Filter selection

Author
Price

science

  • grid
  • Science Ki Karamaat
    Maitreyi Pushpa
    100 90

    Item Code: #KGP-9204

    Availability: In stock

    यह युग विज्ञान का युग है अर्थात् साइंस की करामात का युग। विज्ञान की नवीनतम उपलब्धियों से सारा संसार चकित है और साथ ही चिंतित भी; क्योंकि आज का विज्ञान कल्याणकारी भी है और विनाशकारी भी। विश्व-भर में वैज्ञानिक अनुसंधानों-आविष्कारों की होड़ लगी हुई है। विज्ञान की इस प्रतिस्पद्र्धा ने मानव-कल्याण के बहुत-से आयाम प्रस्तुत किए हैं, लेकिन साथ ही संपूर्ण मानव जाति को विनाश के कगार पर भी ला खड़ा किया है। विनाशकारी अणु बमों, उद्जन बमों, प्रक्षेपास्त्रों, ध्वंसक राॅकेटों तथा समुद्री पनडुब्बियों का निर्माण वैज्ञानिकों की खोज का ही परिणाम है।
    इस पुस्तक में इन सभी की प्रारंभ से लेकर अब तक की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की गई है तथा विज्ञान-क्षेत्र में भारतीय वैज्ञानिकों के योगदान और उपलब्धियों पर सरल एवं रोचक शैली में प्रकाश डाला गया है। अंतरिक्ष के बारे में जिज्ञासु पाठकों के लिए यह पुस्तक निःसंदेह उपयोगी सिद्ध होगी।
  • Baal Vigyan Kathayen : Science In Twentieth Century : An Encyclopedia-4
    Shuk Deo Prasad
    600 540

    Item Code: #KGP-608

    Availability: In stock

    विज्ञान कथाओं के अधिष्ठाता वर्न जब अवसान की ओर अग्रसर थे, तभी विज्ञान कथाकाश में एक ब्रितानी नक्षत्र एच. जी. वेल्स उभरा, जिसने इस विधा को त्वरा तो दी ही, वर्न की परंपरा का नैरंतर्य भी भंग न होने दिया । वस्तुतः आधुनिक काल में वर्न  और वेल्स ने  विज्ञान कथाओं की आधारभूमि के लिए जो विचार-सरणियाँ निर्मित कीं, फलस्वरूप दुनिया की तमाम भाषाओं में विज्ञान कथाएं लिखी जाने लगीं। 
    निस्संदेह विज्ञान-गल्प-लेखन एक ऐसी सरस और रोचक विधा है, जो बच्चों की जिज्ञासाओं का समाधान करने के साथ-साथ ज्ञान के नए-नए गवाक्ष खोलने में सक्षम है बशर्त वैज्ञानिक तथ्यों का अतिरेक न हो । विज्ञानं गल्पकारों का दायित्व रंजन-मनोरंजन के साथ अंधकार कारा का निवारण भी है । 
  • Computer : Kya? Kyon? Kaise?
    Varun Kumar Sharma
    100 90

    Item Code: #KGP-9153

    Availability: In stock

    कंप्यूटर शब्द अंग्रेजी के 'कम्प्यूट' (Compute) शब्द से उत्पन्न हुआ है, जिसका अर्थ है – गणना करना । इस प्रकार साधारण भाषा में कम्प्यूटर का अर्थ एक ऐसी मशीन से है, जो गणना संबंधी कार्यों को शीघ्रता से कर सकती है । परंतु सही अर्थों में गणना करने के अलावा कम्प्यूटर और भी कई कार्य कर सकता है । कंप्यूटर की जानकारी के लिए इसकी विशेषताओं को जानना आवश्यक है ।
  • Antariksh Anveshan Ki Vartmaan Pragati
    Kali Shanker
    350 315

    Item Code: #KGP-9142

    Availability: In stock

    अंतरिक्ष अन्वेषण की वर्तमान प्रगति
    आज अंतरिक्ष और अंतरिक्ष अन्वेषण मानव के लिए बेहद दिलचस्पी और आकर्षण का विषय बना हुआ है तथा एक सामान्य मानव इससे संबंधित अधिकाधिक जानकारी हासिल करना चाहता है। हाइटेक विषय होने के कारण अंतरिक्ष और अंतरिक्ष अन्वेषण के विभिन्न पहलुओं और विषयों की जानकारी प्रायः एक स्थान पर उपलब्ध नहीं हो पाती है। प्रस्तुत पुस्तक के माध्यम से अंतरिक्ष जैसे जटिल विषय को ‘गागर में सागर’ जैसे स्वरूप में भरने का प्रयास किया गया है। 
    इस पुस्तक ‘अंतरिक्ष अन्वेषण की वर्तमान प्रगति’ के माध्यम से अंतरिक्ष के विभिन्न अभियानों, अंतरिक्ष के उपयोगी स्वरूपों, अंतरिक्ष अन्वेषण के विभिन्न तरीकों, अंतरिक्ष पर्यटन एवं अंतरिक्ष व्यवसायीकरण, भावी अंतरिक्ष अन्वेषण के नए आयामों, स्पेस वाक, अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन अल्फा, गैर मानव अंतरिक्ष यात्रियों तथा अंतरिक्ष में हर्ष और विषाद जैसे जटिल विषयों को एक स्थान पर सरल और ज्ञानवर्द्धक भाषा में लिखकर एकीकृत किया गया है। 
    अंतरिक्ष अन्वेषण से संबंधित प्रेरणादायक अनेक हस्तियों–जान केप्लर, आर्थर सी. क्लार्क, सिवोल्को- वोस्की, जान ग्लेन, एलीन कालिंस, आइजक न्यूटन इत्यादि के विषय में भी वर्णन किया गया है, जो पाठकों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेंगे।
  • Computer Yaani Masheeni Dimaag
    Shuk Deo Prasad
    125

    Item Code: #KGP-1159

    Availability: In stock

    कम्प्यूटर यानी एक मशीन —'मशीनी दिमाग' (Electronic brain) , जिसके अंदर बिछा होता है अनगिनत तारों का मायाजाल। 
  • Aarsa Sahitya Mein Moolbhoot Vigyan
    Vishnu Dutt Sharma
    220 198

    Item Code: #KGP-774

    Availability: In stock

    प्राचीन भारत में वैज्ञानिकों की कोई कमी नहीं थी। इनका विवरण अनेक आर्ष साहित्य में उपलब्ध है। वास्तव में भारतीय वैज्ञानिकों के धार्मिक एवं दार्शनिक पक्षों को देखकर ही उन्हें ऋषियों की श्रेणी में रखा तथा उनके वैज्ञानिक योगदान के महत्त्व को कम कर दिया गया और उसका समुचित रूप से मूल्यांकन भी नहीं किया गया। वैदिक काल से गुप्तकाल (400 ई. पूर्व) तक विज्ञान के सिद्धांत एवं वैज्ञानिक पद्धति के विषय में महत्त्वपूर्ण कार्य हुए किंतु दुर्भाग्य से प्राचीन भारतीय विज्ञान के विकास का समुचित विश्लेषणात्मक अध्ययन नहीं हो पाया है।
    प्रस्तुत शोध-ग्रंथ ‘आर्ष साहितय में मूलभूत विज्ञान’ के लेखक डाॅ. विष्णुदत्त शर्मा द्वारा प्राचीन भारतीय विद्वानों के सिद्धांतों की परिपुष्टि को प्रकाश में लाया गया है। आशा है, प्रबुद्ध पाठक प्रस्तुत ग्रंथ में वर्णित भारतीय परिव्राजकों द्वारा किए गए अनुसंधानों तथा कालांतर में ये ही शोध-कार्य पश्चिमी देशों की मोहर लगकर भारत मं आयातित विज्ञान के तथ्य को जानने का प्रयास करेंगे। आशा ही नहीं अपितु विश्वास है कि यह पुस्तक शोधकत्र्ताओं और विज्ञान एवं अध्यात्म में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए समान रूप से रोचक होगी।
  • Vigyan Navneet
    Dr. Ramesh Dutt Sharma
    290 261

    Item Code: #KGP-563

    Availability: In stock

    विज्ञान नवनीत
    लगभग आधी सदी पहले डा. रमेश दत्त शर्मा ने विज्ञान संबंधी विषयों पर लिखना शुरू किया था और जल्द ही वे विज्ञान से जुड़े हर महत्त्वपूर्ण विषय पर लिखने लगे। अब तक हिंदी की शीर्षस्थ पत्रिकाओं में हजार से अधिक श्रेष्ठ रचनाएं उनकी छप चुकी हैं, लेकिन रचनाओं के छपने से कहीं अधिक महत्त्वपूर्ण उन रचनाओं का पढ़ा जाना है। विज्ञान को अकसर नीरस विषय कहा जाता है, लेकिन डा. रमेश दत्त शर्मा का लेखन किसी भी दृष्टि से नीरस नहीं कहा जा सकता। छात्रा भले ही वे विज्ञान के थे, पर साहित्य से हमेशा जुड़े रहे। स्वभाव से कवि तो थे ही, इसलिए उनके लेखन में एक ऐसी रंजकता है, जिसमें पाठकों को भीतर तक छूने और उनका मन जीत लेने की अद्भुत विशेषता रही है। गंभीर वैज्ञानिक विषयों को रोचक कहानी की तरह परोसना कोई आसान काम नहीं है, लेकिन रमेश जी ने यह काम प्रस्तुत पुस्तक में बड़ी आसानी से किया है। 
    ‘विज्ञान नवनीत’ ढंगदार लेखों का संकलन है, जो देश की विभिन्न पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए थे। यह संयोग भी है कि पुस्तक के बहुत से लेख ‘नवनीत’ में छपे थे। अपनी इस पुस्तक के शीर्षक के साथ लेखक ने लिखा है—‘विज्ञान को मथकर निकाली गई लुभावनी लोनी। बड़ी स्वादिष्ट होती है लोनी। देर तक जीभ पर स्वाद बना रहता है। ऐसा ही स्वाद इन लेखों का भी है।’ 
    प्रस्तुत पुस्तक में संगृहीत लेखों से यह बात सहज ही समझ आ जाती है कि लेखक सिर्फ लिखना ही नहीं चाहता, कुछ सार्थक रचना चाहता है। सार्थकता की गंध इस पुस्तक के हर पन्ने पर अनुभव की जा सकती है। 
    —विश्वनाथ सचदेव
  • Sachitra Vigyan Va Praudyogiki Vishvakosh (3 Vols.)
    Vinod Kumar Mishra
    1950 1755

    Item Code: #KGP-570

    Availability: In stock

    सचित्र विज्ञान व प्रौद्योगिकी विश्वकोश (3 खंडों में)
    प्रसिद्ध फ्रांसीसी गणितज्ञ आलेम्बर्त के विषय में कहा गया, "इसकी प्रतिभा फ्रांसीसी विश्वकोश ( 1751-1780) के प्रणयन में अधिक काम आई।" दूसरे शब्दों में गणित की खोजों की कीमत में भाषा की सेवा हो गई। ऐसा भारतीय भाषाओं के संदर्भ में हो ही नहीं सकता, क्योंकि भाषा-सेवा को यहाँ दोयम दर्ज का काम समझा जाता है। यूरोप में भाषा-सेवा देश-सेवा का पर्याय मानी जाती रही, जिस कारण वहाँ विश्वकोशों की परंपरा सदियों पुरानी है। अंग्रेजी के प्रसिद्ध विश्वकोश 'ब्रिटानिका' का प्रथम संस्करण 1768-1771 में छपा था।
    हिंदी प्रदेश में बीसवीं सदी के आरभ में हिंदी ‘शब्द-सागर को योजना हाथ में ली गई। इसमें तत्कालीन हिंदी के मूर्धन्य आचार्य जुट गए। कार्य को दिशा मिल गई और शब्दकोश-निर्माण की अच्छी परंपरा विकसित हो गई । आज हिंदी में अनेक अच्छे शब्दकोश हैं, यह बात विश्वकोशों के विषय में नहीं कहीं जा सकती। विश्वकोश-निर्माण के भी अनेक प्रयास हुए, पर सामूहिक प्रयासों से इस विधा का क्रमिक विकास नहीं हो पाया। संस्थागत और व्यक्तिगत  प्रयासों से व्यापक या विषयवार दोनों प्रकार के विश्वकोशों का निर्माण हुआ । 
    व्यक्तिगत प्रयास से बने विश्वकोश का एक उदाहरण प्रस्तुत पुस्तक श्रृंखला है। इसके प्रणेता सिद्धहस्त हिंदी लेखक श्री विनोद कुमार मिश्र एक इंजीनियर हैं। इनकी कर्मठता और लगन ने इस ग्रंथ को आकार दिया है। फिर भी मानना पड़ता है कि इनका ज्ञान इंजीनियरी और भौतिक विज्ञानों तक ही सीमित था। सौभाग्य से पुनरीक्षक ऐसे मिल गए, जिनको कोशकला का पर्याप्त अनुभव था और वे जीव विज्ञानों के अध्येता रहे। प्रकाशक ने भी विलक्षण धैर्य और साहस का परिचय दिया । इन सभी सकारात्मक कारकों के योगदान से एक अच्छे ग्रंथ का सृजन संभव हो पाया।
  • Aakash Ke Deeye
    Sharan
    30 27

    Item Code: #KGP-9148

    Availability: In stock

    हिंदी में ज्ञान-विज्ञान का विविध साहित्य उपलब्ध कराने के लिए केंद्रीय हिन्दी निदेशालय, शिक्षा एवं संस्कृति मंत्रालय पुस्तक प्रस्थान की अनेक योजनाओं पर कार्य कर रहा है । इनमें से एक योजना प्रकाशकों के सहयोग से हिंदी से लोकप्रिय पुस्तको के प्रकाशन की है । सन् 1961 से कार्यान्वित की जा रही इस योजना का मुख्य उद्देश्य जनसाधारण में आधुनिक ज्ञान-विज्ञान का प्रचार-प्रसार करना और साथ ही हिंदीतर भाषाओ के भी साहित्य की लोकप्रिय पुस्तकों को हिंदी में सुलभ कराना है ताकि ज्ञान-विज्ञान की जानकारी पाठकों को सुबोध शैली में मिल सके । इस योजना के अधीन प्रकाशित पुस्तकों में वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावली आयोग, भारत सरकार द्वारा निर्मित शब्दावली का प्रयोग किया जाता है ताकि हिंदी के विकास में ऐसी पुस्तकें उपयोगी सिद्ध हो सके । इन पुस्तकों में व्यक्त विचार लेखक के अपने होते है ।
  • Vishwa Vigyan Kathayen : Science In Twentieth Century : An Encyclopedia-3
    Shuk Deo Prasad
    545 491

    Item Code: #KGP-699

    Availability: In stock

    विज्ञान कथाओं को कथा की एक विधा के रूप में मान्यता मिले, ह्यूगो गन्र्सबैक ने इस दिशा में अग्रणी भूमिका निभाई और उन्होंने ही इसे ‘साइंटीफिक्शन’ नाम से अभिहित किए जाने का परामर्श दिया। इतना ही नहीं, उन्होंने इस विधा को अपनी तरह से परिभाषित भी किया। ‘अमेजिंग स्टोरीज’ के प्रथमांक में संपादकीय टिप्पणी में गन्र्सबैक ने लिखा-‘साइंटीफिक्शन’ से मेरा अभिप्राय जूल्स वर्न, एच.जी. वेलस और एडगर एलन पो द्वारा लिखी गई ऐसी कहानियों से है, जिसमें आकर्षक रोमांच के साथ वैज्ञानिक तथ्य और युगद्रष्टा की दूरदर्शिता का सम्मिश्रण हो। ....आज विज्ञान कथा-साहित्य में चित्रित किए गए किसी आविष्कार के कल सत्य हो जाने में असंभव जैसा कुछ नहीं है।’
    गन्र्सबैक की इसी परिभाषा के कारण विज्ञान-गल्पों को ‘भविष्यद्रष्टा साहित्य’ भी कहा जाने लगा और लेखकों से ऐसी अपेक्षाएं की जाने लगीं जो निंतात अव्यावहारिक थीं।
    तो क्या विज्ञान कथाओं में आज के कल्पित आविष्कार कल के सच हैं? जी नहीं! ऐसा कदापि नहीं हो सकता। किसी भी गल्प में परिकल्पित कोई भी आविष्कार तदनुरूप कभी भी साकार नहीं हुआ। ऐसे सारे दावे मिथ्या हैं। हां, आविष्कारकों ने विज्ञान-गल्पों से प्रेरणाएं अवश्य ली हैं, इसकी स्वीकारोक्तियां हैं।
    ऐसा इसलिए असंभव है कि गल्पकार आविष्कारक नहीं है और आविष्कारक की गल्प-लेखन में मति-गति नहीं है। विज्ञान-गल्प-लेखन एक विरल विधा है, जिसमें विज्ञानसिद्धि और रससिद्धि दोनों वांछनीय हैं। और ऐसा संयोग विरल ही है।
  • Vaigyanik Pura Kathayen
    Dr. Rajiv Ranjan Upadhyaya
    150 135

    Item Code: #KGP-236

    Availability: In stock

    वैज्ञानिक पुरा कथाएँ
    भारत में विज्ञान के विकास के इस युग में पुराकालीन विज्ञान कथाओं पर विज्ञानसम्मत दृष्टि से पुनर्विचार करने की आवश्यकता है, क्योंकि अनेक कथाओं में भविष्यद्रष्टा ऋषियों की दृष्टि में रचा-बसा विज्ञान प्रत्यक्ष दिखाई देता है। इस संग्रह की विमान संबंधित त्रिपुर: अंतरिक्ष में तीन नगर, मनचालित विमान: सौभ, हिरण्यनगर नामक कथाएँ इनके पुराकालीन अस्तित्व की साक्षी हैं।
    भारत का आयुर्विज्ञान कितना विकसित था, सर्जरी कितनी विकसित थी, इसके प्रभाव चरक संहिता और सुश्रुत संहिता तथा आयुर्वेद संबंधित अन्य ग्रंथों में उपलब्ध हैं। संजीवनी, महर्षि भृगु का चमत्कार, महर्षि च्यवन, विशल्या, अश्विद्वय, गणेश, महर्षि दध्यङ तथा उपमन्यु नामक कथाएँ हमारे पुराकालीन आयुर्वेदीय ज्ञान की परिचायक हैं।
    बुढ़ापा एवं मृत्यु का भय मनुष्य को सदैव से सताता रहा है। दीर्घ और अमर जीवन तथा सदैव यौवनयुक्त रहने की मानव की अनादिकाल से कामना रही है। इसी प्रभाव का प्रतिबिंब समुद्र-मंथन और राजा ययाति नामक कथाओं में विद्यमान है। 
    लिंग-परिवर्तन की घटनाएँ पुराकाल में भी होती रही होंगी, इस तथ्य की ओर इंगित करती कथाएँ हैं शिखंडी तथा इला।
    द्रोणाचार्य, कौरवों तथा बेन से उत्पन्न पुत्र की कथा प्राचीन आख्यानों में सुरक्षित है, जो उस युग में भी मौजूद कृत्रिम गर्भाधान विधि की ओर संकेत करती है।
    पुरुष-शरीर में निहित स्तन-वृद्धि नियंत्राक और यौन-कार्य संपादन में प्रभावी जैव रसायनों के स्रोव में परिवर्तन हो जाने के फलस्वरूप, आधुनिक विज्ञान में उपलब्ध विवरणों के अनुसार, पुरुष में स्तन-वृद्धि ही नहीं होती वरन् उसके स्तनों से दुग्ध- स्रोव भी हो सकता है–राजा मांधाता की कथा इसी तथ्य को प्रदर्शित करती है।
    वैदिककाल के भारतीय गणितज्ञों में श्रेष्ठ महर्षि गृत्समद ने शून्य तथा संख्याओं का आविष्कार किया। गणित में निहित वैज्ञानिक तर्कशील पद्धति के उपयोग को प्रदर्शित करती कथाएँ हैं–धु्रव, राजा ककुघ्न, राजा त्रिशंकु और असुर-त्रित की ऋग्वेदिक कथा।                      
    यह निर्विवाद तथ्य है कि क्लोनिंग, विशेषकर मानवीय संदर्भ में, पुराकाल के चिंतकों, वैज्ञानिकों को अज्ञात थी, परंतु उनके उर्वर मस्तिष्क में संभवतः इस विधा के भविष्य में विकसित हो जाने के बिंब थे, जिसके कारण उन्होंने नृसिंह के रूप की कल्पना की थी। यह कथा एक प्रभावी, भविष्योन्मुखी विज्ञान कथा है।
    भारतीय ऋषियों के रसायन ज्ञान का दर्शन कराती कथा है महर्षि आरुणि उद्दालक की। बहुवर्णित मृत्यु के पूर्व अथवा मृत्यु के अवसर पर मानव-शरीर के रहस्य को तंत्रिका वैज्ञानिकों ने स्पष्ट कर दिया है। आधुनिक विज्ञान की संदेशवाहक बहुश्रुत कथा है सत्यवान की।
    एक वस्तु को अनेक स्वरूप प्रदान करना शिल्प है। वज्र के निर्माण में निहित शिल्प का प्रयोग वृत्रसुर-विनाश, सुदर्शन चक्र तथा महर्षि दधीचि की कथाओं में हुआ है।
    भारतीय ऋषि भूगर्भीय परिवर्तन, उनके परिणाम एवं प्रभाव से अछूते नहीं थे। उन्होंने पृथ्वी पर उभरते और पुनः धरा में लोप होते पर्वतों को देखा था। विंध्यगिरि, श्वेत वराह, खंड-प्रलय एवं और्व-अग्नि नामक कथाएँ भूगर्भ के विविध पक्षों को चित्रित करती हैं।
    नारद के ब्रह्मांड-भ्रमण में पदार्थ-पारण तथा परमाणु- विस्फोट का आश्चर्यजनक वर्णन, जो हमारे पुराणों, रामायण एवं महाभारत में उपलब्ध है, वह आँखों द्वारा देखा हुआ प्रतीत होता है। क्या यह ऋषियों की कल्पना-शक्ति का प्रतिबिंब है अथवा इस प्रकार के लघु परमाणु-विस्फोट करने की (ब्रह्मास्त्र के माध्यम से) विधि ज्ञात थी ? परीक्षित के जन्म की कथा इसी प्रकार के प्रभाव से संबद्ध है।
    वामन अवतार की कथा सूर्य के प्रकाशपुंज विवर्तन के प्रभाव से जुड़ी है। वास्तव में आलंकारिक वैदिक भाषा में उर्वशी-उषा का प्रतीक है, इस पक्ष में अहल्या, सरमा की कथाओं से कम लोग परिचित हैं। इनसे संबंधित भ्रांतियों के निराकरण तथा इनकी कथाओं में निहित तथ्यों के स्पष्टीकरण को ध्यान में रखकर ये कथाएँ संगृहीत की गई हैं।
    इस संग्रह की कथाओं का अनुशीलन करने पर यह स्पष्ट हो जाएगा कि ऋग्वेद में वर्णित असुर-त्रित की गणित संबंधी कथा प्राचीनतम विज्ञान कथा है जो निर्विवाद रूप से प्रमाणित करती है कि विज्ञान कथाओं का उद्गम-स्थल भारत है, न कि योरोप।
  • Saagar Aur Uski Apaar Sampada Evam Oorja
    Vinod Kumar Mishra
    240 216

    Item Code: #KGP-128

    Availability: In stock

    सागर और उसकी अपार संपदा एवं ऊर्जा
    सुनामी लहरों ने सागर का प्रलयंकारी रूप उजागर किया । इस प्रक्रिया में द्वीप अपनी जगहों से हिल गए । कई जगह नीचे दबी सामग्री ऊपर आ गई और अनेक जगहों पर बहुमूल्य सामग्री के भंडार लोगों के हाथ लग गए। 
    इस आपदा ने अनायास ही लोगों के मन से सागर के प्रति जिज्ञासा बढा दी । सागर की उत्पत्ति, उसका विकास, उसके विभिन्न पहलुओं के बारे में जानने की आवश्यकता बढ़ गई और बढ़ती आबादी के मद्देनज़र भविष्य में सागर स्थित जैविक व अजैविक संपदा के दोहन और सागा में छिपी प्रचंड ऊर्जा के उपयोग की संभावनाओं की तलाश अनिवार्य हो गई है ।
    हालाँकि कवियों ने सदियों से ग्रंथों से सागर का वर्णन किया है, पर इस पुस्तक में सागर के विभिन्न रूपों का रोचक व उपयोगी वृत्तांत है ।
  • Antariksh Itihas Ki Vishal Pariyojana
    Praduman Singh
    240 216

    Item Code: #KGP-721

    Availability: In stock


  • Bhartiya Vigyan Kathayen : Science In Twentieth Century : An Encyclopedia-2
    Shuk Deo Prasad
    450 405

    Item Code: #KGP-9152

    Availability: In stock

    सत्तरादि के आरंभ में हिंदी और हिंदीतर भाषाओं में वैज्ञानिक कहानियां प्रभूत मात्रा में लिखी जाने लगीं। बंगला में सत्यजित राय और प्रेमेन्द्र मित्र के प्रयास सराहनीय हैं, लेकिन इन्होंने अपनी लेखनी को विराम क्यों दिया? क्या विज्ञान कथाएं कथा की एक विधा के रूप में जनमानस में अपनी पैठ नहीं बना सकीं?
  • Aadhunik Vigyan Yog
    Kanval Nayan Kapoor
    150 135

    Item Code: #KGP-9151

    Availability: In stock

    हर युग में विज्ञान जन्मा, उन्नत हुआ, लाभकारी हुआ-मानव-सभ्यता को ऐश्वर्य, सुख-समृद्धि जुटाने में, परंतु इसके साथ ही वह भी सामान्य मानव की भांति काल द्वारा प्रभावित हुआ, जीर्ण-शीर्ण हुआ और जन्म देने वाली तत्कालीन सभ्यता के साथ मिट गया, दफन हो गया।
    वर्तमान युग में विज्ञान का जन्म कब तथा किन स्थितियों में हुआ, कह पाना कठिन है, परंतु इतना अवश्य कहा जा सकता है कि इसका जन्म वैदिक काल से जुड़ा है, सिंधु घाटी की सभ्यता से जुड़ा है।
    आज विज्ञान की नवीनतम उपलब्धियों से सारा संसार चकित है। वैज्ञानिक अनुसंधानों और आविष्कारों की होड़ मची है। चंद्रमा पर पहुंचने से लेकर मंगल, शुक्र ग्रह आदि पर पहुंचने पर क्रम जारी है। अंतरिक्ष में उपग्रह स्थापित किए जा रहे हैं।
    प्रस्तुत पुस्तक में इन्हीं वैज्ञानिक आविष्कारों की प्रारंभ से लेकर अब तक की जानकारी दी गई है तथा इस क्षेत्र में वैज्ञानिकों के योगदान और उपलब्धियों पर सरल एवं रोचक शैली में प्रकाश डाला गया है। विज्ञान में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए यह पुस्तक निस्संदेह उपयोगी सिद्ध होगी।
  • Vigyan Ka Itihaas
    Dyanand Pant
    300 270

    Item Code: #KGP-748

    Availability: In stock

    विज्ञान का इतिहास
    विज्ञान की अद्भुत प्रगति विश्व-भर के चिंतकों और कर्मठों के सामूहिक प्रयास का प्रतिफलन है। धर्म, देश, जाति, भाषा आदि की सीमाएँ विज्ञान को बाँध न सकीं। प्रस्तुत पुस्तक में इसी सार्वभौम विज्ञान की समग्र गाथा का रोचक वर्णन है। आदि मानव से लेकर आधुनिक मानव की विलक्षण उपलब्धियों वाली इस विश्वव्यापी बौद्धिक यात्रा का लेखा-जोखा बिना पूर्वग्रहों के प्रस्तुत करने और पाश्चात्य लेखकों के पक्षपातपूर्ण प्रतिपादन का पर्दाफाश करने का लेखक का प्रयत्न सराहनीय है।
    जनसाधारण सुलभ भाषा और रोचक शैली में लिखी अपने विषय की हिंदी की यह प्रथम मौलिक पुस्तक ज्ञानवर्द्धक होने के साथ-साथ पाठक में चिंतन और तर्क की वैज्ञानिक विधि के विकास में भी सहायक होगी।
  • Vishva Ke Mahaan Aavishkaarak Aur Unke Aavishkaar
    Laxman Prasad
    595 536

    Item Code: #KGP-726

    Availability: In stock

    आज संसार का जो स्वरूप है, उसे बनाने में हजारों-लाखों आविष्कारकों ने अपना जीवन लगाया है। इनमें से कुछ का योगदान इतना ज्यादा है कि उनहें महान् कहा जाता है। इन आविष्कारकों ने कृषि, उद्योग, यातायात (जल, थल, नभ, अंतरिक्ष), दूरसंचार (टेलीफोन, टेलीग्राफ, रेडियो, टी.वी.), उपयोगी उपकरण (कम्प्यूटर, कैमरा), चिकित्सा, युद्धक सामग्री, परमाणु ऊजा, विभिन्न प्रकार के वैज्ञानिक सिद्धांतों आदि को इस कदर विकसित किया कि संसार नए युग में प्रवेश कर गया। प्रस्तुत पुस्तक में पिछले ढाई हजार सालों के ऐसे 40-45 महान् आविष्कारकों का व्यक्तित्व व कृतित्व समाहित है।
Scroll