Parda Beparda

Yogendra Dutt Sharma

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  • Year: 2009

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Amarsatya Prakashan

  • ISBN No: 9788188466610

पर्दा-बेपर्दा
कहाँ है सभ्यता ? किधर है प्रगति ? कैसा है विकास ? इतिहास की लंबी यात्रा करने के बाद भी हम मानसिक रूप से शायद अब भी वहीं के वहीं हैं जहाँ से शुरू हुई थी हमारी यात्रा। सच पूछें, तो हम आज भी किसी आदिम अवस्था में ही जी रहे हैं। क्या सभ्यता का कोई विकास-क्रम हमारी बर्बरता को मिटा पाया है ?
विश्व-मंच पर ही नहीं, देशीय परिवेश में भी सभ्य, सुसंस्कृत और विकसित होने का हमारा दंभ निरर्थक और खोखला ही सिद्ध होता है।
योगेन्द्र दत्त शर्मा की ये कहानियाँ बताती हैं कि कैसे हम आज अनेक विपरीत धु्रवों पर एक साथ जी रहे हैं। कहना ज़रूरी है कि ‘पर्दा-बेपर्दा’ की ये कहानियाँ फैशनपरस्त कहानियों की दुनिया से अलग मानवीय संवेदनाओं को जगाने वाली ऐसी सार्थक रचनाएँ हैं जो लंबे समय तक अपनी प्रासंगिकता बनाए रखेंगी।

Yogendra Dutt Sharma

योगेन्द्र दत्त शर्मा
जन्म-30 अगस्त, 1950
विगत 35 वर्षों से लेखन। कवि-कथाकार के रूप में चर्चित। कई रचनाएँ पुरस्कृत/सम्मानित। सभी स्तरीय पत्र-पत्रिकाओं में कविता, कहानी, नाटक, निबंध आदि प्रकाशित। ‘नवगीत दशक-3’, ‘नवगीत अर्द्धशती’ आदि महत्त्वपूर्ण संकलनों में गीत संकलित। ‘साठोत्तर हिंदी गीतिकाव्य में संवेदना और शिल्प’ विषय पर शोध-कार्य। अनेक वर्षों तक ‘आजकल’ पत्रिका में संपादन-सहयोग।
प्रकाशित कृतियाँ-
‘खुशबुओं के दंश’, ‘परछाइयों के पुल’, ‘दिवस की फुनगियों पर थरथराहट’ (सभी नवगीत-संग्रह); ‘विसंवाद’ (कहानी-संग्रह); ‘आए दिन छुट्टी के’ (बाल-कविताएँ); ‘नक़ाब का मौसम’ (ग़ज़ल-संग्रह)

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