Phalon Ki Baagbaani

Darshna Nand

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  • Year: 2014

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Parmeshwari Prakashan

  • ISBN No: 9789380048215

फलों की बागबानी
फल हमारे दैनिक आहार के अत्यंत महत्वपूर्ण घटक हैं। यह स्वास्थ्यवर्द्धक होते है और आवश्यक विटामिन, खनिज लवण और अनेक पोषक तत्वों से भरपूर रहते है । बिना फल-सब्जियों के भोजन अपूर्ण रह जाता है । वर्तमान में जबकि अपना देश कुपोषण और प्रदूषण का शिकार बना हुआ है, फलों का महत्त्व और भी अधिक बढ जाता है। बेल, जामुन, आँवला, पपीता, नीबू, अमरूद, अंजीर, हरड़, बहेडा व अन्य कुल फलों को तो यदि सीधे औषधि ही कह दिया जाए तो अनुचित न होगा ।
वर्तमान जनसंख्या वृद्धि की दशा में फलों के अंतर्गत क्षेत्रफल व फल उत्पादन बढाना नितांत आवश्यक है । आम, कटहल, केला आदि फल व आलू तथा अन्य कंद वाली सब्जियां तो भोजन के रूप में ही खाए जा सकते है । फिर भी क्षेत्रफल और उत्पादन से वृद्धि लाना केवल उसी दशा में संभव है, जबकि उद्यान-स्वामी को आम, आंवला, पपीता जैसे फलों में अफलन के कारण व समाधान का ज्ञान हो तथा फल-वृक्षों में वष्टि-व्याधियों, खाद-पानी, काट-छांट  आदि जैसी आवश्यक कर्षण क्रियाओं की वैज्ञानिक जानकारी हो ।
इस पुस्तक की रचना लेखक द्वारा किए गए शोध-विकास कार्यों, अपने पूर्व ज्ञान, विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं से अध्ययनोपरांत व अन्य स्रोतों से साभार प्राप्त सामग्रियों, क्रियात्मक अनुभवों, समय-समय पर औद्यानिक राष्ट्रीय  अंतर्राष्ट्रीय गोष्ठियों-संगोष्टियों में भाग लेकर प्राप्त ज्ञान के आधार पर की गई है ।
प्रस्तुत पुस्तक विभिन्न विभागों के विभिन्न स्तर के अधिकारियो, कर्मचारियों तथा शिक्षण व शोध संस्थानों के पुस्तकालयों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी। इसके साथ ही विद्यालयों, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों के पुस्तकालयों हेतु धरोहर साबित होगी ।

Darshna Nand

दर्शना नन्द
जन्म : 3 जुलाई, 1930
शैक्षिक योग्यता : एम०एस-सी० (कृषि), उद्यान विभाग (दो वर्ष की शोध थीसिस सहित) गवर्नमेंट एग्रीकल्चरल कॉलेज, कानपुर से 1952 में ।
अमरूद को किस्म 'इलाहाबाद सुर्खा' (बाहर-भीतर लाल) का स्वयं द्वारा चयन । इसके 24 बडेड पौधे एक-चौथाई एकड़ भूमि में 30 जुलाई, 1988 को खुसरोबाग, इलाहाबाद में स्थापित ।
36 वर्षों से अधिक के अनुभवों के पश्चात् उपनिदेशक उद्यान, इलाहाबाद मंडल (उद्यान विभाग, उत्तर प्रदेश), इलाहाबाद के पद से संयुक्त निदेशक, उद्यान के वेतनमान (समयमान) में 31 जुलाई, 1988 को सेवानिवृत ।
विज्ञान परिषद, प्रयाग द्वारों डॉ० गोरखप्रसाद विज्ञान पुरस्कार व विज्ञान वाचस्पति की उपाधि व चिह्न द्वारा सम्मानित ।
प्रथम इंडियन हॉर्टीकल्चर काग्रेस 2004, नई दिल्ली, तृतीय इंडियन हॉर्टीकल्चर कांग्रेस 2008, भुवनेश्वर व ग्लोबल पोटैटो कॉन्ग्रेस 2008, नई दिल्ली में चिहों द्वारा सम्मानित ।
औद्यानिक विषयों पर गहन अध्ययन एवं लेखन, बागवानी, प्रदूषित पर्यावरण एवं तंबाकू निषेध में रुचि व क्रियात्मक अनुभव । आल इंडिया रेडियो, इलाहाबाद, गोरखपुर, लखनऊ, नई दिल्ली में औद्यानिक विषयों पर वार्ता । आल इंडिया रेडियो, इलाहाबाद के लगभग स्थायी वार्ताकार ।
दूरदर्शन, नई दिल्ली, लखनऊ, इलाहाबाद के पूर्व सजीव व ध्वनिकरित वार्ताकार उद्यान विज्ञान संबंधी 18 पुस्तकों/पुस्तिकाओं तथा 25 शोधपत्रों व अनेकानेक औद्यानिक, पर्यावरण, धूम्रपान के सामान्य लेखों के रचयिता।

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