Bhartiya Naitik Shiksha : 3

Dr. Prem Bharti

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  • Year: 2011

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 9788190820424

पिछले कुछ वर्षों से शैक्षिक पाठ्यचर्या में नैतिक शिक्षा की आवश्यकता को अनुभव करते हुए कुछ शासकीय/अशासकीय संस्थाओं में इसके शिक्षण हेतु प्रयास किए जा रहे हैं, किंतु इसके प्रभावी परिणाम सामने नहीं आ पा रहे हैँ। देश तथा विश्व के महान् शिक्षकों-अरस्तू विवेकानन्द, अरविन्द, रवीन्द्रनाथ टैगोर , महात्मा गांधी आदि ने शिक्षा के इस पक्ष को व्यावहारिक आचरण के रूप से प्रस्तुत करने पर बल दिया है क्योकि किसी पर थोपे गए आचरण अथवा इस विषय की लिखित परीक्षा में पाए गए अधिकतम अड्डों से नैतिकता तथा आध्यात्मिकता का पाठ नहीं पढाया जा सकता।
अत: शिक्षक को ही शिक्षा की धुरी होने के नाते अपने शिक्षण विषय के साथ-साथ इस विषय को उपदेशात्मक शैली में न पढाकर व्यावहारिक रूप से प्रस्तुत करना चाहिए ताकि बालकों को जीवन के विभिन्न सन्दभों में उपस्थित समस्याओं को हल करने में यह प्रभावी सिद्ध हो सके। शिक्षकगण यह भी ध्यान रखें कि आज के युवक में समस्याओं का क्षेत्र उतना ही व्यापक होता जा रहा है, जितना जीवन का मापदण्ड। 
प्राचीन भारतीय साहित्य में नैतिकता तथा आध्यात्मिकता सम्बन्धित ज्ञान का भण्डार भरा पडा है । यदि हम बालकों के उस साहित्य को पढने के प्रति रुचि भी उत्पन्न कर दें, तो उन्हें इतनी समझ आ जाएगी कि अनैतिक एवं असंयमी व्यवहार करके हम मानवता को सुख और शान्ति का संदेश नहीं दे सकते।
प्रस्तुत पुस्तक इसी दृष्टि से तैयार की गई है । आशा है, नैतिक शिक्षा के विभिन्न पहलुओं क्रो विविध संदभों में समझकर बालकों में निश्चित परिवर्तन होगा।

Dr. Prem Bharti

डॉ. प्रेम भारती
जन्म: 14 मार्च, 1933, खुजनेर (जिला राजगढ़), मध्य प्रदेश।
शिक्षा: एम.ए. (हिंदी और अर्थशास्त्र), एम.एड. तथा लघु पत्रिकाओं पर पी-एच.डी.।
अभिरुचि: साहित्य, वेदांत, ज्योतिष के माध्यम से समाज-सेवा, पाठ्यपुस्तक लेखन में दक्षता।
प्रकाशित साहित्य: गद्य साहित्य--‘तुलसी के राम’, ‘वीरांगना दुर्गावती’, ‘भगवान महावीर’, ‘बालकृष्ण शर्मा नवीन’, ‘समरस भारत के आधारस्तंभ’, ‘शिक्षा और संस्कृति’, ‘गीता तत्वार्थ’ एवं ‘बाल-साहित्य का आलोचनात्मक इतिहास’। पद्य साहित्य शतक--‘रामायणी शतक’, ‘गीता शतक’, ‘त्रिवेणी शतक’, ‘शृंगार शतक’ एवं ‘शतदल’। काव्य--‘दमयन्ती’ व ‘यशोधरा के आँसू’। खंडकाव्य--‘शबरी’, ‘इला’, ‘पत्थर के आँसू’ और ‘कुरुक्षेत्र की राधा’। कविता- संग्रह--‘उषा’, ‘संध्या’, ‘अवगुंठन’, ‘स्वरति गीता’, ‘अनागस’, ‘शब्दप्रिया’, ‘शब्दकाम’, ‘अंधे चैराहे’ व ‘एक तीली की तलाश में’। नाटक--‘नया सवेरा’। उपन्यास--‘वह फिर न मुस्कराई’। अन्य--‘गांधी चालीसा’ (प्रकाशित), ‘मानस भारती’, ‘विद्याभारती प्रदीपिका’, ‘सेवा सेतना’ एवं अनेक दैनिक, साहित्यिक, मासिक, शालेय एवं शैक्षिक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित लेखन।
उपलब्धियाँ एवं सम्मान: संस्कार भारती (साहित्य विधा-2004), लायंस क्लब, भोपाल एवं नागरिक मंच, भोपाल तथा अनेक संस्थाओं द्वारा उत्कृष्ट शैक्षिक एवं साहित्यिक गतिविधियों में सराहनीय योगदान हेतु सम्मानित।
संप्रति: राज्य शैक्षिक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान परिषद् के पूर्व पाठ्यपुस्तक रचना प्रकोष्ठ के विभागाध्यक्ष, मध्य प्रदेश सर्वशिक्षा अभियान की राज्यस्तरीय कार्यकारिणी के सदस्य, माध्यमिक शिक्षा मंडल मध्य प्रदेश संचालक मंडल के सदस्य, एस.सी.ई.आर.टी. (म.प्र.) की पाठ्यपुस्तक स्थायी समिति के सदस्य, अखिल भारतीय माध्यमिक शिक्षा संघ द्वारा संचालित भौतिक एवं सामाजिक पर्यावरण केंद्र, भोपाल के पूर्व राष्ट्रीय समन्वयक, संस्थापक-अध्यक्ष प्राचार्य मंच मध्य प्रदेश, राष्ट्रीय सह-संयोजक अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान, कुरुक्षेत्र, क्षेत्रीय मंत्री--विद्याभारती मध्यक्षेत्र, भोपाल।

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