Angaaron Main Phool

Santosh Shelja

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  • Year: 2013

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Bhartiya Prakashan Sansthan

  • ISBN No: 9788188122219

अंगारों में फूल
माँ का अडिग साहस देख तिलक विस्मित थे । आज पहली बार मां व बाबा को अपने दु:ख का संवेदनशील श्रोता मिला था । इस लंबी वार्ता में तीनों की आँखें कईं बार गीली हुई और कई बार गर्व से छाती फूल उठी । जाने से पहले लोकमान्य ने झुककर माँ व बाबा के चरण स्पर्श किए और रुँधे कंठ से कहने लगे,  गौरवशाली बलिदान का श्रेय न मुझे है न उन्हें है-बल्कि सचमुच में इसका श्रेय आपको और आपकी बहुओं को है । गीता पढ़ना सरल है मां, पर उसे वास्तविक जीवन में उतारना बहुत ही कठिन है । एक बार मरना संभव है, किन्तु इस प्रकार मरण  को हृदय से लगाए हुए जिंदा रहना बहुत असंभव है । पर अपने वही कर दिखाया... धन्य है आप!'
[इसी पुस्तक से]

Santosh Shelja

संतोष शैलजा
अमृतसर (पंजाब) के एक गाँव में जन्म  संतोष शैलजा ने दसवीं तक शिक्षा वहीं प्राप्त की । भारतविभाजन की त्रासदी के पश्चात माता-पिता सहित दिल्ली आ गई । यहीं पर उच्च शिक्षा- एम०ए०, बी०एड० तक-ग्रहण की और कुछ वर्ष अध्यापन-कार्य किया । फिर श्री शान्ता कुमार है विवाहोपरांत पालमपुर, हिमाचल प्रदेश में रहने लगी । पति-पत्नी दोनों को लेखन में रुचि होने से दोनों की दस-दस पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी है ।
संतोष शैलजा की कुछ उल्लेखनीय पुस्तकें है :
उपन्यास : 'कनक छड़ी',  'अंगारों में फूल', 'निन्नी'
कहली-संग्रह : 'जौहर के अक्षर', ज्योतिर्मयी', 'पहाड़ बेगाने नहीं होंगे'
कविता-संग्रह : 'ओ प्रवासी मीत मेरे'
अन्य पुस्तकें : 'धोलाधार', 'हिमाचल की लोककथाएँ'

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