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folk tales

  • grid
  • Desh-Videsh Ki Lokkathayen
    Vishv Nath Gupta
    175 158

    Item Code: #KGP-122

    Availability: In stock

    पाठकों से
    प्रस्तुत पुस्तक में दुनिया के देशों की लोककथाएँ संगृहीत हैं । पुस्तक अत्यंत उपयोगी है-केवल बच्चों के लिए ही नहीं बल्कि बड़ों के लिए भी ।
    लोककथाओं की रचना कोई व्यक्ति नहीं करता बल्कि तत्संबंधी देश की धरती से जुडे हुए रीति-रिवाज, सामाजिक- आर्थिक व्यवस्थाएं और वहां के लोगों का चिंतन करता है । लोककथाएँ शनै:-शनै: विकसित होती हैं-गढ़ी जाती हैं ।
    अगर ध्यान से पढा जाए तो एक लोककथा में उसका पूरा देश और समाज बोलता है ।
    इन तमाम दृष्टियों से प्रस्तुत लोककथा-संग्रह एक महत्त्वपूर्ण प्रयास है ।
    -विश्वनाय गुप्त
  • Himalaya : Aitihaasik Evam Pauranik Kathayen
    Padamchandra Kashyap
    200 180

    Item Code: #KGP-1932

    Availability: In stock

    हिमालय ऐतिहासिक एवं पौराणिक कथाएँ
    एक समय आया जब भारतीय संस्कृति के अजस खोट स्त्रोत  देवात्मा पुण्यात्मा नगाधिराज़ हिमालय के मानव को  असंस्कृत, प्लेच्छ, वृषल कहकर मुख्य धारा से बाहर हाशिये पर ला बिठा दिया गया । वह सच्चाई जानता था, अविचल रहा । पाषाण युग से आरंभिक वैविध्यपूर्ण अतीत के इस उत्तराधिकारी का सच और झूठ मापने का निजी पैमाना था । वह न कभी विजेता से भयभीत हो उसके आगे नतमस्तक हुआ और न पराजित को दुत्कारा, भुलाया । उसने इंद्र का सम्मान किया किंतु सहानुभूति वृत्र को दी और उसे भी देवता माना । पांडवों की जीत स्वीकार की, पर 'उद्दंड’ कहकर उन्हें दुर्दैव के हवाले कर दिया । 'शालीन' कौरवों को सराहा तथा 'मामा विष्णु' का प्यार दिलाया । महाभारत का कारण साग-सब्जी की वाटिका थी, तो सीता-हरण के पीछे उसका पकाया हुआ बड़ा' । सनुद्र-मंथन से निकला अमृत कहीं छलका, महाप्रलय के बाद मनु की नाव कहाँ उतरी और पुनः कृषि के लिए बीज कौन लाया, इसकी नई जानकारी दी । उसने मनुष्य को देवता बनते देखा और स्वयं देवता को मनुष्य बना, उसे खिलाव-पिलाया, नचवाया, साथ चलाया, चाकरी करवाई और दंडित भी किया, भले ही वह बडा देव विष्णु हो या महादेव शिव । महात्मा बुद्ध को देवराज इंद्र, अनाम राज्य की एक सनाम रानी को  परशुराम माता रेणुका तथा यमुना नदी को द्रोहणी घोषित किया ।
    सहज, सरल, बातचीत की भाषा में, हलके-फुलके रोचक ढंग से हिमालय संतति की देखी-सुनी बताता है लघु कथाओं का यह संग्रह, जिसमें वेद है, इतिहास-पुराण भी । इसमें तथ्य है, कथ्य है, विद्वता का दबाव नहीं ।
  • Moldeviya Ki Lokkathayen
    Sanjiv Thakur
    175 158

    Item Code: #KGP-195

    Availability: In stock

    मोल्देविया की लोककथाएँ
    मोल्देविया (वर्तमान नाम मोलदोव (Moldova)) उक्रेन के पास एक छोटा-सा देश है। वहाँ  लोककथाओं की अच्छी-खासी परंपरा रही है। लोककथाओं के साथ-साथ वहीं लंबी-लंबी परीकथाएँ भी कही-सुनी जाती रही हैं। इस संग्रह मेँ उनमें से कुछ लोककथाएँ और परीकथाएँ प्रस्तुत की गई हैं। संग्रह में प्रस्तुत लोककथाओं में जहाँ जनजीवन से जुडी बाते है, वहीँ परीकथाओं में अदभुत कल्पनालोक दिखाई देता है । इन्हें पढ़कर मोल्देविया के सामान्य लोगों के कल्पनाशील होने का पता चलता है तो अपने समाज के यथार्थ के प्रति उनके जागरूक होने का पता भी चलता है। एक तीसरी धारा हास्य की है जो मोल्देविया के जन-मानस में बहती दिखाई देती है ।
    राजा, राजकुमारी, राजकुमार, जमींदार, पादरी, गरीब आदमी, गड़रिया, ड्रैगन, दैत्य आदि अच्छे-बुरे पात्रों के द्वारा कही गई ये कथाएँ अच्छाई, बुराई, चालाकी, दुष्टता, बुद्धिमानी, मूर्खता, शत्रुता, मित्रता जैसी चीजो से पाठकों का परिचय अनायास करवा सकती है ।
    मोल्देविया के लोक-मानस की थाह दिलाने वाली ये कथाएँ बच्चों और बडों को समान रूप से आकर्षित करने की सामर्थ्य रखती हैं ।
  • Parvatiye Lokkathayen
    Santosh Shelja
    100 90

    Item Code: #KGP-1935

    Availability: In stock


  • Aadivasi : Srijan Mithak Evam Anya Lokkathayen
    Ramnika Gupta
    500 400

    Item Code: #KGP-682

    Availability: In stock

    आदिवासी संस्कृति अब तक ज्ञात मानव सभ्यताओं में सबसे प्राचीन है। इस समाज की लोककथाओं-गाथाओं में मानव सभ्यता के शुरुआती दौर के सामाजिक, सांस्कृतिक मूल्यबोध की झलक तो मिलती ही है, साथ ही ये हमें आदिम मनुष्य को विस्मित कर देने वाली कल्पना की उड़ान और मनुष्य की आकांक्षाओं-अपेक्षाओं की मंत्र-मुग्ध करने वाली विरासत भी सौंपती हैं। ये कथाएँ--मिथक मानव सभ्यता के विकास की कथाएँ हैं--परिवर्तनों की दस्तकें दर्ज हैं इनमें--कल्पना और यथार्थ की भाषा में बोलती हैं ये कथाएँ। यदि हमने मौजूदा भूमंडलीकरण के दौर में मानव सभ्यता की इस विरासत को सुरक्षित नहीं रखा तो वर्तमान पीढ़ी के साथ ही ये विस्मृत हो जाएँगी।  
    इस संकलन में झारखंड, महाराष्ट्र, गुजरात और अंडमान-निकोबार की कथाओं को शामिल किया गया है। इन्हें पाठकों की सुविधा के लिए 12 खंडों में विभाजित किया गया है। पृथ्वी की उत्पत्ति से संबंधित खंड में आदिवासी समूहों व समाजों में मौजूद आस्थाओं, विश्वासों व उनकी अपनी-अपनी अवधारणाओं पर आधारित लोककथाएँ शामिल की गई हैं।
    ‘पशु-पक्षी और जलचर खंड’ में संताली की ‘छोटी चिड़िया की कथा’ में छोटी चिड़िया की वीरोचित कथा का संवाद सुनकर मानव में एक संदेश पहुँचता है कि कैसे एक छोटी चिड़िया भी एक अन्यायी एवं अहंकार से भरे हाथी का दर्प-दलन कर सकती है। यह साहस तभी जुटने लगता है, जब कोई व्यक्ति अथवा प्राणी सत्य-पथ पर चलकर किसी अत्याचारी के विरुद्ध अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति एवं संकल्प के साथ सामना करने के लिए तैयार हो। इस खंड में मानव और अन्य जीवों के बीच भावनात्मक संबंधों की प्रेरणादायक कथाएँ संकलित हैं। 
    इसके अलावा ‘प्रेम-कथा’, ‘विवाह, गोत्र और रीति- रिवाज’, ‘रिश्तों का सच’, ‘कायांतरण’ और ‘लोकजन्य कथाएँ’ खंड की मिथ कथाओं में स्वैरागात्मक व संवेदनाओं, सामाजिक गतिविधियों के उद्भव व विकास, प्रकृति के सहयोग व संवाद और मनुष्य की विभिन्न अच्छी-बुरी प्रवृत्तियों को रोचक ढंग से प्रस्तुत किया गया है।
  • Meri Romanchak Satyakathayen
    Kaviraj Om Prakash
    250 225

    Item Code: #KGP-648

    Availability: In stock

    मेरी रोमांचक सत्य-कथाएँ
    इस संग्रह की कहानियों के कथानक वर्तमान काल के अलावा वैदिक और पौराणिक काल के भी हैं और भारत के विभाजन से पहले के भी है । कई कहानियाँ साधु-संतों, महात्माओं और नाग आदि  देवी-देवताओं के संबंध में भी है । इनसे पता चलता है कि कविराज को भारतीय इतिहास, संस्कृति और जनजीवन की व्यापक और सही जानकारी है । यह भी पता चलता है कि वे आस्थावान हैं और भारतीय संस्कृति से बड़ी गहराई से जुडे हुए है । हस संग्रह की कहानियां कला की दृष्टि है भी उच्चकोटि की है । प्रत्येक कहानी का कथानक, विषयवस्तु और चरित्र-चित्रण मार्मिक एवं आकर्षक है । प्रत्येक कहानी  रोचक है, पाठक के मन को बाँधने वाली है और अच्छी शिक्षा देने वाली है ।
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