Safar Baavajood

Sidhesh

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  • Year: 2004

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 9788170166467

सफर बावजूद
सिद्धेश की कहानियाँ कहानी-आंदोलन के उस दौर की उपज  हैं, जब कहानी में कलावाद की यथार्थवाद का संघर्ष चल रहा था । गुटबाजी, शिबिरबद्धता चरम पर थी । सिद्धेश  को यह शोर-शराबा पसंद न था । वे मौन भाव से सृजनरत थे । तटस्थ बने रहने का खामियाजा यद्यपि उन्हें भुगतना पडा । उनकी कहानियां फॉर्मूलाबद्ध लेखन तथा किताबी नुस्खों से मुक्त हैं । सिद्धेश ने कहानियों में शिल्पगत चमत्कार, भाषा की पच्चीकारी की जगह सहजता को महत्त्व दिया है । वे मुख्यत: नागर-मानसिकता के कहानीकार हैं, पर उनकी कहानियां सामाजिक सरोकारों से प्रतिबद्ध हैं।
संग्रह की इन कहानियों से विषयवस्तु की विविधता के साथ ही मानवीय दृष्टि और संवेदना का विस्तार है । ये कहानियाँ अपने समय और परिवेश के स्पंदनों को पहचानने की कोशिश करती हैं । मानव-मन की सूक्ष्म परख की कला  में माहिर हैं सिद्धेश । वे विचारधारा से अधिक मनुष्य और उसकी संवेदनाओं को महत्व देते हैं। उनके अनुसार, "संवेदना के स्रोत में बहने के लिए अपने चारों तरफ के परिवेश, चरित्रों और घटनाओं के प्रति सजग दृष्टि रखनी पडती है ।" सृजन को सिद्धेश 'जीने के मकसद' से जोड़कर देखते  । संघर्षों, अभावों से जूझते हुए ही उन्होंने अपनी रचना-दृष्टि अजित की है।
सहजता और सार्वज़निकता इन कहानियों का वैशिष्ट्य है। कहानी का रूप-गठन और रचना-विधान कुछ इस तरह है कि आधुनिक नागरिक जीवन के अनेक अनछुए तथा मार्मिक प्रसंगों का मनोवैज्ञानिक चित्रण बिना किसी अतिरंजना के यहाँ चित्रित हुआ है ।

Sidhesh

सिद्धेश
जन्म : 17 अगस्त, 1938 (कन्हौली ग्राम, जिला पटना)
शिक्षा : एम०ए० (हिंदी), कोलकाता विश्वविद्यालय
प्रकाशित पुस्तकें - कहानी-संग्रह : अनाम कथा संग्रह ०  मेरी दो लंबी कहानियां और पारो ० अर्थहीन वह मैं ० अनुपस्थित शहर ०  आदमी और प्रकृति  ०  शीशा दीवार ०  कमरा खाली ०  गंगु आजादा
लघु उपन्यास : केंचुल ०  जिंदगी सफरनामा।
संपादन : परंपरा (मासिक) ० अभिनय (मासिक) ०  समवेत (त्रैमासिक) ० वागर्थ में सहयोगी संपादन ।
अनुवाद : बांग्ला के तीन उपन्यास, एक कविता-संग्रह एवं अनेक कहानियां, कविताएं विभिन्न प्रकाशनों के लिए हिंदी में । 
अन्य : हिन्दी एवं भारतीय भाषाओं की कहानियों का संकलन एवं बाँग्ला से संपादन। 
सम्मान : हिंदी और बाँग्ला के बीच सेतु के रूप में 'अपनी भाषा' संस्था द्वारा समादृत एवं साप्ताहिक हिंदुस्तान' को प्रणय-कथा प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार ।

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