Kavi Ne Kaha : Rajesh Joshi

Rajesh Joshi

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  • Year: 2012

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 9789381467237

कवि ने कहा : राजेश जोशी
राजेश जोशी अपने अनुभव को कविता में सिरजते वक्त शोकगीत की लयात्मकता नहीं छोड़ते । लय उनकी कविताओं में अत्यंत सहज भाव से आती है जैसे कोई कुशल सरोदवादक धीमी गति में आलाप द्वारा भोपाल राग का विस्तार कर रहा हो । इस दृष्टि से राजेश जोशी के शिल्प को एक सांगीतिक संरचना कहा जा सकता है । वे स्थानीयता के रंग में डूबकर भी कविता के सार्वजनिक प्रयोजनों को रेखांकित करते हैं । उनकी कविता अपने उत्कृष्ट रूप में एक शहर की कविता होते हुए भी मनुष्य के व्यापक संकट का बयान है । -ऋतुराज़
समकालीन हिंदी कविता में राजेश जोशी की उपस्थिति एक दिलेर उपस्थिति है-कविता लिखना और उसके लिए लड़ना भी । उनमें एक काव्य व्यक्तित्व भी है, जो कविताएं लिखने वाल कई कवियों में नहीं भी हुआ करता है । उनकी यह उपस्थिति एक लोकतांत्रिक उपस्थिति है, जहां आप ढेर सारा संवाद कर सकते हैं।
राजेश जोशी की कविता में एक टूट-फूट और संगीत का अवसाद है, लेकिन उठ खड़े होने की कोई मूलगामी संरचना भी  है । पस्ती का महिमामंडन नहीं है और पराजय में पराजित की उधेड़बुन नहीं है । इसलिए कौन-सी भंगिमा कब प्रतिकार में बदल जाएगी और एक कॉस्मिक रुप अख्तियार कर लेगी कोई नहीं जानता । तो साधारण की, पिछडे हुए की, मिटा दिए गए की, भुला दिए गए की, विजय होगी ऐसा कोई यूटोपियाई प्रतिवाद उनमें निरंतर मिलता  है। तो नैतिक श्रेष्ठता में विश्वास कभी खंडित नहीं होता।

Rajesh Joshi

राजेश जोशी
जन्म  : 18 जुलाई, 1946, नरसिंहगढ़ (म०प्र०)
शिक्षा : एम०एस-सी० (प्राणिशास्त्र), एम०ए० (समाज-शास्त्र)
प्रकाशित कृतियाँ : 'समरगाथा' (लंबी कविता), 'एक दिन बोलेंगे पेड़', 'मिट्टी का चेहरा', 'नेपथ्य में हंसी', 'दो पंक्तियों के बिच', 'चांद की वर्तनी’ (कविता-संग्रह); 'गेंद निराली मोठू की' (बच्चों के लिए कविताएँ); 'सोमवार और अन्य कहानियां', ‘कपिल का पेड़' (कहानी-संग्रह); 'जादू जंगल', 'अच्छे आदमी' (रेणु की कहानी पर आधारित नाटक) 'पांसे', 'तुम सआदत हसन मंटो हो', 'कहन कबीर', 'सपना मेरा यही सखी', 'ब्रह्मराक्षस का नाई' (बच्चों के लिए नाटक), 'टंकारा का गाना', 'तुक्के  पर तुक्का' (नाटक, बंसी कौल के साथ सह-लेखन), 'हमेँ जवाब चाहिए' (नुक्कड़ नाटक); 'पतलून पहिना बादल' (मायकोवस्की की कविताओं का अनुवाद), 'भूमि का कल्पतरु यह' (भर्तृहरि की कविताओं की अनुरचना); 'एक कवि की नोटबुक', 'एक कवि की दूसरी नोटबुक : समकालीनता और साहित्य' (आलोचना); 'नागार्जुन संचयन', त्रिलोचन का कविता-संग्रह 'ताप के ताए हुए दिन', शरद बिल्लौरे का कविता-संग्रह 'तय तो यही हुआ था' तथा नाटक 'अमरू का कुर्ता', वर्तमान साहित्य के कविता अंक, 'नया पथ का निराला शताब्दी अंक', 'इसलिए' पत्रिका का कुछ वर्ष तक प्रकाशन तथा संपादन, गुजरात के सांप्रदायिक दंगों के विरूद्ध लिखी गई टिप्पणियों का चयन : 'तीसरी आवाज' (संपादित पुस्तकें)।
सम्मान : साहित्य अकादेमी पुरस्कार (2002) के साथ ही मुक्तिबोध पुरस्कार (1978), माखनलाल चतुर्वेदी पुरस्कार (1985), श्रीकांत वर्मा स्मृति सम्मान (1986), शमशेर सम्मान (1996), पहल सम्मान (1998), शिखर सम्मान (2002) ।

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