Dus Pratinidhi Kahaniyan : Upendranath Ashq

Upender Nath Ashq

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  • Year: 2009

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 9788170162131

'दस प्रतिनिधि कहानियाँ' सीरीज़ 'किताबघर' की एक महत्त्वाकांक्षी कथा-योजना है, जिसमें हिन्दी कथा-जगत् के सभी शीर्षस्थ कथाकारों को प्रस्तुत किया जा रहा है ।
इस सीरीज़ में सम्मिलित कहानीकारों से यह अपेक्षा की गई है कि वे अपने संपूर्ण कथा-दौर से उन दस कहानियों का चयन करें जो पाठको, समीक्षकों तथा संपादकों के लिए मील का पत्थर रही हों तथा ये ऐसी कहानियाँ भी हों जिनकी वजह से उन्हें स्वयं को भी कहानीकार होने का अहसास बना रहा हो। भूमिका-स्वरूप कथाकार का एक वक्तव्य भी इस सीरीज़ के लिए आमंत्रित किया गया है, जिसमें प्रस्तुत कहानियों को प्रतिनिधित्व सौंपने की बात पर चर्चा करना अपेक्षित रहा है ।
'किताबघर' गौरवान्वित है कि इस सीरीज़ के लिए अग्रज कथाकारों का उसे सहज सहयोग मिला है। इस सीरीज़ के अत्यन्त महत्त्वपूर्ण कथाकार उपेन्द्रनाथ अश्क ने प्रस्तुत संकलन में अपनी जिन दस कहानियों को प्रस्तुत किया है, वे हैं : 'पलंग', 'आकाशचारी', 'काकड़ां का तेली', 'उबाल', 'मि० घटपाण्डे', 'बैंगन का पौधा', 'डाची', 'पिजरा', 'काले साहब' और  'अजगर' ।
हमें विश्वास है कि इस सीरीज़ के माध्यम से पाठक सुविख्यात कथाकार उपेन्द्रनाथ अश्क की प्रतिनिधि कहानियों को एक ही जिल्द में पाकर सुखद पाठकीय संतोष का अनुभव करेंगें ।

Upender Nath Ashq

उपेन्द्रनाथ अश्क

जन्म  : 14 दिसंबर, 1910
जन्म-स्थान : जालंधर (पंजाब)

पिता पंडित माधोराम स्टेशन मास्टर थे और माँ श्रीमती वासंती देवी एक धर्मपरायण, प्रबल इच्छा-शक्ति-सम्पन्न महिला थीं। अश्क के संवेदनशील मन-मस्तिष्क पर अपने माता-पिता की अमिट छाप पड़ी । बचपन गरीबी और अभावों से बीता । पारिवारिक वातावरण और आसपास के निम्नमध्यवर्गीय समाज से अश्क को अपनी रचनाओं के लिए सामग्री और दृष्टि, दोनों मिलीं, जिसके बल पर उन्होंने इस वर्ग का अप्रतिम चित्रण अपनी रचनाओं से किया।
अपने जीवन से अश्क का कार्य-क्षेत्र बहुत व्यापक रहा-अध्ययन, पत्रकारिता, वकालत, रेडियो, फिल्म, रंगमंच और प्रकाशन, लेकिन 1948 में यक्ष्मा से रोगमुक्त होने के बाद उन्होंने स्वतंत्र लेखन को ही आजीविका का साधन बनाया ।
अश्क जी की पहली रचना 1926 से प्रकाशित हुई । अपने लंबे साहित्यिक जीवन में उन्होंने सौ से अधिक पुस्तकें लिखीं । साहित्य की हर विधा में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया। उन्हें 1965 से केंद्रीय संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार तथा 1972  में सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

स्मृति-शेष : 19 जनवरी, 1996

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