Ye Galion Ke Bachche

Rekha Rajvanshi

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  • Year: 2002

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Bhartiya Prakashan Sansthan

  • ISBN No: 978-81-88122-11-0

इस किताब में गलियों के बच्चों की कहानियां, कहानियां नहीं बल्कि एक कड़वा सच है । बेतरतीब बिखरे पन्नों को समेटकर इन बच्चों के जीवन की वास्तविकता को सबके समक्ष लेन का इसमें प्रयास किया गया है । छह अध्यायों के माध्यम से इन बच्चों की जीवनगाथा को सुधी पाठकजनों, समाजशास्त्रियों, शिक्षाविदों, मनोवैज्ञानिकों तक पहुँचाने की कोशिश की गयी है । 
यह अध्याय गलियों के बच्चों की समस्याओं को उजागर करने के लिए किया गया छोटा-सा प्रयास है । 

Rekha Rajvanshi

रेखा राजवंशी
जन्म : 13 अक्तूबर, रेवड़ी, हरियाणा
परवरिश और शिक्षा : उत्तर प्रदेश, दिल्ली
लेखिका, कवयित्री व रेडियो कलाकार रेखा राजवंशी ने स्नातक स्तर तक हिंदी व अंग्रेजी का अध्ययन किया । मनोविज्ञान और शिक्षाशास्त्र में स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त की। स्पेशल एडुकेशन में मक्वारी यूनिवर्सिटी, सिडनी से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया । भारत में बी.एड. तथा टीचर ट्रेनिंग से अध्यापन किया । अब सिडनी में हाई स्कूल टीचर है । सप्ताहांत में हाई स्कूल के बच्चों को हिंदी पढ़ाने के साथ-साथ सिडनी विश्वविद्यलय में प्रौढ़ शिक्षा के अंतर्गत हिंदी पढ़ाती है ।
दिल्ली में ऑल इंडिया रेडियो के नाटक, बाल और महिला विभाग की कलाकार, दूरदर्शन के लिए स्क्रिप्ट लेखन और वोइस ओवर किया । सिडनी में एस.बी.एस. रेडियो में सात साल से कार्यक्रम योगदान देती रही है । इसके अतिरिक्त सिडनी, मेलबर्न, केनबरा और वूलून्गोंग शहर में काव्य पाठ किया है ।
अनुवाद : एन.ए.ए.टी.आई से अनुमोदित ट्रांसलेटर है, कुछ सरकारी विभागों वेबसाइट के लिए अनुवाद के अलावा ऑस्ट्रेलिया में एबोरीजनल एनीमेशन फिल्म की कहानियों का अनुवाद किया है ।
 प्रकाशित पुस्तकें : 'अनुभूति के गुलमोहर' (काव्य-संग्रह); 'ये गलियों के बच्चे' (शेध-ग्रंथ); 'छोटे-छोटे पंख' (बाल कविताएँ) ।
संपादन : 'बूमरैंग' (आंस्टेलिया से कविताएँ) ।
सह-संपादन : 'एकता का संकल्प' (इंदिरा गांधी पर आधारित कविताएँ) ।

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