Dus Pratinidhi Kahaniyan : Kashi Nath Singh

Kashi Nath Singh

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  • Year: 2012

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 9788170162186

'दस प्रतिनिधि कहानियाँ' सीरीज़ किताबघर प्रकाशन की एक महत्त्वाकांक्षी कथा-योजना है, जिसमें हिन्दी कथा-जगत के सभी शीर्षस्थ कथाकारों को प्रस्तुत किया जा रहा है ।
इस सीरीज़ में सम्मिलित कहानीकारों से यह अपेक्षा की गई है कि वे अपने संपूर्ण कथा-दौर से उन दस कहानियों का चयन करें, जो पाठको, समीक्षकों तथा संपादकों के लिए मील का पत्थर रही हों तथा ये ऐसी कहानियाँ भी हों, जिनकी वजह से उन्हें स्वयं को भी कहानीकार होने का अहसास बना रहा हो। भूमिका-स्वरूप कथाकार का एक वक्तव्य भी इस सीरीज़ के लिए आमंत्रित किया गया है, जिसमें प्रस्तुत कहानियों को प्रतिनिधित्व सौंपने की बात पर चर्चा करना अपेक्षित रहा है ।
किताबघर प्रकाशन गौरवान्वित है कि इस सीरीज़ के लिए सभी कथाकारों का उसे सहज सहयोग मिला है। इस सीरीज़ के महत्त्वपूर्ण कथाकार काशीनाथ सिंह  ने प्रस्तुत संकलन में अपनी जिन दस कहानियों को प्रस्तुत किया है, वे हैं : 'कविता की नई तारीख', 'अपना रास्ता लो बाबा', 'जंगलजातकम', 'माननिय होम मनिस्टर के नाम', 'वे तीन घर', 'मुसइ चा', 'सदी का सबसे का आदमी', 'लाल किले के बाज', 'सुधीर घोषाल' तथा 'कहानी सरायमोहन की'।
हमें विश्वास है कि इस सीरीज़ के माध्यम से पाठक सुविख्यात लेखक काशीनाथ सिंह की प्रतिनिधि कहानियों को एक ही जिल्द में पाकर सुखद पाठकीय संतोष का अनुभव करेंगें ।

Kashi Nath Singh

काशीनाथ सिंह जन्म : बनारस जिले के जीयनपुर जाय में 1 जनवरी, 1937 । शिक्षा : आरंभिक शिक्षा गाँव के पास के विद्यालयों में । काशी हिंदू विश्वविद्यालय से हिंदी में एम.ए. ('59) और पी-एच. डी. ('63) । काशी हिंदू विश्वविद्यालय में 'हिंदी भाषा का ऐतिहासिक व्याकरण' कार्यालय में शोध-सहायक ('62-'64) । '65 से वहीं के हिंदी विभाग में प्राध्यापक, फिर प्रोफेसर एवं अध्यक्ष पद से '97 में सेवा मुक्त । प्यारी कहानी 'संकट' कृति पत्रिका (सितंबर, 1960) में प्रकाशित । प्रकाशित जूतियाँ : लोग बिस्तरों पर, सुबह का डर, आदमीनामाँ, नई तारीख, सदी का सबसे बड़ा आदमी, कल की फटेहाल कहानियां, प्रतिनिधि कहानियां, दस प्रतिनिधि कहानियां, कहनी उपखान, (कहानी-संग्रह) घोआस (नाटक); हिंदी में संयुक्त क्रियाएं (शोध); आलोचना भी रचना है (समीक्षा); अपना मोर्चा, काशी का अस्सी, रेहन पर रंग्घू (उपन्यासा); याद हो कि न याद हो, आछे दिन पाछे गए, घर का जोगी जोगड़ा (संस्मरण); काशी के नाम (नामवर के पत्र)। अपना मोर्चा का जापानी एवं कोरियाई भाषाओं से अनुवाद । जापानी में कहानियों का अनुमित संग्रह। कई कहानियों के भारतीय और अन्य विदेशी भाषाओं में अनुवाद । उपन्यास और कहानियों की रंग-प्रस्तुतियाँ । 'तीसरी दुनिया' के 'लेखकों-संस्कृति-कर्मियों के सम्मेलन' के सिलसिले में जापान-बयात्रा (नवंबर, ‘81 ) । सम्मान : कथा सम्मान, समुच्चय सम्मान, शरद जोशी सम्मान, प्ताहित्य भूषण सम्मान, साहित्य अकादेमी पुरस्कार। संप्रति : बनारस में रहकर स्वतंत्र लेखन ।

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