Aisa Satyavrat Ne Nahin Chacha Tha

Raj Kumar Gautam

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  • Year: 1998

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Parmeshwari Prakashan

  • ISBN No: 1111111111111

ऐसा सत्यव्रत ने नहीं चाहा था
सदी के इस कठिन और जटिल समय में हिन्दी के जिन युवा लेखकों ने उपन्यास लिखे हैं उनके बीच राजकुमार गौतम की 'उपस्थिति' महत्वपूर्ण और 'निजी' ढंग से हुई है । अपनी सादगी, संवेदनशीलता और आयासहीन शिल्प के लिए चर्चित राजकुमार गौतम का कहानीकार 'ऐसा सत्यव्रत ने नहीं चाहा था' में एक प्रौढ़, अनुभवी लेकिन जोखिम उठने वाले मछुआरे की तरह उतरा है । प्रतिकूलताओं और असभ्य जीवन स्थितियों के उछाल मारते, सिर पटकते पागल समुद्र की अतल गहराई में दुबली आस्था और संघर्ष की जो 'मछली' राजकुमार ने पकड़ी है और अपने नायक सत्यव्रत को सौंपी है उसके लिए इस उपन्यास को बहुत देर तक और दूर तक एक चमत्कार की तरह याद किया जाएगा ।
नामहीन-व्यक्तित्वहीन केंद्रीय चरित्रों के मौजूदा ममय में इस उपन्यास का 'सत्यव्रत’ वापसी है उस नामधारी व्यक्तित्व की जिसका लोप छठे दशक के उत्तरार्द्ध से आरंभ हुआ था । 'ऐसा सत्यव्रत ने नहीं चाहा था' में राजकुमार ने यथार्थ के स्तर-दर-स्तर उदघाटित करने के लिए जो अनेक आयामों वाली तीखी भाषा 'खोजी' है और प्रतिकुलताओं से लडते- भिड़ते लहूलुहान आदमी की गहरी त्रासदी, उदासी, करुणा और अंतर्द्वन्द्व को 'उभारने' के लिए जिस 'अंडरकरेंट' की तरह बहते 'सटायर' को चुना है वह मौजूदा समय में लिखी जा रही इकहरी और एकायामी रचनाओं के 'भब्भड़' में एक गहरा रचनात्मक सुख प्रदान करता है । भाषा के स्तर पर एक घटना के रूप में रेखांकित किया जा सकने वाला यह उपन्यास कथ्य के स्तर पर आज के आदमी की तकलीफदेह साँसो की गवाही तो है ही, यह गवाही है उसके टूटकर भी न टूटने की जिद और आकांक्षा की भी ।

Raj Kumar Gautam

राजकुमार गौतम 
जन्म : 1 अगस्त, 1955 (कनखल, हरिद्वार)
शिक्षा : बी०ए० (मेरठ विश्वविद्यालय)
कृतियाँ-
कहानी-संग्रह : काल दिन ०  उत्तरार्द्ध की मौत ०  आधी  छुट्टी का इतिहास ०  दूसरी आत्महत्या ० आक्रमण तथा अन्य कहानियां ०  कब्र तथा अन्य कहानियाँ
उपन्यास : ऐसा सत्यव्रत ने नहीं चाहा था
व्यंग्य कथा-संग्रह : वरंच ०  अँगरेज़ी की रंगरेजी 
संपादित संग्रह : आठवें दशक  के कहानीकार, सीपियां
नाट्य रूपांतर : सूत्रगाथा (मूल  : मनीषराय)
सहयोगी कृतियाँ : अंतर्यात्रा (इंटरव्यू) ०  सामना (कहानियाँ) धीरेन्द्र अस्थाना तथा बलराम के साथ
अन्य : लगभग 60 संपादित पुस्तके,  सहयात्री लेखक; 'आधी छुट्टी का इतिहास' को हिंदी अकादमी, दिल्ली  द्वारा कृति पुरस्कार (1986); 'आक्रमण तथा अन्य कहानियाँ' को उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान द्वारा यशपाल पुरस्कार (1990) सैंकडों पुस्तकों/पत्रिकाओं पर लिखी गई समीक्षात्मक टिप्पणियों का विभिन्न स्तरीय पत्र- पत्रिकाओं में प्रकाशन

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