Dus Pratinidhi Kahaniyan : Usha Priyamvada

Usha Priyamvda

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  • Year: 2016

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 9789382114390

'दस प्रतिनिधि कहानियाँ' सीरीज़ किताबघर प्रकाशन की एक महत्त्वाकांक्षी कथा-योजना है, जिसमें हिन्दी कथा-जगत् के सभी शीर्षस्थ कथाकारों को प्रस्तुत किया जा रहा है ।
इस सीरीज़ में सम्मिलित कहानीकारों से यह अपेक्षा की गई है कि वे अपने संपूर्ण कथा-दौर से उन दस कहानियों का चयन करें, जो पाठको, समीक्षकों तथा संपादकों के लिए मील का पत्थर रही हों तथा ये ऐसी कहानियाँ भी हों, जिनकी वजह से उन्हें स्वयं को भी कहानीकार होने का अहसास बना रहा हो। भूमिका-स्वरूप कथाकार का एक वक्तव्य भी इस सीरीज़ के लिए आमंत्रित किया गया है, जिसमें प्रस्तुत कहानियों को प्रतिनिधित्व सौंपने की बात पर चर्चा करना अपेक्षित रहा है ।
किताबघर प्रकाशन गौरवान्वित है कि इस सीरीज़ के लिए सभी कथाकारों का उसे सहज सहयोग मिला है। इस सीरीज़ के महत्त्वपूर्ण कथाकार उषा प्रियंवदा ने प्रस्तुत संकलन में अपनी जिन दस कहानियों को प्रस्तुत किया है, वे हैं : 'जिंदगी और गुलाब के फूल', 'वापसी', 'छुट्टी का दिन', 'जाले', 'एक कोई दूसरा', 'झूठा दर्पण', 'सागर पार का संगीत', 'चांदनी में बर्फ पर', 'शून्य' तथा 'आधा शहर' ।
हमें विश्वास है कि इस सीरीज़ के माध्यम से पाठक सुविख्यात लेखक उषा प्रियंवदा की प्रतिनिधि कहानियों को एक ही जिल्द में पाकर सुखद पाठकीय संतोष का अनुभव करेंगें

Usha Priyamvda

उषा प्रियंवदा

शिक्षा : इलाहाबाद विश्वविद्यालय से अंग्रेजी साहित्य में पी-एच.डी., इंडियाना यूनिवर्सिटी-ब्लूमिंगटन, अमेरिका में तुलनात्मक साहित्य में दो वर्ष पोस्ट- डॉक्टरल अध्ययन शोध । अध्यापन के प्रथम तीन वर्ष दिल्ली के लेडी श्रीराम कॉलेज, तदुपरांत इलाहाबाद विश्वविद्यालय में दो वर्ष बिताने के बाद, विस्कांसिन विश्वविद्यालय मेडिसन के दक्षिण एशियाई विभाग में प्रोफेसर रहीं । उषा प्रियंवदा हिंदी और अंग्रेजी, दोनों ही भाषाओं में समान रूप से दक्ष है ।
प्रकाशित पुस्तकें:- उपन्यास : पचपन खंभे लाल दीवारें, रुकोगी नहीं राधिका, शेष यात्रा, अंतर-वंशी, क्या कबीर उदास, नदी । कहानी संग्रह : फिर बसंत आया, जिन्दगी और गुलाब के फूल, एक कोई दूसरा, कितना बड़ा झूठ, मेरी प्रिय कहानियां, शून्य एवं अन्य रचनाएं तथा संपूर्ण कहानियां ।भारतीय साहित्य, लोककथाओं एवं मध्यकालीन भक्ति-काव्य पर अंग्रेजी में अनेक लेख । मीराबाई और सूरदास के अंग्रेजी अनुवाद साहित्य अकादेमी, नई दिल्ली से ।
इंडियन स्टडीज़ विभाग से संलग्न रहते हुए 1977 में उन्हें 'प्रोफ़ेसर ऑफ़ इंडियन लिटरेचर' का पद मिला । 2002 में अवकाश ग्रहण किया ।

संप्रति : लेखन और अध्ययन।

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