Chhota-Sa Break (Paperback)

Vishnu Nagar

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  • Year: 2010

  • Binding: Paperback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 978-93-80146-65-2

छोटा-सा ब्रेक
विष्णु नागर अपनी कविताओं के लिए जितने जाने जाते हैं, अपने व्यंग्यों के लिए भी कम नहीं जाने जाते। ‘छोटा-सा ब्रेक’ में समसामयिक घटनाओं पर छोटे-छोटे व्यंग्य संकलित हैं, जो उन्होंने (दैनिक) ‘नई दुनिया’ में प्रतिदिन ‘गरमागरम’ स्तंभ के अंतर्गत लिखे थे और जिन्हें पाठकों द्वारा बहुत पसंद किया गया था। अधिकतर पाठक तो अखबार खोलकर पहले ‘गरमागरम’ स्तंभ ही पढ़ते थे। जैसा कि आप देखेंगे, ये व्यंग्य-आलेख भले ही समसामयिक घटनाओं- चरित्रों पर हों, मगर इनमें समय की सीमा में रहकर भी उस सीमा के पार जाया गया है। एक सच्चा रचनाकार यही करता है, इसलिए ये व्यंग्य हमारा खयाल है कि कभी पुराने नहीं पड़ेंगे। इसके अलावा ये व्यंग्य उस समय-विशेष का राजनीतिक-सामाजिक-सांस्कृतिक दस्तावेज भी हैं, एक ऐसा दस्तावेज, जो सत्ताधीशों की तरफ से नहीं, बल्कि साधारण जनता की तरफ से लिखा गया है, जिसमें उसके तमाम दुःख-तकलीफ दर्ज हैं, उसका व्यंग्य-विनोद भाव अंकित है। ये व्यंग्य परसाई और शरद जोशी दोनों की परंपरा में हैं। उस परंपरा में हैं और अपनी एक अलग परंपरा भी ये बनाते हैं। इनमें शैलियों का अद्भुत वैविध्य है, भाषा की अनोखी सहजता और प्रवाह है। इन्हें पढ़कर नहीं लगता कि व्यंग्य करने के नाम पर शाब्दिक खिलवाड़ की गई है। ये असली चिंता से उपजे व्यंग्य-आलेख हैं। इन्हें पढ़कर समाज को देखने-परखने की एक नई—ऊर्जस्वित दृष्टि भी मिलती है, मात्रा हलका-फुलका मनोरंजन नहीं होता, जैसा कि सामान्यतः व्यंग्य आजकल करते पाए जाते हैं। कैसे गंभीर से गंभीर बात को, जटिल से जटिल विषय को, सहजता-सरलता और व्यंग्यात्मकता से उठाया जाए, इस बात का उदाहरण बनते हैं ये व्यंग्य। इन्हें पढ़कर लगेगा कि व्यंग्य की मौजूदा स्थिति से निराश होने की नहीं, फिर से उत्साहित होने की जरूरत है।

Vishnu Nagar

विष्णु नागर
जन्म: 14 जून, 1950
पत्राकारिता: एच.टी. मीडिया प्रकाशन की हिंदी मासिक पत्रिका ‘कादम्बिनी’ के कार्यकारी संपादक। इससे पहले ‘हिंदुस्तान’ के विशेष संवाददाता रहे। ‘नवभारत टाइम्स’ में विशेष संवाददाता सहित विभिन्न पदों पर रहे। द वॉइस आफ जर्मनी, कोलोन (जर्मनी) में दो वर्ष तक हिंदी सेवा के संपादक रहे। 
पुस्तकें: ‘मैं फिर कहता हूँ चिड़िया’, ‘तालाब में डूबी छह लड़कियाँ’, ‘संसार बदल जाएगा’, ‘बच्चे, पिता और माँ’, ‘कुछ चीजें कभी खोई नहीं’ तथा ‘हँसने की तरह रोना’ (काव्य-संग्रह); ‘आज का दिन’, ‘आदमी की मुश्किल’, ‘कुछ दूर’, ‘आख्यान’, ‘ईश्वर की कहानियाँ’ (कथा-संग्रह); ‘आज और अभी’, ‘हमें देखती आँखें’, ‘यथार्थ की माया’ (लेख: निबंध); ‘कविता के साथ- साथ’ (साहित्यिक लेख, समीक्षा, डायरी); घोड़ा और घास’, ‘राष्ट्रीय नाक’, ‘जीव-जंतु और पुराण’, ‘नई जनता आ चुकी है’, ‘देश सेवा का धंधा’ (व्यंग्य-संग्रह); ‘स्वर्ग में आदमी’ (उपन्यास)।
संपादन: साहित्य लेखन की पाँच पुस्तकों का संपादन। नवसाक्षरों के लिए कई पुस्तिकाओं का संपादन एवं लेखन।
सम्मान: कहानी के लिए कथा सम्मान, समग्र लेखन के लिए शिखर सम्मान (मध्य प्रदेश सरकार) तथा हिंदी अकादमी, दिल्ली का साहित्य सम्मान, कविता के लिए शमशेर सम्मान तथा आउटलुक (हिंदी) द्वारा व्यापक सर्वेक्षण के आधार पर हिंदी के दस लोकप्रिय लेखकों की सूची में शामिल।

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