Dus Pratinidhi Kahaniyan : Jainendra Kumar

Jainendra Kumar

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  • Year: 2015

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 9789385054068

जैनेन्द्र कुमार

'दस प्रतिनिधि कहानियाँ' सीरीज़ किताबघर प्रकाशन की एक महत्त्वाकांक्षी कथा-योजना है, जिसमें हिन्दी कथा-जगत् के सभी शीर्षस्थ कथाकारों को प्रस्तुत किया जा रहा है ।

इस सीरीज़ में सम्मिलित कहानीकारों से यह अपेक्षा की गई है कि वे अपने संपूर्ण कथा-दौर से उन दस कहानियों का चयन करें, जो पाठको, समीक्षकों तथा संपादकों के लिए मील का पत्थर रही हों तथा ये ऐसी कहानियाँ भी हों, जिनकी वजह से उन्हें स्वयं को भी कहानीकार होने का अहसास बना रहा हो। भूमिका-स्वरूप कथाकार का एक वक्तव्य भी इस सीरीज़ के लिए आमंत्रित किया गया है, जिसमें प्रस्तुत कहानियों को प्रतिनिधित्व सौंपने की बात पर चर्चा करना अपेक्षित रहा है ।

किताबघर प्रकाशन गौरवान्वित है कि इस सीरीज़ के लिए सभी कथाकारों का उसे सहज सहयोग मिला है। इस सीरीज़ के महत्त्वपूर्ण कथाकार जैनेन्द्र कुमार ने प्रस्तुत संकलन में अपनी जिन दस कहानियों को प्रस्तुत किया है, वे हैं : 'फांसी', 'पाजेब, 'फोटोग्राफी', 'मास्टर जी', 'अपना-अपना भाग्य', 'जाह्नवी', 'एक रात', 'साधु की हठ', 'नीलम देश की राजकन्या' तथा 'चलित-चित'  ।

हमें विश्वास है कि इस सीरीज़ के माध्यम से पाठक सुविख्यात लेखक जैनेन्द्र कुमार की प्रतिनिधि कहानियों को एक ही जिल्द में पाकर सुखद पाठकीय संतोष का अनुभव करेंगें ।

Jainendra Kumar

जैनेन्द्र कुमार


जन्म : 2 जनवरी, 1905

1919 में पंजाब से मैट्रिक की परीक्षा उतीर्ण की । 1920 से  स्वतंत्रता संग्राम के आन्दोलनों में भाग लेना प्रारंभ । 1923  में  ऐतिहासिक झंडा सत्याग्रह में प्रतिभागिता के कारण तीन माह का कारावास । इसी वर्ष से लेखनारंभ । 'देश जाग उठा था' शीर्षक से लिखा लेख 'देवी अहिंसे' नाम से चर्चित हुआ। 1929 में प्रथम कहानी संग्रह 'फांसी' और प्रथम उपन्यास 'परख' प्रकाशित । 1946 में राजनीतिक सक्रियता से विराग एवं सर्वतोभावेन लेखन व चिंतन को समर्पित । साहित्य अकादेमी की स्थापना (1954) पर पंडित जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में बनी प्रथम उच्चस्तरीय समिति में शामिल
प्रमुख रचनाएँ : परख, सुनीता, त्यागपत्र, कल्याण, सुखदा, विवर्त जयवर्धन, मुक्तिबोध, अनाम स्वामी, दशार्क (उपन्यास) ; फांसी, अपना-जपना भाग्य, नीलम देश की राजकन्या, जाह्नवी, साधु की हठ, अभागे लोग, दो सहेलियां, महामहिम (कहानी-संग्रह); समय और हम, समय समस्या और सिद्धांत, काम प्रेम और परिवार, पूर्वोदय, मंथन, साहित्य का श्रेय और प्रेय, वृत्त विहार (निबंध व विचार संग्रह); राष्ट्र और राज्य, कहानी-आनुभव और शिल्प, बंगला देश का यक्ष प्रश्न, इतस्तत: (ललित निबंध व संस्मरण); मेरे भटकाव, स्मृति पर्व, कश्मीर की वह यात्रा, विहंगावलोकन (अन्यान्य निंबध)
'मुक्तिबोध' उपन्यास पर साहित्य अकादेमी सम्मान ( 1968) । 1971 में भारत सरकार द्वारा पद्मभूषण  । साहित्य अकादेमी की 'महत्तर सदस्यता' तथा 'अणुव्रत सम्मान' से विभूषित (1982) । 1984 में उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान का सर्वोच्च सम्मान 'भारत भारती'

स्मृति-शेष : 24 दिसंबर, 1988

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