Kavi Ne Kaha : Katyayani

Katyayani

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  • Year: 2012

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 9789381467190

कवि ने कहा: कात्यायनी
मेरे लिए, कविता सर्वोपरि तौर पर, बुनियादी तौर पर, बिम्बों का एक पूरा संसार है, उनका विधान है।
हमें कविता का कच्चा माल लाना होता है--दो खदानों से--स्मृतियों और कल्पना की खदानों से।
सवाल यह उठता है कि वहाँ तक पहुँचें कैसे? इसके लिए उस खौलते हुए तरल धातु की नदी में उतरना होता है जो हमारे आसपास की ज़िन्दगी है--अपूर्ण कामनाओं-लालसाओं, विद्रोहों, हारों-जीतों, कामयाबियों-नाकाम-याबियों से भरी हुई, कोमल-कठोर, सुन्दर-असुन्दर के द्वन्द्वात्मक संघातों से उत्तप्त, गतिमान। हम इस नदी में उतरते हैं, वे ठोस नहीं होतीं। वे ऊर्जा जैसी होती हैं। उन्हें हम बिम्बों में रूपान्तरित करके कविता में उतारते हैं तो वे ठोस, वस्तुगत यथार्थ बन जाती हैं। यह ऊर्जा को पदार्थ में बदलने का कविता का अपना भौतिकशास्त्रीय विधान है, जिसे सिर्फ़ सच्चे कवि ही समझते हैं।

Katyayani

कात्यायनी
जन्म: 7 मई, 1959, गोरखपुर (उ० प्र०)। 
शिक्षा: एम० ए०  (हिंदी), एम० फिल्० ।
निम्नमध्यवर्गीय परिवार में जन्म। परंपरा तोड़कर प्रेम और विवाह एक सांस्कृतिक-राजनीतिक कार्यकर्ता से। 1980 से सांस्कृतिक-राजनीतिक सक्रियता। 1986 से कविताएं लिखना और वैचारिक लेखन प्रारंभ। कुछ वर्षों तक अंशकालिक पत्रकारिता भी।
हिंदी की लगभग सभी प्रमुख पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित। अंग्रेजी, जर्मन और स्पेनिश में कविताएं अनूदित। मराठी, पंजाबी, गुजराती, मैथिल में भी अनूदित-प्रकाशित।
प्रकाशित कृतियां: ‘चेहरों पर आंच’, ‘सात भाइयों के बीच चंपा’, ‘इस पौरुषपूर्ण समय में’, ‘जादू नहीं कविता’, ‘राख-अंधेरे की बारिश में’, ‘फुटपाथ पर कुसी’ (कविता-संकलन); ‘दुर्ग द्वार पर दस्तक’, ‘षड्यंत्ररत मृतात्माओं के बीच’, ‘कुछ जीवंत कुछ ज्वलंत’, ‘प्रेम, परंपरा और विद्रोह’ (स्त्री-प्रश्न, समाज, संस्कृति और साहित्य पर केंद्रित निबंधों के संकलन)।

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