Dil Ko Mala Kare Hai

Vishnu Chandra Sharma

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  • Year: 2005

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 9788170166917

दिल को मला करें है
हिंदी  बहुत कम लेखकों ने जीवन के रग-रेशे को इतना करीब से बनते-बनाते, बिगड़ते-सँवरते देखा है, जैसा कि विष्णुचन्द्र शर्मा ने । प्रस्तुत उपन्यास आदि से अंत तक मनुष्य  जीवन-संघर्ष की गाथा है, जिसमें दुख  सुख है, राग है, विराग है, हर्ष है, विषाद है । जीवन  तमाम उतार-चढाव अपनी संपूर्णता में व्यक्त हुए है ।
'दिल को मला की है' स्मृति-आख्यान है। लेखक ने अपनी पत्नी के अवसान के बाद कलम-कागज से जुगलबंदी की, जिसका सुफल है यह औपन्यासिक कृति । पली की मृत्यु के बाद घर-आँगन, रसोई-बगीचा कैसे बिखरता है, दरो-दीवार कैसे टूटती है, बिलखती है ! उपन्यास का कथाक्रम ठीक मनुष्य के जीवन की तरह है । किसी आत्मीय जन का हँसते-बतियाते 'टुक' चुप हो जाना या ऐसी यात्रा पर निकल जाना, जहाँ से वापसी संभव नहीं, निस्संदेह शोक का कारण बनता है लेकिन बकौल उपन्यासकार इसी शोक से जीवन का राग फूटता है ।
पत्नी की स्मृतियों को खँगालते तथा डरो-दिवार में उसकी तलाश करने के क्रम में ढेरों पात्रों की जीवंत  उपस्थिति उपन्यास की रोचकता बढाती है । सरि पात्र जस के तस ।  बिना किसी शाब्दिक बुनावट के। मनुष्य मात्र मनुष्य होता है देवता या राक्षस नहीं। जिजीविषा ही उसकी पहचान है । काल भैरव, सादतपुर से लेकर यूरोप तक स्थितियाँ तथा विडंबनाएँ एक हैं, पर कोई भी पात्र निराश या हतोत्साहित नहीं दिखता ।

Vishnu Chandra Sharma

विष्णुचन्द्र शर्मा
जन्म : 1 अप्रैल, 1933 (काशी)
शिक्षा : एम०ए०एस० (पूर्वार्द्ध), काशी विद्यापीठ (1955)
एम०ए० (हिंदी), काशी हिंदू विश्वविद्यालय (1957)
प्रकाशित कृतियों
मौन शांत सेंदुर जल का, आकाश विभाजित है, तत्काल, अंतरंग, नयन हैं हिंदुस्तानी, अनुबंध,  धीरज का रथ, अनुभव की बात कबीर कहे, तलाश बसंत की, अव्वल तो मैं सनद हूँ, समय है परिपक्व (कविता); तालमेल, मंजरी, चाणक्य की जयकथा, बिडंबना, दिल को मला करे है (उपन्यास); अंत की शुरूआत, बेजुबान (नाटक); अपना पोस्टर, दोगले  सपने (कहानी); यात्री का देश (यात्रा); इन लोगों के मध्य, घराना, अभिन्न, हम अकेले कहाँ हैं, मनमोहन ठाकौर, चुप हैं यों (संस्मरण); अग्निसेतु (नजरुल), स्वराज के मंत्रदाता (तिलक), मुक्तिबोध की आत्मकथा, समय साम्यवादी (राहुल), कबीर की डायरी (जीवनी); राहुल का भारत, काल से होड़ लेता शमशेर, नश्यार्जुन : एक लंबी जिरह, गालिब और निराला : मेरा काव्यानुमान (आलोचना) ।
संपादित कृतियाँ:-
पंडित रामनारायण मिश्र स्मृति ग्रंथ, यथार्थ से साक्षात्कार यशपाल, अमृतलाल नागर, रेणु, अमरकांत, नया मानदंड आचार्य रामचंद्र शुक्ल अंक, नया मानदंड शिवदान सिंह चौहान अंक, अरघान (त्रिलोचन की कविताएं), शिवदान  सिंह चौहान की तीन पुस्तकों का संपादन ।

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