Devtaon Ki Ghaati

Dronvir Kohli

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  • Year: 2003

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Himachal Pustak Bhandar

  • ISBN No: 9788188123407

परीक्षा की घड़ी
कोई-कोई यही बडी मनहूस होती है । ऐसी ही एक घडी आई थी हिमाचल की 'देवताओं की घाटी' में, जब वहीं के सीधे-सादे, भाले-भाले, निरीह प्राणियों पर, सचमुच, मुसीबत के पहाड़ टूटे थे।
यह डरावनी वेला भुलाए नहीं भूलेगी इस घाटी के लोगों को । और दुनिया भी याद करेगी कि इन असहाय लोगों ने कितने धीरज से इतनी बड़ी विपदा का सामना किया ।
बड़े जीवट के लोग है 'देवताओं की घाटी' के निवासी ।
'देवताओं की घाटी' और उस घाटी में आई उस भयंकर विपति से जूझने का यह अद्भुत सच्चा वृत्तांत मैंने  बालय-बालिकाओं के लिए विशेष रूप से लिखा है ।
-द्रोणवीर कोहली

Dronvir Kohli

द्रोणवीर कोहली
अपने लंबे साहित्यिक जीवन में लेखक ने कुल जमा बीसेक कहानियाँ ही लिखी होंगी, लेकिन उनमें से मात्र बारह कहानियों को ही चुना 'जमा-पूँजी' से संगृहीत करने के लिए ।
लेखक के अब तक आठ उपन्यास प्रकाशित हो चुके हैं -- 'टप्परगाडी', 'चौखट', 'हवेलियों वाले', 'आँगन-कोठा', 'काया-स्पर्श', 'तकसीम', ‘वाह कैंप' तथा 'नानी' । 'चौखट' के लिए बिहार राजभाषा विभाग से 'राजा राधिकारमण प्रसाद सिंह' पुरस्कार ।
बाल-साहित्य में उत्तर प्रदेश से 'कंथक' तथा हिंदी अकादमी, दिल्ली से 'देवताओं की घाटी' पुरस्कृत । इंडो-रशियन लिटरेरी क्लब ने भी बाल-साहित्य से मूल्यवान योग के लिए लेखक को सम्मानित किया है । कुछ विश्वप्रसिद्ध लेखकों की बाल-रचनाओं का अनुवाद करने के अतिरिक्त लोककथाएँ तथा दूसरी कहानियाँ भी लिखी हैं ।
लेखक का जन्म 1932-33 में रावलपिंडी के निकट एक गाँव में हुआ, जहाँ संस्कृति, पाली का पुट लिए अवाणी अथवा अवाणकी बोली बोली जाती है। लड़कपन बीता रावलपिंडी में, जहाँ पोठोहारी बोली बोली जाती है । इन बोलियों का साहित्यिक प्रयोग लेखक ने अपनी रचनाओं में खुलकर किया है । देश-विभाजन के उपरांत 1949 में भारत सरकार के प्रकाशन विभाग में नौकरी, जहाँ 'आजकला', 'बाल भारती', 'सैनिक समाचार' पत्रिकाओं का संपादन किया । आकाशवाणी में वरिष्ठ संवाददाता, हिंदी समाचार विभाग में प्रभारी समाचार संपादक तथा प्रेस इंफरमेशन ब्यूरो में सूचना अधिकारी की हैसियत से भी काम किया ।

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