Toro Kara Toro-4 (Nirdesh)

Narendra Kohli

Availability: In stock

Seller: KGPBOOKS

Qty:
500.00 425 + Free Shipping


  • Year: 2015

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 9788170166801

Narendra Kohli

नरेन्द्र कोहली
नरेन्द्र कोहली अपने समकालीन साहित्यकारों से पर्याप्त भिन्न है । उन्होंने प्रख्यात कथाओं पर आधृत उपन्यास लिखे हैं, किंतु वे सर्वथा मौलिक हैं । वे आधुनिक हैं, किंतु पश्चिम का अनुकरण नहीं करते। भारतीयता की जडों तक पहुँचते हैं, किंतु पुरातनपंथी नहीं हैं ।
1960 ई० में नरेन्द्र कोहली की कहानियाँ प्रकाशित होनी आरंभ हुई थीं । 1965 ई० के आसपास वे व्यंग्य लिखने लगे थे । हिंदी का व्यंग्य साहित्य इस बात का साक्षी है कि अपनी पीढ़ी में उनकी-सी मौलिकता, प्रयोगशीलता, विविधता तथा प्रखरता और कहीं नहीं है ।
नरेन्द्र कोहली ने राम-कथा से सामग्री लेकर चार खंडों में एक बृहदाकार उपन्यास लिखा 'अभ्युदय' । किसी भी भाषा में संपूर्ण राम-कथा पर लिखा गया यह प्रथम उपन्यास है ।
'अभिज्ञान' कृष्ण-कथा से संबंधित है । कथा राजनीतिक है । निर्धन और अकिंचन सुदामा को सामर्थ्यवान श्रीकृष्ण सार्वजनिक रूप से अपना मित्र स्वीकार करते हैं, तो सामाजिक, व्यवसायिक और राजनीतिक क्षेत्रों में सुदामा की साख तत्काल बढ़ जाती है ।
नरेन्द्र कोहली ने महाभारत-कथा की सामग्री से अपने उपन्यास 'महासमर' की रचना की । उन्होंने जैसे महाभारत को अपने युग में  पूर्णतः जीवंत कर दिया । उन्होंने अपने इस उपन्यास में जीवन को उसकी विराटता के साथ अत्यंत मौलिक ढंग से प्रस्तुत किया है ।
पिछले दस वर्षों में लोकप्रियता के नए कीर्तिमान स्थापित करने वाली रचना 'तोड़ो, कारा तोड़ो' नरेन्द्र कोहली की नवीनतम उपन्यास-श्रृंखला है, जिसका संबंध स्वामी विवेकानंद की जीवन-कथा से है । स्वामी विवेकानंद का जीवन निकट अतीत की घटना है । उनके जीवन की प्राय: घटनाएं सप्रमाण इतिहासांकित है । यहां उपन्यासकार के लिए अपनी कल्पना अथवा अपने चिंतन को आरोपित करने की सुविधा नहीं है । उपन्यासकार को वही कहना होगा, जो स्वामी जी ने कहा था । अपने नायक के व्यक्तित्व और चिंतन से तादात्म्य ही उसके लिए एकमात्र मार्ग है ।

Scroll