Bhartiya Naitik Shiksha : 2

Dr. Prem Bharti

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  • Year: 2011

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 9788190820431

जीवन एक अनुपम उपहार है। इसमें आपत्तियों से घबराकर कायरों की भाँति पलायन करने की अपेक्षा समस्याओं का नीतिपूर्वक सामना करने से सुख-शांति व समृद्धि का सृजन होता है। नीतिपूर्वक व्यवहार करने की शिक्षा देने का कार्य नैतिक शिक्षा का है। नैतिक शिक्षा ही वास्तव से वह शिक्षा है, जो विद्यार्थी को समाज तथा राष्ट्र यहाँ तक कि संपूर्ण मानवता के लिए अपना जीवन उपयोगी बनाने की शिक्षा देती है, अर्जित ज्ञान को व्यावहारिक रूप प्रदान कर जीवन के संघर्षों को समझने और उनसे जूझने की क्षमता देती है । मूल्यों एवं संस्कृति की सुरक्षा के साथ वांछित ज्ञान प्रदान करने की दक्षता नैतिक शिक्षा में ही अंतर्निहित है।
नैतिक शिक्षा की यह जो पुस्तक आपके हाथ में है, वह स्वाध्याय के लिए है, मनन के लिए है और बार-बार चिंतन करने के लिए है। केवल छात्र जीवन के लिए ही नहीं अपितु संपूर्ण जीवन के लिए है ।
जीवन की समस्याओं और चुनौतियों का सामना महापुरुषों ने किस प्रकार किया, इस पुस्तक द्वारा आप उसका अध्ययन कर अपना हौसला बढा सकेंगे ताकि उनका समाधान करने में आप सशक्त हो सकें । इस पुस्तक का अध्ययन इस दृष्टि से आपको स्वयं करना है।
अपने अन्तर्मन में झांककर देखने में हममें बहुत-सी कमियां और अच्छइयां देखने को मिलेंगी। इनके शोध से ही हम अपने व्यक्तित्व को पहचान सकते हैं । स्वयं को जानकर ही हम अपने लक्ष्य को जान सकते हैं ।

Dr. Prem Bharti

डॉ. प्रेम भारती
जन्म: 14 मार्च, 1933, खुजनेर (जिला राजगढ़), मध्य प्रदेश।
शिक्षा: एम.ए. (हिंदी और अर्थशास्त्र), एम.एड. तथा लघु पत्रिकाओं पर पी-एच.डी.।
अभिरुचि: साहित्य, वेदांत, ज्योतिष के माध्यम से समाज-सेवा, पाठ्यपुस्तक लेखन में दक्षता।
प्रकाशित साहित्य: गद्य साहित्य--‘तुलसी के राम’, ‘वीरांगना दुर्गावती’, ‘भगवान महावीर’, ‘बालकृष्ण शर्मा नवीन’, ‘समरस भारत के आधारस्तंभ’, ‘शिक्षा और संस्कृति’, ‘गीता तत्वार्थ’ एवं ‘बाल-साहित्य का आलोचनात्मक इतिहास’। पद्य साहित्य शतक--‘रामायणी शतक’, ‘गीता शतक’, ‘त्रिवेणी शतक’, ‘शृंगार शतक’ एवं ‘शतदल’। काव्य--‘दमयन्ती’ व ‘यशोधरा के आँसू’। खंडकाव्य--‘शबरी’, ‘इला’, ‘पत्थर के आँसू’ और ‘कुरुक्षेत्र की राधा’। कविता- संग्रह--‘उषा’, ‘संध्या’, ‘अवगुंठन’, ‘स्वरति गीता’, ‘अनागस’, ‘शब्दप्रिया’, ‘शब्दकाम’, ‘अंधे चैराहे’ व ‘एक तीली की तलाश में’। नाटक--‘नया सवेरा’। उपन्यास--‘वह फिर न मुस्कराई’। अन्य--‘गांधी चालीसा’ (प्रकाशित), ‘मानस भारती’, ‘विद्याभारती प्रदीपिका’, ‘सेवा सेतना’ एवं अनेक दैनिक, साहित्यिक, मासिक, शालेय एवं शैक्षिक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित लेखन।
उपलब्धियाँ एवं सम्मान: संस्कार भारती (साहित्य विधा-2004), लायंस क्लब, भोपाल एवं नागरिक मंच, भोपाल तथा अनेक संस्थाओं द्वारा उत्कृष्ट शैक्षिक एवं साहित्यिक गतिविधियों में सराहनीय योगदान हेतु सम्मानित।
संप्रति: राज्य शैक्षिक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान परिषद् के पूर्व पाठ्यपुस्तक रचना प्रकोष्ठ के विभागाध्यक्ष, मध्य प्रदेश सर्वशिक्षा अभियान की राज्यस्तरीय कार्यकारिणी के सदस्य, माध्यमिक शिक्षा मंडल मध्य प्रदेश संचालक मंडल के सदस्य, एस.सी.ई.आर.टी. (म.प्र.) की पाठ्यपुस्तक स्थायी समिति के सदस्य, अखिल भारतीय माध्यमिक शिक्षा संघ द्वारा संचालित भौतिक एवं सामाजिक पर्यावरण केंद्र, भोपाल के पूर्व राष्ट्रीय समन्वयक, संस्थापक-अध्यक्ष प्राचार्य मंच मध्य प्रदेश, राष्ट्रीय सह-संयोजक अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान, कुरुक्षेत्र, क्षेत्रीय मंत्री--विद्याभारती मध्यक्षेत्र, भोपाल।

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