Filter selection

Author
Price

science fiction

  • grid
  • Sampoorn Baal Vigyan Kathayen
    Hari Krishna Devsare
    492 443

    Item Code: #KGP-824

    Availability: In stock

    जो बच्चे परीकथाएँ, भूत-प्रेतों की कहानियाँ आदि पढ़ते हैं, उनमें वैज्ञानिक दृष्टिकोण जागृत होने में बाधा पड़ सकती है, क्योंकि वे अंधविश्वासी अधिक बन सकते हैं। और हमारे देश में अंधविश्वास ने अपनी जड़ें कितनी गहरी जमा रखी हैं कि यह वे लोग अच्छी तरह जानते हैं, जो विज्ञान-प्रसारक हैं। इसलिए मैं ऐसे बच्चों को सलाह दूँगा कि वे विज्ञान कथाएँ अवश्य पढ़ें, क्योंकि जब हम विज्ञान की नजर से कुछ पढ़ते हैं तो समझ में आ जाता है कि संभव क्या है, असंभव क्या है। विज्ञान कथाएँ उन्हें नई दृष्टि, नई सोच और भविष्य की सार्थक कल्पना देती हैं।"
    बच्चों के लिए डॉ. हरिकृष्ण देवसरे विगत पचास वर्षों से विज्ञान लेखन कर रहे हैं। विज्ञान कथा लेखन में डॉ. देवसरे का प्रशस्य योगदान रहा है। आपके कई बाल विज्ञान उपन्यास ‘होटल का रहस्य’, ‘ला-वेनी’ आदि बहुत लोकप्रिय हुए। यहाँ उनकी संपूर्ण बाल विज्ञान कथाएँ प्रस्तुत हैं।  आशा है, यह प्रस्तुति सभी वर्ग के पाठकों के लिए रुचिकर और पठनीय सिद्ध होगी।
  • Aadhi Raat Ka Surya : Vaigyanik Kathayen
    Dr. Rajiv Ranjan Upadhyaya
    300 270

    Item Code: #KGP-320

    Availability: In stock

    नॉर्वे में मध्य जून से सितंबर मास तक दिन-रात चमकने वाला सूर्य, चंद्रमा की-सी शीतलता रखता है। इसी ग्रीष्म ऋतु में ‘आधी रात का सूर्य’ की घटना घटित होती है। वास्तव में अपराधियों को पकड़ने की डी.एन.ए. ‘फिंगर प्रिंटिंग’ तकनीक के उपयोग के पूर्व इसका संकेत इस कथा में प्रथम बार हुआ है। 
    प्रकृति के रहस्यों को स्पष्ट करने तथा समझने की चेष्टा का फल आधुनिक विज्ञान है, जिसने तर्क और प्रयोगों के सोपानों पर आरूढ़ होकर, मात्र दो सौ वर्षों के अंतराल में, मानव के जीवन को सुखमय बनाने तथा उसे विविध संसाधन उपलब्ध कराने में आशातीत सफलता प्राप्त की है। तथ्यतः मानव के इतिहास में जितनी प्राप्ति विज्ञान ने इन वर्षों में की है, वह एक प्रकार से अभूतपूर्व कही जाएगी।
    मैं मिस्र (इजिप्ट) के नागरिक, रसायनज्ञ मित्र के निमंत्रण पर काहिरा गया था। उन्हीं के साथ विश्वविख्यात गीजा के पिरामिड को भी देखा था। क्लोनिंग को आधार बनाकर, इस ‘पिरामिड’ की पृष्ठभूमि में लिखी गई इसी नायक की कथा इस संग्रह का अंश है। 
    आतंकवाद से जूझ रहे देशों में ‘जैविक आतंकवाद’ की कल्पना सिहरन पैदा कर देती है। इसी पक्ष को बिंबित करती--एंटीरैवियोला वैक्सिन के द्वारा मानवता को त्रण देने का प्रयास करती कथा है--‘जिससे मानवता बची रहे।’
    वह दिन दूर नहीं है, जब मानव अंतरिक्ष के होटलों में जाकर आराम करेगा। पुनः धरती पर अपना कार्य करने, कुछ डॉलर खर्च कर आ जाया करेगा। निकट भविष्य में अंतरिक्ष टूरिज्म प्रारंभ हो जाएगा। आने वाले वर्षों में कंप्यूटर और बुद्धिमान बन जाएगा तथा रोबो संवेदनशील होकर मानव के अधिकांश कार्यों का संपादन करने लगेंगे। 
    आज हम अपने बदलते पर्यावरण की समस्या से परिचित हैं और ‘ग्रीन हाउस’ गैसों और उनसे संबंधित प्रभावों को नियंत्रित करने के प्रयास में लगे हैं। यह समस्या मूलभूत रूप से आधुनिक वैज्ञानिक प्रगति के असंतुलित पक्ष की ओर संकेत करती है। पर्यावरण को संरक्षित करने की तकनीकों की खोज में वैज्ञानिक लगे हुए हैं।
    हम अनेक ग्रहों, उपग्रहों, शनि और मंगल के रहस्यों को भी समझने के प्रयास में रत हैं। इतना ही नहीं, विज्ञान और वैज्ञानिक ब्रह्मांड की संरचना एवं उसके उत्पत्ति के सूत्रों को खोजने में, हिग्स बोसानों की उपस्थिति ज्ञात कर चुके हैं।
    इसी प्रकार विज्ञान द्वारा प्रदत्त संसाधनों का उपयोग कर, विकसित राष्ट्रों ने ऊर्जा का असंतुलित रूप में दोहन किया है, जिसके परिणामस्वरूप ऊर्जा के नवीन स्रोतों, जो पारंपरिक माध्यमों से इतर हों, को विकसित करने का प्रयास चल रहा है। 
    प्रथम बार हिंदी भाषा की ललित शैली में लिखी गईं ‘दूसरा नहुष’, ‘आधुनिक ययाति’, ‘अंतरिक्ष दस्यु’ एवं ‘जिससे मानवता बची रहे’ नामक विज्ञान कथाओं के साथ गुंपिफत हैं दो लघु विज्ञान कथाएं, जो इस विधा की प्रतिनिधि हैं। त्वरित गति से विकसित हो रही प्रौद्योगिकी के प्रभावों, परिणामों, तज्जनित परिवर्तनों आदि की झलक आपको इन कथाओं में दृष्टिगोचर तो होगी ही, साथ ही साथ आशा है, यह संग्रह आपका स्वस्थ मनोरंजन करने में भी सफल होगा। 
  • Us Sadi Ki Baat
    Kalpna Kulshreshth
    80

    Item Code: #KGP-1945

    Availability: In stock

    उस सदी की बात
    विज्ञान-कथाएँ जादूगर का वह जादुई दर्पण है, जिसके माध्यम से मनुष्य भविष्य में झाँकता है । निस्संदेह यहाँ जादूगर है विज्ञान, जो अपने करतबों से मनुष्य को चमत्कृत कर देता है ।
    कैसी होगी कल के मनुष्य की दुनिया? क्या आज की हवाई यात्राओं की तरह कल वह टिकट खरीदकर आकाशगंगाओं की सैर पर जाया करेगा या फिर समय यान द्वारा अपने छूटे हुए बचपन से जाकर धमाल मचाएगा? संभव है कि आज सौ वर्ष की आयु भी न जीने वाला मनुष्य कल हजारों वर्षों की अणु तक जीवित रहे और वृद्धावस्था एवं व्याधियों का कोई निशान, भी न रहे । मस्तिष्क में जाने वाली विचार तरंगों को पकड़कर अपराध करने से पहले ही शायद अपराधी पकड़ लिए जाएँ । क्लोनिंग के कारण कहीँ सामाजिक ताना-बाना छिन्न-भिन्न तो नहीं हो जाएगा? शायद कल के समाज में मनुष्य को रिश्तों की नई परिभाषाएँ बनाती पडें ।
    उत्सुकता, नाटकीयता और संवेदना के साथ ऐसे ही अनेक प्रश्नों के उत्तर खोजती ये विज्ञान-कथाएँ हमें  अपने प्रवाह में खींचकर भविष्य के समाज के द्वार पर खडा कर देती हैं ।
Scroll