Aur Aagey Badhatey Raho (Paperback)

Dr. Rashmi

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  • Year: 2015

  • Binding: Paperback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 978-93-83233-81-6

जीवन व साहित्य में सदुपदेश, सत्संग और सुभाषित का विशेष महत्त्व है। इनमें अनुभवों का ऐसा खजाना होता है जो किसी को भी समृद्ध कर सकता है। यही कारण है कि साहित्य में प्रारंभ से ही नीति-कथाओं का प्रचलन है। ये कथाएं प्रेरणा देती हैं, संघर्ष करना सिखाती हैं, असमंजस में उलझे मन को उचित निर्णय लेने की शक्ति देती हैं और समग्रतः जीना सिखाती हैं। ‘...और आगेबढ़ते रहो’ प्रेरक प्रसंगों की एक ऐसी ही रोचक पुस्तक है। लेखिका डॉ. रश्मि ने बड़ी कुशलता से उपयोगी जीवन सूत्रों को प्रस्तुत करते हुए उनमें निहित संदेश भी रेखांकित कर दिया है।
इन प्रेरक प्रसंगों में मूलतः नैतिक शिक्षा छिपी है। वह नैतिकता जिसके बिना सार्थक, संतुलित और स्वस्थ मानव जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती। ऐसी प्रेरक कथाएं वर्षों से समाज में सत्य, प्रेम, अहिंसा, त्याग और सहनशीलता के बीज बोती रही हैं। पहले घर-परिवार में बड़े बुजुर्ग, जैसे--दादी-दादा, नानी-नाना ऐसी बहुत सारी कहानियां सुनाते थे। बहाने-बहाने से बच्चे उनसे बहुत कुछ ऐसी बातें सीखते थे जो जीवनपर्यंत याद रहती थीं। आज समय बदल गया है। क्या बड़े, क्या बच्चे--सब अपनी-अपनी जगह व्यस्त हैं। प्रेरक प्रसंगों से भरी कहानियां सुनाने का जिम्मा पुस्तकों ने ले लिया है। इस बात का अनुभव पाठक यह पुस्तक पढ़ते हुए करेंगे। सीधी सुगम भाषा और प्रवाहपूर्ण शैली में लिखी ये रचनाएं पाठकों को प्रभावित व प्रेरित करेंगी--ऐसा हमारा विश्वास है।

Dr. Rashmi

डॉ. रश्मि
जन्म: 18 जनवरी, 1974, कानपुर (उत्तर प्रदेश)
शिक्षा: पी-एच. डी. (कबीर काव्य का भाषाशास्त्रीय अध्ययन)
दो अन्य पुस्तकें प्रकाशनाधीन--‘स्वामी रामकृष्ण परमहंस के प्रेरक प्रसंग’ एवं ‘अशोक चक्र विजेता’ 
विभिन्न समाचार-पत्रों, पत्रिकाओं में लेख, कविताएं, कहानियां प्रकाशित
‘नवभारत टाइम्स’ और ‘आज समाज’ में नियमित कॉलम-लेखन
दूरदर्शन, अन्य चैनलों एवं आकाशवाणी में प्रस्तुति
दिल्ली एवं देश के अन्य शहरों में मंच पर काव्य-प्रस्तुति
संप्रति: लेखन व अध्यापन

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