Kavi Ne Kaha : Leeladhar Mandloyi

Leeladhar Mandloi

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  • Year: 2008

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 9788189859879

कवि ने कहा : लीलाधर मंडलोई
लीलाधर मंडलोई अपनी पीढ़ी के उन थोड़े-से कवियों से अग्रणी हैं, जिन्होंने अपने समय के वैचारिक दिभ्रमों से जूझते हुए, कविता के वृहत्तर सरोकार को बचाए रखने का उपक्रम किया है । पिछले तीस-बत्तीस वर्षों की काव्ययात्रा में उनका एक अलग स्वर उभरकर आया है ।
हिंदी कविता में किसान चेतना की व्यापकता तो देखी जा सकती है, मगर मज़दूरों, खासकर औद्योगिक मज़दूरों की उपस्थिति सांकेतिक ही रही है । मंडलोई शायद पहली बार उसके जीवन-संघर्ष को, उसकी 'सफ़रिंग' को, उसकी करुणा को अपनी कविता में दर्ज करने में सफल हुए हैं । वे अपने बचपन को याद करते हुए मध्यप्रदेश की कोयला खदानों के उस यथार्थ को सामने लाते हैं जो श्रमिक संगठनों के दस्तावेजो तक में शामिल नहीं है । अपने जीवन के सच को समय के सच से जोड़ देने की कला की व्याप्ति उनकी अन्य कविताओं में भी देखी जा सकती है । अंदमान की जनजातियों के जीवन संघर्ष को पहली बार कविता में लाने का श्रेय भी उन्हें जाता है ।
लीलाधर मंडलोई की कविताओं में प्रकृति और स्त्री की अपनी खास जगह है । वे केवल नैसर्गिक सौंदर्य का ही उदघाटन नहीं करते हैं, बल्कि उन कठोर सच्चाइयों को भी सामने लाते है जिनसे उनके समकालीन कवि प्राय: बचना चाहते हैं । उन्होंने कुछ ऐसी मार्मिक कविताएं भी लिखी हैं  जो हमारी संवेदना का विस्तार करती हैं । प्रसंग चाहे अपने कुत्ते के खो जाने का हो अथवा पत्नी द्वारा मोहल्ले की उस कुतिया को रोटी खिलाने का, जो मां बनने वाली है-वे छीजती हुई संवेदना के इस कठिन दोर से भी मनुष्यता के बचे होने की गाथा ही नहीं रचते, अपनी कलात्मकता से पाठको को भी उसमें शामिल कर लेते हैं
ध्यान देने की बात है कि उनकी मार्मिक कविताएं भी हमें हताश नहीं करती, बल्कि जीवन की जद्दोजहद से और डूबने की प्रेरणा देती हैं । वे निराशा और मृत्यु के कवि नहीं हैं । उनकी कविता जीने और जीतने की हमारी इच्छा को मज़बूत करती है, दुखों से लड़ते हुए जीवन की सुंदरता को पहचानने की दृष्टि देती है 

Leeladhar Mandloi

लीलाधर मंडलोई
किताबें : कविता-संग्रह-'घर-घर घूमा, 'रात-बिरात’, 'मगर एक आवाज' , 'काल बाँका तिरछा', 'देखा-अनदेखा' (चयन), 'क्षमायाचना', 'उपस्थित है समुद्र' (हिंदी और रूसी में चयन); गद्य कृतियाँ - 'कविता का तिर्यक' (आलोचना) 'अर्थजल' निबंध), 'काला पानी' (यात्रा-वृत्तांत), 'दाना पानी' (डायरी); अनुवाद-शकेब जलाली की ग़ज़लों का लिप्यंतरण' (मंजूर  एहतेशाम के साथ), 'अनातोली परम्परा की रूसी कविताएं' (अनिल जनविजय के साथ); विविध - 'अंदमान निकोबार की लोककथाएँ' (दो भागों में), 'बच्चों के लिए किताबें' (कहानियाँ), 'कविता के सौ  बरस’ (आलोचना : संपादन), 'नारी मुक्ति का स्वप्न' (स्त्री विमर्श : संपादन), 'बुंदेली लोकरागिनी' (बुंदेली  गीतों का चयन)
सम्मान : पुश्किन सम्मान (अंतरराष्ट्रीय), रजा सम्मान (राष्ट्रीय), शमशेर सम्मान (राष्ट्रीय), नागार्जुन सम्मान (राष्ट्रीय), रामविलास शर्मा सम्मान (राज्य स्तरीय), दुष्यंत अलंकरण (राष्ट्रीय), वागीश्वरी सामान (राज्य स्तरीय), कृति सम्मान 'दिल का किस्सा' के लिए, हिंदी अकादमी, दिल्ली।
विशेष : फिल्म की पटकथा, फिल्म निर्माण और निर्देशन भी-मुक्तिबोध, परसाई, श्रीकांत वर्मा, चेखव, कुमार गंधर्व आदि की कृतियों पर केंद्रित।
अंतरराष्ट्रीय पुस्तक मेला, जर्मनी में भारत के लेखक के रूप में प्रतिनिधित्व।

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