संपादकों के लिए मील का पत्थर रही हों तथा ये ऐसी कहानियां भी हों, जिनकी वजह से  स्वयं लेखक को भी कथाकार होने का अहसास बना रहा हो। भूमिकास्वरूप लेखक या संपादक का एक वक्तव्य भी इस सीरीज़ के लिए आमंत्रित किया गया है जिसमें प्रस्तुत कहानियों को प्रतिनिधित्व सौंपने की बात पर चर्चा करना अपेक्षित रहा है।
किताबघर प्रकाशन गौरवान्वित है कि इस सीरीज़ के 
लिए अग्रज कथाकारों का उसे सहज सहयोग मिला है। इस सीरीज़ के अत्यंत महत्त्वपूर्ण कथाकार असग़र वजाहत की जिन दस कहानियों को प्रस्तुत किया है, वे हैं: ‘केक’, ‘दिल्ली पहुंचना है’, ‘अपनी-अपनी पत्नियों का सांस्कृतिक विकास’, ‘होज वाज पापा’, ‘तेरह सौ साल का बेबी कैमिल’, ‘शाह आलम कैंप की रूहें’, ‘शीशों का मसीहा कोई नहीं’, ‘जख्म’, ‘मुखमंत्राी और डेमोक्रेसिया’ तथा ‘सत्यमेव जयते’।
हमें विश्वास है कि इस सीरीज़ के माध्यम से पाठक सुविख्यात कथाकार असग़र वजाहत की प्रतिनिधि कहानियों को एक ही जिल्द में पाकर सुखद संतोष का अनुभव करेंगे।

Asghar Wajahat

असग़र वजाहत
असग़र वजाहत के अब तक पाँच उपन्यास, छह नाटक, पाँच कथा-संग्रह, एक नुक्कड़ नाटक-संग्रह और एक आलोचनात्मक पुस्तक प्रकाशित हो चुके हैं। वर्ष 2007 में ‘आउटलुक’ हिंदी साप्ताहिक पत्रिका ने उन्हें दस सर्वश्रेष्ठ लेखकों में शुमार किया था। उनकी कृतियों का अनुवाद अनेक भारतीय और विदेशी भाषाओं में हो चुका है। अंग्रेज़ी भाषा में अनूदित उनका कहानी-संग्रह ‘लाइज़: हाफ टोल्ड’ प्रकाशित हो चुका है। अंग्रेज़ी के अतिरिक्त उनकी रचनाओं के अनुवाद इतालवी, जर्मन, रूसी और हंगेरियन भाषाओं में हो चुके हैं।
वर्ष 2007 में बीबीसी हिंदी डॉट कॉम में वे अतिथि संपादक भी रहे। प्रसिद्ध हिंदी पत्रिकाओं ‘हंस’ (भारतीय मुसलमानः वर्तमान और भविष्य-विशेषांक) और ‘वर्तमान साहित्य’ (प्रवासी साहित्य-विशेषांक) का अतिथि संपादन किया।
वे पिछले तीस वर्षों से हिंदी फिल्मों के लिए पटकथाएँ भी लिख रहे हैं। उन्होंने मुजफ्फर अली की चर्चित फिल्म ‘आगमन’ की पटकथा लिखी थी। आजकल वे प्रख्यात फिल्म निर्देशक राजकुमार संतोषी के लिए भी एक पटकथा पर काम कर रहे हैं, जो उनके नाटक ‘जिस लाहौर नहीं देख्या...’ पर आधरित है।
इसके अलावा उन्होंने कुछ वृत्तचित्रों का भी निर्माण किया है, जिसमें 1984 में उर्दू ग़ज़लों के विकास पर बनाई गई डॉक्यूमेंट्री भी शामिल है।
असग़र वजाहत को हाउस ऑफ लॉडर्स में उनके उपन्यास ‘कैसी आगी लगाई’ के लिए कथा यू० के० सम्मान से भी नवाज़ा जा चुका है।

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