Kavi Ne Kaha : Vishwanath Prasad Tiwari

Vishwanath Prasad Tiwari

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  • Year: 2012

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 9789381467251

कवि ने कहा : विश्वनाथ प्रसाद तिवारी
मेरी कविताओं में ऐसे शब्द, बिंब या प्रतीक अधिक हैं जो भोगते हुए या जूझते हुए मनुष्य से संबंधित है । मैं गरीब देहाती दुनिया से जाया हुं और मेरे शुरू के बीस वर्ष उस अनाथ साधनहीन मनुष्य के बीच गुजरे जिसे बार-बार अपमानित होते, यातनाएं सहते देखा है । मेरी कविताओं में 'हत्या' और उससे मिलती-जुलती शब्दावली में जो आतंक है, वह मेरे बालमन पर पडे प्रभावों की ही प्रतिक्रिया है । मेरी कविताओं में 'अंधकार' और 'रात' के बिंब भी अधिक हैं जो एक अनार मेरे अकेलेपन की अतृप्ति को व्यक्त करते है तो दूसरी खार उस अंधकारमय दबाव को जिसे आज का साधनहीन मनुष्य भोग रहा है । मेरी कविताओं में पहाडी परिवेश अधिक मिलेगा । पहाड़ के प्रति मेरा गहरा आकर्षण है और मृत्यु-भय से आतंकित होते हुए भी मैंने पहाडी यात्राएं बहुत की हैं । हिमालय का परिवेश मेरी प्रेम कविताओं में कहीँ-कहीं प्रेमिका के साथ एकाकार हो गया है । कुछ शब्दों के सदंर्भ से प्रयोक्ता और ग्रहीता के अर्थों में अंतर स्वाभाविक है । अपनी कविताओं के प्रसंग में कहूं तो उनमें 'इतिहास', 'धारा', 'अंधकार', 'घाटी', 'जंगल', 'पहाड़' आदि अनेक शब्द अपना विशिष्ट अर्थ रखते है ।
'बेहतर दुनिया के लिए' और 'आखर अनंत' नामक संग्रहों की बहुत-सी समीक्षाएं प्रकाशित हो चुकी है । इन संग्रहों के बारे में अपनी ओर से सिर्फ इतना कहना चाहता हूं कि इनमें मेरी रचनात्मक भाषा  परित्कृत हुई है और कविताओं को एक व्यापक परिप्रेक्ष्य मिला है । आत्मीय का भी और लोक का भी ।

Vishwanath Prasad Tiwari

विश्वनाथ प्रसाद तिवारी
जन्म : 1940 ई०, कुशीनगर जनपद के एक गांव रायपुर भैंसही-भेडिहारी, (उ०प्र०) ।
पद : गोरखपुर विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग से आचार्य एवं अध्यक्ष पद से 2001 ई० में अवकाश ग्रहण ।
प्रकाशित पुस्तकें : 'आधुनिक हिंदी कविता', 'समकालीन हिंदी कविता', 'रचना के सरोकार', 'कविता क्या है' , 'गद्य के प्रतिमान', 'आलोचना के हाशिए पर' (आलोचना); 'चीजों को देखकर', 'साथ चलते हुए', बिस्तर दुनिया के लिए', आखर अनंत', 'फिर भी कुछ रह जाएगा' (कविता-संस्मरण); 'आत्म की धरती', 'अंतहीन आकाश' (यात्रा-संस्मरण); 'एक नाव के यात्री' (लेखक के संस्मरण); 'मेरे साक्षात्कार' (साक्षात्कार)।
विदेश यात्राएँ : इंग्लैंड, मॉरिशस, रूस, नेपाल, अमेरिका, नीदरलैंड, जर्मनी, फ्रांस, लक्जमबर्ग, बेल्जियम, चीन, थाईलैंड ।
पुरस्कार : बिड़ला फाउंडेशन, दिल्ली द्वारा 2010 का 'व्यास' सम्मान, उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान द्वारा वर्ष 2007 में 'हिंदी गौरव' सम्मान, उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान द्वारा वर्ष 2000 में 'साहित्य भूषण' सम्मान, भारत मित्र संगठन, मास्को, रूस द्वारा बर्ष 2003 में 'पुश्किन' सम्मान, 'दस्तावेज' पत्रिका को उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान द्वारा वर्ष 1988 और 1995 में 'सरस्वती' सम्मान ।
संपादन : गोरखपुर से 'दस्तावेज' साहित्यिक त्रैमासिक पत्रिका का संपादन । यह पत्रिका रचना और आलोचना को विशिष्ट पत्रिका है, जो 1978 से अब तक नियमित निकल रही है ।
अनुवाद : अनेक देशी-विदेशी भाषाओं में रचनाओं के अनुवाद हुए हैं । रूसी, नेपाली, अंग्रेजी, मलयालम, पंजाबी, मराठी, बंगला, उर्दू आदि में भी रचनाएं अनूदित ।
संप्रति : उपाध्यक्ष, साहित्य अकादेमी, नई दिल्ली ।

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