Kokh

Roshan Premyogi

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  • Year: 2013

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 9789380048727

कोख
सन् 1984 से एक किशोरी एक राजा की हवश का शिकार बनती है । उसकी कोख से जन्मे बच्चे के मन से करीब 25 साल बाद अपने सांवले रंग और नयन-नक्श को लेकर संदेह पैदा होता है । सदेह पुख्ता होता है तो वह पिता से लड़ता है अपनी माँ के लिए ।
उपन्यास में तीन महिला पात्र हैं । इनमें मधुरिमा सिंह ने मुझे सबसे अधिक प्रभावित किया । वह पहले मुझे सौतेली मां की तरह लगी, लेकिन जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती  गई, वह धरती की तरह धैर्यवान और समुद्र की तरह गरमाहट से भरपूर मां लगी । आई.ए.एस. प्रभुनाथ सिंह  पहले खलनायक लगते हैं, लेकिन जब कहानी खुलती है तो तमाम पूर्वाग्रह ध्वस्त हो जाते है । शैलजा तो बहुत ही प्यारी और समझदार लड़की है, वह सीमान्त को बिखरने से बचाती है । दरअसल शैलजा खंड-खंड होकर नष्ट होने को तत्पर कुछ लोगों को फिर से एक परिवार बनने के लिए प्रेरित करती है । देखा जाए तो अपने व्यक्तित्व से शैलजा ही इस उपन्यास को बडा बनाती है । उसके प्यार को थोड़ा और स्पेस मिलना चाहिए था ।
गायत्री देवी का संघर्ष और दंश मन को झकझोर देता है । कहानी अंत तक बांधे रखती है मन को, लेकिन यह थोड़ा अजीब लगता है कि गायत्री देवी के दंश को लेखक ने बेटे के प्यार और नैतिकता के बोझ तले दबा दिया, वैसे यह पुरुषप्रधान समाज की रीति है ।

Roshan Premyogi

रोशन प्रेमयोगी

कृतियाँ-
उपन्यास : चिड़ियाघर ०  हैलो माँ ०  अयोध्या ०  क्रांतिकारी
निबंध-संग्रह : भारतीय राष्ट्रवाद : संगठित विश्वास का संकट
कहानियाँ : टैटू सेंटर ०  बुद्धू ०  तीसरी बेटी ०  काँवरिया ऑफ्टर होमवर्क ०  दहलीज पर आत्मनिर्णय आदि
पुरस्कार/सम्मान : बालकृष्ण शर्मा ‘नवीन’ स्मृति युवा पुरस्कार ०  प्रतापनारायण मिश्र स्मृति कथाकार सम्मान ०  सर्जना पुरस्कार ०  कथक अकादमी, लखनऊ से सांस्कृतिक पत्रकारिता पुरस्कार ०  ‘हंस’ पत्रिका द्वारा ‘बुद्धू’ कहानी पर अमृतलाल नागर कहानी पुरस्कार ०  सदी के अभिनेता अमिताभ बच्चन द्वारा पत्रकारिता पर प्रशंसा-पत्र ० श्री शक्ति महाविद्यालय द्वारा पत्रकारिता पर पुरस्कार

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