Muhim

Sitesh Alok

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  • Year: 2015

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Parmeshwari Prakashan

  • ISBN No: 9789380048819

कहानियाँ किसी अन्य अनजान लोक से नहीं आतीं...हमारे बीच, हमारे आसपास ही उपजती और पनपती रहती हैं...किंतु कोई साहित्यकार ही अपनी पारखी दृष्टि से चुनकर और संवेदना से सँवारकर उन्हें शब्दों के संसार में स्थापित करता है। 
बहुमुखी प्रतिभा के धनी डॉ. सीतेश आलोक ने गत तीन दशकों में साहित्य की अनेकानेक विधओं में अपने अवदान द्वारा एक विशिष्ट स्थान प्राप्त किया है। उपन्यास, कहानी, कविता, यात्रा-वृत्तांत, व्यंग्य, समसामयिक विषयों पर लेख आदि पर लिखी डॉ. आलोक की अनेक पुस्तकों को न केवल पाठकों ने सराहा, कई संस्थाओं ने सम्मान भी प्रदान किया। मौलिकता इनके लेखन की एक विशेषता है। इनके चरित्र एवं कथानक न तो किसी साँचे में ढलकर आते हैं और न किसी वाद से प्रभावित होकर रूपाकार ग्रहण करते हैं।
डॉ. सीतेश आलोक उन इने-गिने लेखकों में से हैं जिनमें लीक से हटकर अनेक ऐसे विषयों पर भी लिखने का साहस है, जिन्हें अधिकांश लेखक छूने से भी कतराते हैं।
इस संग्रह की अनेक कहानियाँ वागर्थ, साक्षात्कार, समकालीन भारतीय साहित्य, कथादेश, साहित्य अमृत, नयी धारा आदि में प्रकाशित एवं आकाशवाणी से प्रसारित हो चुकी हैं।

Sitesh Alok

सीतेश आलोक 
प्रयाग वि. वि. से एम. ए., पी-एच. डी.; भातखंडे संगीत 
म. वि. (पुणे) से संगीत विशारद; क्वीन एलिज़ाबॅथ हाउस, ऑक्सफोर्ड की विज़िटिंग फलोशिप (1981-82)।
चित्रकला एवं पर्यटन में भी विशेष रुचि।
साहित्य की लगभग सभी विधाओं में लेखन, जो सभी प्रमुख पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित और रेडियो-टेलीविज़न द्वारा प्रसारित हुआ। अनेक रचनाएँ तमिल, पंजाबी, उड़िया, मराठी, गुजराती, तेलुगु, कन्नड़, भोजपुरी, असमिया तथा अंग्रेज़ी आदि में भी प्रकाशित।
प्रकाशन: महागाथा (उपन्यास); रेंगती हुई शाम, अंध सवेरा, नासमझ, तुम कहो तो..., मुहिम (कथा-संग्रह); कैसे-कैसे लोग, विचित्र (लघुकथाएँ); बच गया आकाश, यथासंभव, बाज़ार में गुड़िया, छोटा सा सपना, गाते गुनगुनाते (काव्य); सूरज की छुट्टी, चंदर का सुख, तपस्या, परिणाम और सोने की टिकिया (बाल साहित्य)।
अन्य: लिबर्टी के देश में, परनिंदा परमं सुखं, रामायण पात्र-परिचय, मानस मंगल, यथार्थ रामायण आदि।
हिंदी अकादमी दिल्ली से साहित्य सम्मान तथा कृति सम्मान; उ. प्र. हिंदी संस्थान से साहित्य भूषण तथा अनुशंसा सम्मान; केंद्रीय हिंदी संस्थान से राहुल सांकृत्यायन सम्मान; विश्व हिंदी सम्मेलन का राष्ट्रीय हिंदीसेवी सम्मान, भारतीय साहित्य परिषद, दिल्ली से कृति सम्मान आदि अनेक सम्मानों से विभूषित।

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