Agyey Sahachar

Vishwanath Prasad Tiwari

Availability: In stock

Seller: KGPBOOKS

Qty:
695.00 626 + Free Shipping


  • Year: 2011

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 9789380146164

अज्ञेय सहचर
छायावादोत्तर हिंदी साहित्य में अज्ञेय का व्यक्तित्व एक स्वाधीन चिंतक और प्रयोगधर्मी रचनाकार के रूप में अद्वितीय है। इस संदर्भ में एक-दो लेखक ही उनकी पंक्ति में बैठते हैं। उनकी सर्जनात्मक प्रयोगशीलता और नवीनता तथा अनेक कलाओं में उनकी दक्षता को देखते हुए उन्हें हिंदी का ‘रवींद्रनाथ’ कहना उपयुक्त है। अज्ञेय ने हिंदी साहित्य की लगभग सभी विधाओं (कविता, उपन्यास, कहानी, नाटक, निबंध, संस्मरण, यात्रावृत्त, आलोचना और अन्य लघु विधाएँ) को अपनी प्रतिभा से समृद्ध किया है। कुछ नवीन गद्य विधाओं को जन्म देने का श्रेय भी उन्हें है, जिन्हें उन्होंने ‘अंतःप्रक्रिया’, ‘लॉग बुक’ और ‘टीप’ आदि कहा है। ये ‘डायरी’ विधा के निकट हैं, मगर उनसे भिन्न और नवीन। इस प्रसंग में मुझे यह भी कहना चाहिए कि हिंदी की साहित्यिक भाषा को जितने नए शब्द अज्ञेय ने दिए हैं, उनके किसी समकालीन लेखक ने नहीं दिए। यह एक ऐसा रेखांकित करने योग्य कार्य है, जिसे कोई महान् लेखक ही कर पाता है। वस्तुतः अज्ञेय हिंदी के एक युग-प्रवर्तक साहित्यकार हैं। उन्होंने अनेक रूपों में छायावादोत्तर हिंदी साहित्य की मुख्यधारा को प्रभावित किया है तथा उसे नई दिशाओं की ओर प्रेरित और संचालित भी किया है।
अज्ञेय का जितना बड़ा योगदान रचना और चिंतन के क्षेत्र में है, उतना ही या उससे थोड़़ा ही कम हिंदी पत्रकारिता को समृद्ध करने और अपने समय में एक साहित्यिक वातावरण निर्मित करने वाले व्यक्तित्वसंपन्न लेखक के रूप में। उन्होंने न केवल स्वयं लिखा, बल्कि प्रतिभावान लेखकों की एक पूरी पीढ़ी को मंच देने और सामने लाने का प्रयास किया। 
आज हिंदी के एक बड़े और वास्तविक पाठक-वर्ग में अज्ञेय प्रतिष्ठित हैं और उन पर लिखा भी कम नहीं गया है, जिसका प्रमाण है यह पुस्तक।

Vishwanath Prasad Tiwari

विश्वनाथ प्रसाद तिवारी
जन्म : 1940 ई०, कुशीनगर जनपद के एक गांव रायपुर भैंसही-भेडिहारी, (उ०प्र०) ।
पद : गोरखपुर विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग से आचार्य एवं अध्यक्ष पद से 2001 ई० में अवकाश ग्रहण ।
प्रकाशित पुस्तकें : 'आधुनिक हिंदी कविता', 'समकालीन हिंदी कविता', 'रचना के सरोकार', 'कविता क्या है' , 'गद्य के प्रतिमान', 'आलोचना के हाशिए पर' (आलोचना); 'चीजों को देखकर', 'साथ चलते हुए', बिस्तर दुनिया के लिए', आखर अनंत', 'फिर भी कुछ रह जाएगा' (कविता-संस्मरण); 'आत्म की धरती', 'अंतहीन आकाश' (यात्रा-संस्मरण); 'एक नाव के यात्री' (लेखक के संस्मरण); 'मेरे साक्षात्कार' (साक्षात्कार)।
विदेश यात्राएँ : इंग्लैंड, मॉरिशस, रूस, नेपाल, अमेरिका, नीदरलैंड, जर्मनी, फ्रांस, लक्जमबर्ग, बेल्जियम, चीन, थाईलैंड ।
पुरस्कार : बिड़ला फाउंडेशन, दिल्ली द्वारा 2010 का 'व्यास' सम्मान, उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान द्वारा वर्ष 2007 में 'हिंदी गौरव' सम्मान, उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान द्वारा वर्ष 2000 में 'साहित्य भूषण' सम्मान, भारत मित्र संगठन, मास्को, रूस द्वारा बर्ष 2003 में 'पुश्किन' सम्मान, 'दस्तावेज' पत्रिका को उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान द्वारा वर्ष 1988 और 1995 में 'सरस्वती' सम्मान ।
संपादन : गोरखपुर से 'दस्तावेज' साहित्यिक त्रैमासिक पत्रिका का संपादन । यह पत्रिका रचना और आलोचना को विशिष्ट पत्रिका है, जो 1978 से अब तक नियमित निकल रही है ।
अनुवाद : अनेक देशी-विदेशी भाषाओं में रचनाओं के अनुवाद हुए हैं । रूसी, नेपाली, अंग्रेजी, मलयालम, पंजाबी, मराठी, बंगला, उर्दू आदि में भी रचनाएं अनूदित ।
संप्रति : उपाध्यक्ष, साहित्य अकादेमी, नई दिल्ली ।

Scroll