In Sabke Baavajood

Manohar Bandhopadhyaya

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  • Year: 2010

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 9789380146393

इन सबके बावजूद
प्राइवेट कॉलेज के असुरक्षित कार्य को छोड़कर अजय एक संपन्न व्यापारी की ‘भानजी’ रति को ट्यूशन पढ़ाता है। यहाँ उसे प्रॉपर्टी डीलिंग का भी काम मिल जाता है। इस व्यापार के दाँव-पेच सीख वह रति को हथियाकर धनवान बनने के स्वप्न देखता है। इस कोशिश में वह बुरी तरह पिटता ही नहीं, अपनी जान भी खतरे में डाल देता है। व्यापारी को उसके शोषण की फिक्र है और लड़की उसे झटककर किसी और की हो जाती है। हताश अजय तब रेनु की ओर मुड़ता है, जिसे वह किसी समय चाहने लगा था। 
कहानी वर्तमान युग के नवयुवकों की त्रासदी को उजागर करती है, जिसमें वे वैवाहिक जीवन की जरूरतों को पूरा करने के लिए हर जोखिम-संघर्ष में स्वयं को झोंक देते हैं। यह मर्मस्पर्शी उपन्यास आज की अस्तित्ववादी वास्तविकता को समझने के लिए पाठकों को विवश करता है।

Manohar Bandhopadhyaya

मनोहर वंद्योपाध्याय
कवि, समीक्षक, अनुवादक तथा कथाकार
जन्म: वर्तमान बाँग्लादेश के राजशाही जिले में।
प्रारंभिक शिक्षा मध्य प्रदेश के कस्बों में ०  बी० ए० तथा एम० ए०  पूना विश्वविद्यालय से ०  पत्राकारिता, रूसी भाषा तथा पुस्तक प्रकाशन में डिप्लोमा आदि।
गत 35 वर्षों से देश के प्रतिष्ठित पत्रा-पत्रिकाओं में हिंदी तथा अंग्रेजी साहित्य पर लिख रहे हैं ० अनेक लेख और कविताएँ आकाशवाणी से प्रसारित हुईं।
आपने लगभग 30 वर्ष सरकारी पत्रिकाओं का संपादन किया ०   अंग्रेजी पत्रिका ‘सन’ के कविता चयनकार तथा साप्ताहिक समीक्षक।
मुख्य प्रकाशित पुस्तकें: ‘कामायनी’ का अंग्रेजी अनुवाद ०  हिंदी और अंग्रेजी में दस कविता-संग्रह ०  अंग्रेजी में कहानी-संग्रह तथा प्रेमचंद की जीवनी ०  भारती आंग्ल कविताओं का संपादन-‘नाइंटीन पोइट्स’ ०  हिंदी में दो उपन्यास-‘इससे आगे का इंतजार’ तथा ‘बहुत कुछ बाकी है’ ०  ‘लाइव्स एंड वक्र्स ऑफ ग्रेट हिंदी पोइट्स’ (भूमिका-डॉ. कर्णसिंह)

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