Vaksh Shila

Sunil Gangopadhyaya

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  • Year: 1999

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 9788170164371

वक्ष-शिला
'वक्ष-शिला' पढ़ने का अर्थ है एक पुरे इतिहास से गुजरना । सातवें दशक  में पश्चिम बंगाल, बिहार आदि राज्यों में नक्सलवाद की जो तीव्र आंधी, चली थी, उसमें जिस तरह हजारों युवकों को बलि चढी थी, उसका साक्षी इतिहास है और उस इतिहास का एक अंश है यह उपन्यास । प्रसिद्ध बांग्ला क्याकार सुनील गंगोपाध्याय ने उस समय को, उस काल की स्थितियों को, युवा मन की भावनाओं को, राजनीति को लेकर इस उपन्यास का जो रोचक ताना-बाना बुना है, वह अदभुत है । यह उपन्यास प्रमाणित करता है कि एक औपन्यासिक जाते के माध्यम से किसी विशेष कालखंड को कितनी गहनता से प्रस्तुत किया जा सकता है ।
'नक्सलवाद' वैचारिक धरातल पर बहुत सारे प्रश्न छोड़ गया है, आज भी हम उन प्रश्नों के घेरे से बाहर नहीं निकले हैं, किंतु इस उपन्यास में अनेक प्रश्नों के उत्तर हमें मिल सबत्ते हैं जो उस आंदोलन को समझने में मदद करते हैं ।
अनूठी शैली, रोचक भाषा और नये धरातल पर खडी कथा के कारण यह उपन्यास अपना एक विशिष्ट प्रभाव छोड़ता है ।

Sunil Gangopadhyaya

सुनील गंगोपाध्याय
समकालीन बांग्ला लेखकों में सर्वाधिक चर्चित-प्रशंसित कथाकार, उपन्यासकार एवं कवि । जन्म 7 सितंबर, 1934, फरीदपुर (अब बांग्लादेश) में । लिखने की ललक इतनी अधिक रही कि 'नीललोहित' तथा 'सनातन पाठक' के छद्म नाम से भी लेखन किया । 'कृतिवास' नामक पत्रिका का पच्चीस वर्षों तक संपादन एवं प्रकाशन किया । 'सेई समय' नामक महाकाव्यात्मक उपन्यास के लिए वर्ष 1985 में साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित । अब तक करीब साठ पुस्तकें प्रकशित ।

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