Samgra Kahaniyan : Ab Tak

Maitreyi Pushpa

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  • Year: 2011

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 9788190820493

समग्र कहानियाँ: अब तक
आँधी की तरह अपने उपन्यासों से पाठकों को झकझोर देने वाली मैत्रेयी पुष्पा ने स्त्री के अपने फैसलों की विचारोत्तेजक कहानियाँ-उपन्यास लिखे हैं। शहरी मध्यवर्गीय कहानियों के संसार को गाँव के उभरते मेहनतकश समाज से जोड़ा है, जहाँ अपनी परंपराएँ हैं, रूढ़ियाँ हैं और सबसे ऊपर है ‘खानदान की नाक’ और सब कुछ टिका है स्त्री के कंधों पर--जमीन और स्त्री ही उलझनों के केंद्र हैं और दोनों के ‘उत्पादन’ आपस में गुँथे हैं। सब मालिक की कृपा पर साँस लेते हैं। मैत्रेयी की स्त्रियों की सारी शिकायतें इसी मालिक से हैं कि वह साथी और हमसफर क्यों नहीं हो सकता--क्यों मालिक बनकर ढोर-डंगर की तरह औरत को ही हाँके रखता है। 
स्त्री का अपनी नियति को अस्वीकार करना ही सामाजिक मर्यादाओं का टूटना है।
स्त्री के उत्थान और सबलीकरण की ये कहानियाँ यथास्थिति से विद्रोह ही नहीं, भविष्य की दृष्टि से समाज-परिवर्तन की ध्वजवाहिनी भी हैं। मैत्रेयी ने कहानियाँ शहरी जीवन को लेकर भी लिखी हैं, मगर जिस आत्मीयता और गहराई से उन्होंने गाँव के जीवन को देखा है वह हिंदी में प्रेमचंद और रेणु 
के सिवा शायद ही किसी को नजर आया हो। ये बेजुबानी स्त्री की यातनाओं, उसके संघर्षों और सपनों के बेआवाज विद्रोह की दस्तावेज हैं।

Maitreyi Pushpa

मैत्रेयी पुष्पा
जन्म : 30 नवंबर, 1944, अलीगढ़ जिले के 'सिकुर्रा' गांव से
आरंभिक जीवन : जिला झाँसी के 'खिल्ली' गाँव में
शिक्षा : एम० ए० (हिंदी साहित्य) बूंदेलखंड कॉलेज, झाँसी
प्रकाशित रचनाएं : बेतवा बहती रही, इदन्नमम, चाक, झूला नट, अल्मा कबूतरी, विजन, अगनपाखी, कही ईसुरी फाग (उपन्यास); गोमा हंसती है, ललमनियाँ, चिन्हार (कहानी); कस्तूरी कुंडल बसै (आत्मकथा), खुली खिड़कियाँ (स्त्री-विमर्श)
- 'फैसला' कहानी पर टेलीफिल्म 'बसुमती की चिटूठी'
- 'इदन्नमम' उपन्यास पर आधारित साँग एंड ड्रामा डिवीजन द्वारा निर्मित छायाचित्र 'संक्रांति'
सम्मान-पुरस्कार : 'सार्क लिटरेरी अवार्ड' और 'द हंगर प्रोजेक्ट' द्वारा दिए गए 'सरोजिनी नायडू पुरस्कार' के अतिरिक्त अनेक राष्ट्रीय एवं प्रादेशिक पुरस्कारों से सम्मानित

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