Jakadan

Mahashweta Devi

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  • Year: 2011

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 9788170166979

जकड़न
पुलिस अफसर ने काफी सहनशील ढंग से और सहानुभूति-भरी नजर से एक बार देखा । विनय के साहित्य में पुलिस कितनी क्रूर, कुटिल, निर्मम है, लेकिन अभी उनको पुलिस से कितना सदभावपूर्ण व्यवहार मिल रहा है । हालाँकि बउआ की माँ ने कहा था—तुम लोगों के घर की बात है, इसीलिए इतना कुछ हो पा रहा है बहू जी ! हम लोगों के लिए होता ? कितना कुछ घटा, लेकिन मुए थाने ने सुना कभी? अफसर कहता है, मुझे लगता है इसलिए कह रहा हूँ मैं सरकारी तौर पर नहीं कह रहा हूँ, ऐसा लगता है कि उनमें किसी बात पर झगडा हो रहा होगा, अचानक गुस्से में आकर एक पीतल की ऐशट्रै फेंककर मारी, वह जाकर नस पर लगी, उससे आपकी बेटी बेहोश होकर गिर पडी, उसके बाद... 
[इसी उपन्यास से]

Mahashweta Devi

महाश्वेता देवी
बाँग्ला की बहुप्रशंसित और बहुपुरस्कृत, यशस्वी लेखिका
जन्म : 14 जनवरी, 1926, ढाका (अब बंगलादेश)
शिक्षा : एम०ए० (अंग्रेजी साहित्य)
अन्य कार्य : आदिवासियों के लिए कल्याण-कार्यक्रमों का आयोजन
कृतियाँ : कहानी, उपन्यास, बाल-साहित्य, नाटक विधाओं से 100 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित । प्रमुख रचनाएं : 'झाँसी की रानी', 'नटी', 'हजार चौरासी की माँ', 'जंगल के दावेदार', 'अग्नि-गर्भ', 'ग्राम बांग्ला', 'टेरोडैक्टिल', 'नील छवि', 'प्रति 54 मिनट', 'आई०पी०सी० 375', 'कैवर्त खंड' आदि । 25 से अधिक रचनाएँ हिंदी तथा अन्य भारतीय भाषाओं ने अनूदित । कुछ प्रमुख रचनाएं अंग्रेजी, फ्रैंच, जापानी तथा इतालवी में अनूदित ।
'रुदाली' नामक कहानी पर इसी शीर्षक से फिल्म भी बनी ।
पुरस्कार : बाँग्ला के शरत् चंद्र चट्टोपाध्याय पदक, भुवनमोहिनी पदक, जगततारिणी पदक, अमृत पुरस्कार के साथ-साथ साहित्य अकादेमी पुरस्कार, पदमश्री से सम्मानित, वर्ष 1996 के ज्ञानपीठ पुरस्कार तथा वर्ष 1997 में एशिया के मूर्धन्य  मैगसेसे पुरस्कार से सम्मानित ।

स्मृति शेष : 28 जुलाई, 2016

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