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gardening

  • grid
  • Phalon Ki Baagbaani
    Darshna Nand
    595 536

    Item Code: #KGP-822

    Availability: In stock

    फलों की बागबानी
    फल हमारे दैनिक आहार के अत्यंत महत्वपूर्ण घटक हैं। यह स्वास्थ्यवर्द्धक होते है और आवश्यक विटामिन, खनिज लवण और अनेक पोषक तत्वों से भरपूर रहते है । बिना फल-सब्जियों के भोजन अपूर्ण रह जाता है । वर्तमान में जबकि अपना देश कुपोषण और प्रदूषण का शिकार बना हुआ है, फलों का महत्त्व और भी अधिक बढ जाता है। बेल, जामुन, आँवला, पपीता, नीबू, अमरूद, अंजीर, हरड़, बहेडा व अन्य कुल फलों को तो यदि सीधे औषधि ही कह दिया जाए तो अनुचित न होगा ।
    वर्तमान जनसंख्या वृद्धि की दशा में फलों के अंतर्गत क्षेत्रफल व फल उत्पादन बढाना नितांत आवश्यक है । आम, कटहल, केला आदि फल व आलू तथा अन्य कंद वाली सब्जियां तो भोजन के रूप में ही खाए जा सकते है । फिर भी क्षेत्रफल और उत्पादन से वृद्धि लाना केवल उसी दशा में संभव है, जबकि उद्यान-स्वामी को आम, आंवला, पपीता जैसे फलों में अफलन के कारण व समाधान का ज्ञान हो तथा फल-वृक्षों में वष्टि-व्याधियों, खाद-पानी, काट-छांट  आदि जैसी आवश्यक कर्षण क्रियाओं की वैज्ञानिक जानकारी हो ।
    इस पुस्तक की रचना लेखक द्वारा किए गए शोध-विकास कार्यों, अपने पूर्व ज्ञान, विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं से अध्ययनोपरांत व अन्य स्रोतों से साभार प्राप्त सामग्रियों, क्रियात्मक अनुभवों, समय-समय पर औद्यानिक राष्ट्रीय  अंतर्राष्ट्रीय गोष्ठियों-संगोष्टियों में भाग लेकर प्राप्त ज्ञान के आधार पर की गई है ।
    प्रस्तुत पुस्तक विभिन्न विभागों के विभिन्न स्तर के अधिकारियो, कर्मचारियों तथा शिक्षण व शोध संस्थानों के पुस्तकालयों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी। इसके साथ ही विद्यालयों, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों के पुस्तकालयों हेतु धरोहर साबित होगी ।
  • Aanvla Or Uski Baagbani
    Darshna Nand
    180 162

    Item Code: #KGP-7848

    Availability: In stock

    वास्तव में आंवले का ताजा फल भी सीमित मात्रा में ही खाया जा सकता है । मुरब्बे के अतिरिक्त इसके अनेक उत्पाद भी निर्माण किये जाते हैं । इसकी उपयोगिताएं अनन्य हैं । यह औषधीय गुणों का भंडार है । 
    इस विशिष्ट फल पर कोई संकलित साहित्य उपलब्ध नहीं था, जिससे इसकी वैज्ञानिक विधि से बागबानी करने और इसके उपयोग करने में सहायता मिल पाती । प्रस्तुत की पुस्तक की हिंदी में रचना करके लेखक ने इन अभावों की पूर्ति की है । 
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